NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
अर्थव्यवस्था
ग्रामीण भारत: कोरोना के चलते धंधा ठप, पटियाला में ग्रामीण मुफ्त में बांट रहे दूध
हाई ब्लड-प्रेशर और मधुमेह की दवाओं की कमी ने पंजाब के पटियाला के हिअना कलां गांव के लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
हरजिंदर सिंह
11 Apr 2020
ग्रामीण भारत
Image Courtesy: Indian Iris

यह उस श्रृंखला की सातवीं रिपोर्ट है, जो कोविड-19 से संबंधित नीतियों के ग्रामीण भारत पर पड़ रहे असर को सामने लाती है। सोसायटी फ़ॉर सोशल एंड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा संचालित इस श्रृंखला में भारत के अलग-अलग हिस्सों में गांवों का अध्ययन कर रहे विभिन्न शोधार्थियों की रिपोर्ट को शामिल किया गया है। गांवों के अपने संपर्कों से टेलीफोनिक साक्षात्कार करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

इस रिपोर्ट में पंजाब के पटियाला जिले के हिअना कलां गांव का सूरत-ए-हाल बयान किया गया है, जहां लॉकडाउन के कारण नज़दीकी शहरी क्षेत्र से गांव का संपर्क टूट जाने के बाद वित्तीय घाटा तो हुआ ही है, साथ में खाद्य सुरक्षा जैसे कई संकटों का सामना ग्रामीण कर रहे हैं। गेहूं की कटाई के नज़दीक आते समय और मंडियों में पैदावार को लेकर न जा पाने की असमर्थता ने किसानों को बेचैन कर दिया है।

पटियाला जिले के हिअना कलां गांव की आबादी आंगनबाड़ी के रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 1100 है। गांव में काफ़ी आबादी भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों और ज़मींदार किसानों की है। यहां के बहुत सारे ग्रामीण, जिनमें आदमी और औरत दोनों शामिल हैं, पास के कस्बों में कृषि से इतर व्यवसायों में काम करते हैं।

जैसा कि ऊपर बताया गया है, बहुत से ग्रामीण गांव से बाहर जाकर कृषि आधारित औद्योगिक इकाइयों, किराने की दुकानों, मेडिकल स्टोर, ऑटोमोबाइल की मरम्मत करने वाली दुकानों और पेट्रोल पंपों पर काम करते हैं। कुछ लोग बतौर प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और राजमिस्त्री भी काम करते हैं, वहीं कुछ महिला मज़दूर कस्बों में घर की सहायिका के रूप में या गांव के बाहर सब्ज़ी के खेतों में काम करती हैं।

लॉकडाउन का इन श्रमिकों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इन्हीं में से एक ने संपर्क करने पर बताया कि लॉकडाउन की वजह से काम पर न जा पाने के कारण उनकी और उनके जैसे अन्य सभी श्रमिकों की दिहाड़ी पूरी तरह ख़त्म हो गयी है।

गांव के किसान रबी के सीज़न में मुख्य रूप से गेहूं उगाते हैं। ऐसे सभी किसान गेहूं की कटाई को लेकर चिंतित हैं, जो आमतौर पर अप्रैल महीने के मध्य में शुरू होती है। वैसे तो किसान सब्ज़ियां भी उगाते हैं, पर अमूमन इनकी खपत घर में ही हो जाती है। सब्ज़ी की खेती करने वाले एक संपर्क ने बातचीत में बताया कि लॉकडाउन के दौरान भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि उपज को मंडी तक पहुंचाने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। हालांकि, ऐसे भूमिहीन किसान जो गांव के ही ज़मींदार किसान परिवारों पर काम के लिए आश्रित हैं, उन पर बहुत ज़्यादा प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।

हिअना कलां गांव में दूध का उत्पादन भी अच्छी मात्रा में होता है। बिचौलिये दिन में दो बार इस उत्पादन का बड़ा हिस्सा खरीदते हैं और फिर इसे शहरी क्षेत्रों में बेचते हैं। बचा हुआ दूध गांव के उन घरों में बेच दिया जाता है जिनके पास मवेशी नहीं होते या खुद ही इस्तेमाल कर लिया जाता है।

हमारे संपर्क ने बताया कि लॉकडाउन के शुरुआती दो दिनों में बिचौलियों ने दूध खरीदने से मना कर दिया, क्योंकि शहरी क्षेत्रों के मिल्क बूथ बंद पड़े थे। इस वजह से दुग्ध उत्पादन करने वाले परिवारों ने दूध की बिक्री से होने वाली अपनी सारी कमाई खो दी, जबकि उत्पादन लागत तो सारी लगी ही थी; कुछ को तो दूध मुफ़्त में बांटना पड़ा।

लॉकडाउन के तीसरे दिन से बिचौलिये ने दूध खरीदना शुरू तो किया, पर दिन में केवल एक ही बार, सुबह के समय। उन्होंने शाम को दूध खरीदना ही बंद कर दिया। परिणामस्वरूप, दूध की कीमत गिर गयी है, और पशुधन मालिकों ने अपनी आय का आधा हिस्सा गंवा दिया है।

जहां तक मनरेगा योजना का सवाल है, एक पंचायत सदस्य ने बताया कि मनरेगा के तहत गांव में सौ से अधिक घर पंजीकृत हैं, लेकिन, लॉकडाउन शुरू होने के बाद से श्रमिकों को एक दिन का काम भी नहीं मिला है।

लॉकडाउन से बैंकिंग जैसी मूलभूत सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। गांव से तीन किलोमीटर दूर एक वाणिज्यिक बैंक मौजूद है, पर लॉकडाउन के कारण एटीएम तक पहुंच पाना लगभग नामुमकिन हो गया है। राज्य सरकार ने वृद्धा व विधवा पेंशन संबंधित खातों में डाल दिये हैं, लेकिन लाभार्थी बैंक से नकदी नहीं निकाल पा रहे हैं।

गांव के ज़्यादातर घर ज़रूरी राशन के लिए स्थानीय दुकानों और फेरीवालों पर निर्भर हैं।लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में अधिकांश दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखी थीं, और सब्ज़ी या अन्य कोई सामान बेचने के लिए शायद ही किसी फेरीवाले को गांव जाने की अनुमति दी गयी थी।

दो दिन बाद भले ही दुकानदारों ने अपनी दुकानें फिर से खोल ली थीं, पर वे लॉकडाउन के शुरू होने से पहले ही उधार पर कुछ भी देने से मना कर चुके थे। चीनी, दाल और आटे की कीमतें बढ़ गयी थीं।

हमारे संपर्क ने, जो एक किराने की दुकान का मालिक है, स्पष्ट किया कि थोक बाजार में भी सभी ज़रूरी सामानों की कीमतें बढ़ गयी हैं। प्रशासन ने एक सब्ज़ी विक्रेता को गांव में केवल सुबह के वक़्त सब्ज़ी बेचने की अनुमति दी है। लेकिन, सब्ज़ियां भी पहले के मुकाबले महंगी हो गयी हैं।

यही नहीं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) द्वारा अनाज वितरण भी पर्याप्त नहीं हो रहा है। गांव के केवल 426 निवासियों को ही प्रति व्यक्ति/प्रति माह 5 किलो गेहूं दिया गया है। राहत सामग्री के अभाव और वितरण में देरी के बीच गैर-सरकारी संगठन और युवा संगठन आगे आये हैं।

भोजन की कमी का सामना कर रहे कई परिवारों को 'कार सेवा' नामक युवाओं के एक समूह ने राशन मुहैया कराया है। 'वेलफेयर सोसायटी नभा' नामक एक गैर-सरकारी संगठन ने भी गांव के गरीब परिवारों को राशन देने की सूचना दी थी।

गांव के हमारे सभी संपर्कों ने बताया कि हाई ब्लड-प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को ज़रूरी दवाओं की किल्लत पेश आ रही है। जिन बुजुर्गों को चिकित्सकीय सहायता की ज़रूरत है, उन्हें न दवाएं मिल पा रही हैं, न उनका उपचार हो पा रहा है।

कोविड-19 को लेकर ग्रामीणों को शिक्षित करने के लिए स्थानीय या राज्य सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा कोई दौरा नहीं किया गया है। हालांकि, गांव की सभी गलियों की सफाई का ज़िम्मा गांव के गुरुद्वारे की प्रबंधक समिति द्वारा उठाया गया है।

लॉकडाउन के कारण नज़दीकी शहरी क्षेत्र से गांव का संपर्क टूट जाने के बाद वित्तीय घाटा तो हुआ ही है, साथ में खाद्य सुरक्षा जैसे कई संकटों का सामना हिअना कलां गांव के लोग कर रहे हैंं। गेहूं की कटाई के नज़दीक आते समय और मंडियों में पैदावार को लेकर न जा पाने की असमर्थता ने किसानों को बेचैन कर दिया है।

{यह लेख 10 लोगों (गांव के सात वार्डों से एक-एक ग्रामीण, एक ग्राम पंचायत सदस्य, एक दुकानदार और एक फेरीवाला) के टेलीफोनिक साक्षात्कार पर आधारित है, जो 30 व 31 मार्च के बीच लिए गये थे।}

लेखक पटियाला के पंजाबी यूनिवर्सिटी में पीएचडी शोधार्थी हैं।

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

COVID-19 in Rural India-VII: Unable to Sell Milk, Patiala Villagers Distribute for Free

COVID 19 Lockdown
COVID 19 Pandemic
Coronavirus
COVID Impact on Economy
Rural Economy
COVID 19 in Punjab
Patiala
farmers distress
Delay in PDS Distribution
COVID 19 Relief
MGNREGA

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  •  कार्टून क्लिक: पुराने मंत्रियों को हटाया, थैंक्यू मोदी जी; नये को बनाया थैंक्यू मोदी जी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कार्टून क्लिक: पुराने मंत्रियों को हटाया, थैंक्यू मोदी जी; नये को बनाया थैंक्यू मोदी जी
    07 Jul 2021
    असल सवाल तो यही है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में किसी और मंत्री को काम करने की आज़ादी है। क्या इस फेरबदल या विस्तार का कोई मतलब भी है या बस कुछ और लोगों को एक पद, एक पदवी से…
  • पीपल्स डिस्पैच
    ईरान का दावाः वियना वार्ता को नाकाम करने के लिए इज़रायल ने पिछले महीने परमाणु स्थल पर हमला किया
    07 Jul 2021
    साल 2018 में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका की वापसी में इज़रायल का दबाव अहम था और इसकी सरकारों ने इस समझौते के पूर्वरूप में लाने के लिए जो बाइडेन के आह्वान का विरोध किया है।
  • एजाज़ अशरफ़
    बॉब डिलन से प्रेरित : "हू किल्ड स्टेन स्वामी?"
    07 Jul 2021
    कार्यकर्ता-पादरी स्टेन स्वामी की बीमारियों और जेल में कोविड संक्रमित होने के बाद से हुई परेशानियों की वजह से मृत्यु हो गई।
  • typ
    शिंजानी जैन
    मप्र : वन उत्पादों को इकट्ठा करने वाले आदिवासियों की ख़राब हालत कोविड-19 के चलते बदतर हुई
    07 Jul 2021
    मध्यप्रदेश के जंगलों में रहने वाली स्थानीय आबादी और वन घूमंतु समुदाय की 'अल्प वन उत्पादों' के एकत्रीकरण और बिक्री से होने वाली आय को, इन उत्पादों के सीज़न में जारी महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन से…
  • capitalism
    प्रभात पटनायक
    क्या पूंजीवादी व्यवस्था में निवेश का सामाजीकरण सब दुरुस्त कर सकता है?
    07 Jul 2021
    बिना विकट मुद्रास्फीति संकट के कारण पैदा हुई व्यवस्था की विफलता के, पूंजीवादी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी कभी भी एक निश्चित स्तर से नीचे नहीं गिर सकती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License