NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
भारत में ग़रीबों की अग्निपरीक्षा
यदि सरकारी राहत ग़रीबों तक तुरंत नहीं पहुंचती है, तो उनके पास केवल दो ही विकल्प रह जाएंगे – असामाजिक गतिविधियां या फिर मौत।
सुरजीत दास
11 Apr 2020
Translated by महेश कुमार
ग़रीबों
Image Courtesy: Wikimedia Commons

यदि ग़रीबों को ज़रूरी सरकारी सहायता समय पर नहीं पहुंचती है तो लाखों लोगों को भारत बंद के तीसरे सप्ताह में भूखा रहना पड़ सकता है। बहुत सारे स्वैच्छिक संगठन और सरकारी संस्थान देश के विभिन्न हिस्सों में समाज के कमज़ोर तबक़ों के लिए खाद्य सामाग्री और खाद्य पदार्थों की किट मुहैया करने के लिए अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, मौजूदा लॉकडाउन की वजह से भारत के सबसे कमजोर इलाकों के साथ जन संपर्क के बारे में स्पष्ट तस्वीर नहीं है। हालांकि, माध्यमिक डेटा के उपलब्ध कुल स्तर से, नीति निर्माण के उद्देश्य के लिए  कुछ हद तक स्थिति को समझा जा सकता है या उसकी कल्पना करना संभव है।

सरकार ने 2017-18 की खपत पर ख़र्च का राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा इकट्ठा किया गया यूनिट स्तर डेटा जारी नहीं किया है। इसलिए, भारतीय घरों के वर्ग-वार खपत पर ख़र्च का नवीनतम डेटा वर्ष 2011-12 का ही उपलब्ध है।

यदि हम कृषि श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में ग्रामीण मुद्रास्फीति दर और औद्योगिक श्रमिकों (आईडब्ल्यू) के लिए सीपीआई में शहरी मुद्रास्फीति दर पर विचार करते हैं, तो हम 2011-12 के खपत के ख़र्च की संख्या को 2018-19 की लागत में बदल सकते हैं।

इस डेटा के अनुसार, भारत में ग्रामीण आबादी के निचले 5 प्रतिशत लोगों की औसत मासिक प्रति व्यक्ति ख़र्च 687 रुपये है और शहरी भारत में यह 920 रुपये है। जहां तक नीचे से अगली 5 प्रतिशत आबादी का संबंध है, उसका 2018-19 की क़ीमतों में (क्रमशः नीचे दी गई तालिका देखें) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए, प्रति व्यक्ति औसत खपत पर ख़र्च महज 868 और 1,186 रुपए रहा हैं।

विभिन्न मदों पर मासिक प्रति व्यक्ति औसत ख़र्च (यूपीआर) (2018-19 की क़ीमतों में)

table_1.png

स्रोत: टेबल नंबर 4.1a-R & 4.1a-U, से की गई गणना, भारत में घरेलू उपभोक्ता व्यय पर मुख्य संकेतक के रूप में एनएसएस 68वें चक्र की सर्वे रिपोर्ट (2011-12), NSSO, MoSPI, GoI, जून 2013

यदि हम भारत में इस निचले स्तर की 10 प्रतिशत आबादी को देखते हैं, तो हम पाएंगे कि वे अपने कुल उपभोग या खपत का 60 प्रतिशत खाद्य पदार्थों पर ख़र्च करते हैं और अन्य सभी वस्तुओं पर 40 प्रतिशत से कम ख़र्च करते हैं, जिसमें कपड़े, आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य, ईंधन और बिजली आदि शामिल हैं। भोजन पर कुल ख़र्च के भीतर, ग्रामीण ग़रीब में 10 प्रतिशत लोग अकेले अनाज पर ही 35 प्रतिशत आम्दनी से अधिक ख़र्च करते हैं। यह अनुपात 10 प्रतिशत शहरी आबादी के निचले हिस्से के लिए लगभग 30 प्रतिशत है। अनाज के अलावा, आबादी के इस वर्ग के उपभोग की टोकरी में अन्य प्रमुख खाद्य पदार्थों में सब्जियां, पेय पदार्थ, खाद्य तेल, दालें, दूध और दूध उत्पाद और मसाले आदि शामिल हैं और ईंधन और रोशनी पर 30-40 प्रतिशत गैर-खाद्य ख़र्च होता है। 

यदि हम दैनिक खपत के ख़र्च पर पहुंचने को जानने के लिए इन मासिक संख्याओं को 30 से विभाजित करते हैं, तो 2018-19 की क़ीमतों के हिसाब से हम देखते हैं कि ग्रामीण नीचे की 5 प्रतिशत आबादी  औसतन प्रति दिन केवल 2 रुपए प्रति व्यक्ति ख़र्च करती हैं। ये आंकड़े शहर की नीचे की 5 प्रतिशत आबादी के लिए मात्र 3 रुपए हैं, ग्रामीण आबादी के 5-10 प्रतिशत के लिए यह 29 रुपए और शहरी नीचे के 5-10 प्रतिशत के लिए यह 40 रुपए हैं। भोजन पर 5 प्रतिशत नीचे की ग्रामीण आबादी का औसत दैनिक प्रति व्यक्ति ख़र्च क्रमशः14 और 18 रुपए है जबकी शहर की 5-10 प्रतिशत निचले स्तर की आबादी का प्रति व्यक्ति ख़र्च 18 और 23 रुपए है। यह काफी स्पष्ट है कि 18 से 23 रुपए में  (ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों में) जो भोजन मिलता है, वह उन्हें पर्याप्त पोषण और प्रतिरक्षा प्रदान नहीं करता है।

इससे एक बात स्पष्ट है कि इन लोगों के पास अब कोई पर्याप्त बचत नहीं है और जो कुछ बचत थी वह लॉकडाउन के कारण पिछले दो हफ्तों में खत्म हो चुकी हैं। अगर हमारे देश की आबादी 130 करोड़ है तो इस जनसंख्या का आकार 13 करोड़ या 130 मिलियन बैठता है।

एनएसएसओ 2011-12 के एक अनुमान के अनुसार, इस आबादी का 40 प्रतिशत शहरी और 60 प्रतिशत ग्रामीण भारत में रहता हैं। अगर इस आबादी के बेहद कमजोर तबके का सिर्फ 1 प्रतिशत भी भूखा है, तो इसका मतलब है कि 13 लाख से ज्यादा लोग भूखे हैं। यह स्थिति की गंभीरता है।

इसकी तुलना में, अब तक, भारत में कोरोनावायरस या कोविड़-19 केसों की कुल संख्या 6,000 से भी कम है और मौतें 200 से भी कम है। यानि प्रति 1,000 जनसंख्या पर 7.2 की मृत्यु दर और 130 करोड़ की कुल जनसंख्या को देखते हुए भारत में हर महीने औसतन 7 लाख 80 हजार लोगों की मौत होती है। इसलिए, लॉकडाउन को तीन सप्ताह से अधिक बढ़ाने की क़ीमत लाभ की तुलना में बहुत अधिक है।

इस भयंकर अनिश्चितता के माहौल में ग़रीब और कमजोर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति समझ में आती है। उनके आय के स्रोतों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और यह सुनिश्चित नहीं है कि ऐसा कब तक चलेगा। यदि उन्हें सरकारी राहत तुरंत नहीं दी जाती है, तो उनके पास केवल दो ही विकल्प होंगे – या तो असामाजिक गतिविधियों का सहारा या फिर चुपचाप मौत के आगोश में चले जाना। कानून और व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण के बाहर जा सकती है। इसके अलावा, भुखमरी से मौत और आत्महत्या के मामले बढ़ सकते हैं। इसलिए, वक़्त की जरूरत है कि सरकार योजनाबद्ध और समन्वित तरीके से इस विशाल उप-महाद्वीप के प्रत्येक कोने तक पहुंचे। हमें देश के ग़रीबों को एक और अग्निपरीक्षा ’(एसिड-टेस्ट) से गुजरने पर मजबूर नहीं करना चाहिए।

लेखक, सेंटर फ़ॉर इकोनॉमिक स्टडीज़ एंड प्लानिंग, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में सहायक प्रोफ़ेसर हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

Agnipariksha for the Poor in India

Coronavirus
COVID-19
nsso
Consumer Expenditure
Job Losses
Income Losses
Food Consumption
Rural Poor

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License