NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
अंतरराष्ट्रीय
COP26: WMO की 'स्टेट ऑफ क्लाइमेट रिपोर्ट' से ख़तरनाक स्थिति का पता चलता है
डब्लूएमओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रचंड गर्मी की लहरें और भारी बाढ़ जैसी चरम स्तर की मौसमी घटनायें अब 'नयी आम स्थिति' बन गयी हैं, क्योंकि दुनिया "हमारी नज़रों के सामने ही बदल रही है।"
संदीपन तालुकदार
02 Nov 2021
COP26
Image Courtesy: Boolmberg.com

COP (कांफ़्रेंस ऑफ़ पार्टीज) 26 की बैठक यूनाइटेड किंगडम स्थित ग्लासगो में 31 अक्टूबर से शुरू हो गयी है। इस साल के जलवायु शिखर सम्मेलन को एक अहम बैठक इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि मानव निर्मित जलवायु संकट को कम करने के लिए मनुष्य के पास अब ज़्यादा समय नहीं रह गया है। लगातार उच्च उत्सर्जन स्तर, समुद्र के स्तर में ख़तरनाक बढ़ोत्तरी, चरम मौसमी स्थिति, सूखा और बाढ़ के साथ-साथ दूसरे तमाम संकेतक मनुष्य की ओर से पैदा किये गये कारकों के चलते बिगड़ती वैश्विक जलवायु को दिखाते हैं, ऐसे में तमाम देशों के ओर से तत्काल, गंभीर और प्रभावी नीतिगत क़दम उठाने की ज़रूरत है।उम्मीद जतायी जा रही है कि COP26 से जलवायु पर हो रहे हमले को कम करने के सिलसिले में इन देशों को एक रूपरेखा बनाने में मदद मिलेगी और वे पूरी प्रतिबद्धता के इसे लेकर आगे आयेंगे।

इस जलवायु शिखर सम्मेलन के शुरू होने से हफ़्ते भर पहले से मानव गतिविधियों और संभावित तबाही के चलते वैश्विक जलवायु को निरंतर हो रहे नुक़सान को उजागर करने की कोशिश में कई रिपोर्टें सामने आयी हैं। इस तरह की हालिया रिपोर्टों में से एक रिपोर्ट "स्टेट ऑफ़ क्लाइमेट रिपोर्ट 2021" है, जिसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ओर से COP26 के शुरुआती दिन में प्रकाशित किया गया था। इस रिपोर्ट में भी ख़तरनाक जलवायु स्थिति का खुलासा किया गया है।

WMO की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रचंड गर्मी की लहरें और भारी बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनायें अब एक "नयी आम स्थिति" हैं और दुनिया "हमारी नज़रों के सामने ही बदल रही है।"

इस आकलन रिपोर्ट में ख़तरनाक तौर पर कहा गया है कि 2002 से शुरू होकर 20 सालों में औसत वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा बढ़ने की स्थिति में है। ऐसा पहली बार होने जा रहा है। साल 2021 में समुद्र का स्तर भी एक नयी ऊंचाई पर पहुंच गया है।

'स्टेट ऑफ़ द क्लाइमेट' की इस रिपोर्ट में जलवायु संकेतकों,यानी तापमान, समुद्र के स्तर में बढ़ोत्तरी, चरम मौसमी घटनाओं और समुद्र की स्थिति आदि की एक झलक मिलती है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक़, इस साल सहित पिछले सात साल रिकॉर्ड स्तर के सबसे गर्म साल रहे हैं, इसमें ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी शामिल है,जिसने वातावरण में रिकॉर्ड स्तर की उच्च सांद्रता को छू लिया है।

डब्ल्यूएमओ की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनहाउस गैसों में भारी इज़ाफ़े के साथ-साथ तापमान में बढ़ोत्तरी इस धरती को एक "अज्ञात क्षेत्र" में ले जा रही है, और दुनिया भर में इसका प्रचंड प्रभाव देखा जा रहा है।

इस रिपोर्ट और बिगड़ती जलवायु स्थिति पर WMO के प्रो. पेटेरी तालस का कहना है, “ये चरम घटनायें नये मानदंड हैं। ये इस बात के बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि इनमें से कुछ मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन के निशानी हैं।”

इस साल चरम मौसम की घटनाओं को लेकर जो अनुभव हुए हैं,उसे लेकर भी प्रो.तालस ने विस्तृत ब्योरा दिया है-

  • अधिकृत तौर पर पहली बार ग्रीनलैंड की ब़र्फ की चादरों की चोटी पर हिमपात के बजाय बारिश हुई है।
  • कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी की लहरें उठी हैं, जिससे कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित एक गांव का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया था।
  • कैलिफ़ोर्निया की डेथ वैली ने दक्षिण-पश्चिमी अमरीका से गुज़रने वाली गर्मी की कई लहरों में से एक लहर ने तो 54.4 डिग्री सेल्सियस तापमान को छू लिया था।
  • चीन के किसी इलाक़े में तो इतनी ज़बरदस्त बारिश हुई कि कुछ ही घंटों में महीनों की बारिश के बराबर हो गयी थी।
  • यूरोप के कुछ हिस्सों में भयंकर बाढ़ आयी, जिसमें कई लोग हताहत हुए और अरबों का नुक़सान हुआ।
  • दूसरी ओर, उष्णकटिबंधीय दक्षिण अमेरिका में लगातार दूसरी बार सूखा पड़ा, जिसका नतीजा यह हुआ कि नदी बेसिन का प्रवाह कम हो गया, और इससे कृषि, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

रिपोर्ट में इस बात को बार-बार कहा गया है कि सबसे ख़तरनाक स्थिति तो दुनिया भर में समुद्र स्तर में हुई बढ़ोत्तरी है। 1990 के दशक में पहली बार उपग्रह आधारित प्रणालियों की मदद से समुद्र स्तर में हुई वृद्धि को ठीक से मापा गया था और तब से 1993-2002 की अवधि के बीच यह स्तर 2.1 मिलीमीटर की मात्रा में बढ़ गया।

उसके बाद 2013-2021 के बीच समुद्र के स्तर में हुई यह वृद्धि दोगुनी से ज़्यादा,यानी कि 4.4 मिलीमीटर हो गयी है, जो कि ग्लेशियरों और बर्फ़ की चादरों से बर्फ़ का हुआ त्वरित नुक़सान का नतीजा है।

ब्रिस्टल ग्लेशियोलॉजी सेंटर के निदेशक जोनाथन बॉम्बर समुद्र के इस ख़तरनाक स्तर में हो रही बढ़ोत्तरी पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “पिछले दो हज़ार सालों में किसी भी समय के मुक़ाबले इस समय समुद्र का स्तर तेज़ी से बढ़ रहा है। अगर यह बढ़ोत्तरी इसी स्तर पर जारी रहती है, तो यह 2100 तक 2m से ज़्यादा हो सकती है, जिससे दुनिया भर में तक़रीबन 630 मिलियन लोग विस्थापित हो सकते हैं। इसके जो कुछ भी नतीजे होंगे,उसकी कल्पना कर पाना भी मुमकिन नहीं है।”

एक बार फिर 2021 का साल अधिकृत रूप से तापमान में हो रही बढ़ोतरी का छठा या सातवां सबसे गर्म साल होने की संभावना है। इस तथ्य के साथ यह रिपोर्ट बताती है कि यह वैश्विक तापमान 20 सालों की अवधि में पहली बार 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी को पार करने जा रहा है।

डब्लूएमओ रिपोर्ट में योगदान देने वाले यूके मेट ऑफ़िस के मुख्य वैज्ञानिक स्टीफ़न बेल्चर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, "सचाई यह है कि 20 साल का यह औसत पूर्व-औद्योगिक स्तरों से  भी 1.0C ज़्यादा तक पहुंच गया है। वैश्विक तापमान की बढ़ोत्तरी के इस स्तर पर छह साल पहले पेरिस में सहमत सीमा के भीतर रखने के इच्छुक COP26 में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का ध्यान केंद्रित रहेगा। ”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

COP26: WMO’s ‘State of Climate Report’ Reveals Alarming Situation

COP26
WMO
World meteorological organization
WMO Report
State of Climate Report 2021
Sea Level Rise Doubles
climate emergency
Extreme weather
Canada Heat Waves
European Floods

Related Stories

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

कोप-26: मामूली हासिल व भारत का विफल प्रयास

COP-26 में जिस एकमात्र व्यक्ति पर गिरफ़्तारी के बाद धाराएं लगाई गईं, वह कम्यूनिस्ट था

काॅप 26 और काॅरपोरेट

अमीरों द्वारा किए जा रहे कार्बन उत्सर्जन से ख़तरे में "1.5 डिग्री सेल्सियस" का लक्ष्य

COP26: वॉल स्ट्रीट ने जलवायु संकट वित्तपोषण की शुरूआत की

मौसम परिवर्तन: वैश्विक कार्बन उत्सर्जन पूर्व महामारी स्तर पर पहुंचने के करीब

जलवायु परिवर्तन संकट से दुनिया बचाने का दांव और इधर रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से तबाही

कॉप26 : भारत कर रहा है पर्यावरणीय संकटों का सामना  

जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च


बाकी खबरें

  • सताए हुए लोगों की ‘अक्का’ बन गई थीं गौरी
    राजेंद्र चेन्नी
    सताए हुए लोगों की ‘अक्का’ बन गई थीं गौरी
    05 Sep 2021
    जब गोलियों से छलनी उनकी कमजोर काया खून में सराबोर जमीन पर पड़ी थी, तब भी वह एक ‘गुब्बाची’ की तरह ही दिख रही थी। सदमे और दुख से भरे हममें से किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था कि इस छोटी और कमजोर देह को…
  • अगर हम अपनी आवाज़ उठाएंगे, तो गौरी की आवाज़ बुलंद होगी
    गीता हरिहरन
    अगर हम अपनी आवाज़ उठाएंगे, तो गौरी की आवाज़ बुलंद होगी
    05 Sep 2021
    प्रसिद्ध लेखक गीता हरिहरन ने गौरी लंकेश की याद में पिछले साल 2020 में यह लेख लिखा था। जो आज भी प्रासंगिक हैं। अपने इस लेख में गीता कहती हैं कि “तीन साल बाद, 2020 में अब भी कुछ नहीं बदला है। ईमानदारी…
  • किसान सिखाएंगे सबक़ मोहब्बत का: ग़ुलाम मोहम्मद
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान सिखाएंगे सबक़ मोहब्बत का: ग़ुलाम मोहम्मद
    04 Sep 2021
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने मुज़फ़्फ़रनगर में किसान पंचायत की तैयारी का जायजा लेते हुए, 84 साल के मशहूर किसान नेता ग़ुलाम मोहम्मद से बातचीत की और जानने की कोशिश की कि किस तरह से…
  • फेक न्यूज-हेट न्यूज के 'मास्टरमाइंड' कैसे करेंगे मीडिया का सही रेगुलेशन?
    न्यूज़क्लिक टीम
    फेक न्यूज-हेट न्यूज के 'मास्टरमाइंड' कैसे करेंगे मीडिया का सही रेगुलेशन?
    04 Sep 2021
    बीते साल तब्लीगी जमात के एक कार्यक्रम के मीडिया कवरेज पर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया के एक हिस्से की खबरों में जवाबदेही का अभाव, सांप्रदायिकता और नफरत…
  • अफ़ग़ानिस्तान: अपने हक़ के आवाज़ उठाती महिलाएं, तालिबान से मांग रही हैं बराबरी का अधिकार
    सोनिया यादव
    अफ़ग़ानिस्तान: अपने हक़ के आवाज़ उठाती महिलाएं, तालिबान से मांग रही हैं बराबरी का अधिकार
    04 Sep 2021
    महिलाएं अब सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाने के बजाय तालिबान की आंखों में आंखें डालकर अपने शिक्षा और रोजगार का हक़ मांग रही हैं, अपनी आज़ादी के लिए संघर्ष कर रही हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License