NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
कोविड 19 : तब्लीग़ की आड़ में यूपी में मुसलमानों के उत्पीड़न के शिकायतें!
राज्य पुलिस कथित तौर पर मुस्लिम घरों पर छापे मार रही है, जिससे समुदाय में डर और दहशत पैदा हो रही है, वे ख़ुद को इस हमले का निशाना मान रहे है।
अब्दुल अलीम जाफ़री, सुमेधा पाल
04 Apr 2020
Translated by महेश कुमार
कोविड 19

नई दिल्ली के निज़ामुद्दीन में तब्लीग़ी जमात के जमावड़े ने राष्ट्रीय राजधानी को नोवेल कोरोनवायरस के मामले में आकर्षण का बड़ा केंद्र बना दिया है। देश भर में जैसे-जैसे तब्लीग़ से जुड़े लोगों के संक्रमित होने की संख्या बढ़ती जा रही है, कुछ राज्यों में समूची मुस्लिम कम्यूनिटी ख़ुद को निशाने पर समझ रही है। कुछ टीवी चैनलों की बदौलत, कोविड-19 के प्रसार के आसपास की कहानी को सांप्रदायिक रंग देने की भी कोशिश हो रही है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ, बिजनौर और सहारनपुर के छोटे-छोटे गाँवों में मुस्लिम समुदाय के लोगों में दहशत है, जिनमें से अधिकांश का तब्लीग़ी जमात या दिल्ली के इस ज़मावड़े से कोई लेना-देना नहीं है। क्षेत्र में मुस्लिम परिवारों पर पुलिस की छापेमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है और इसके लिए  समुदाय को बेतरतीब निशाना बनाया जा रहा है।

इन क्षेत्रों/गावों के कई स्थानीय निवासियों ने दावा किया है कि तब्लीग़ी जमात के साथ कोई संबंध नहीं होने के बावजूद उनके लोगों को संदिग्ध कोरोना वायरस रोगियों की आड़ में निशाना बनाया जा रहा है।

‘बिना किसी आधार के समुदाय पर निशाना’ 

राज्य में मुसलमानों पर पुलिस के हमले की रिपोर्ट के मद्देनज़र, समुदाय के कई लोग कथित तौर पर पलायन करने पर विचार कर रहे हैं। मेरठ स्थित एक सामाजिक कार्यकर्ता उबैदुल्लाह, जिन्होंने अब तक 19 कोविड़-19 पॉज़िटिव केसों की रिपोर्ट की है, उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि; "मेरठ ज़िले में, पुलिस बेतरतीब ढंग से मुस्लिम ठिकानों पर छापे मार रही है, और विशेष रूप से मस्जिद के मौलवियों से पूछताछ कर रही है। वे उन लोगों की जानकारी ले रहे हैं जो हाल ही में तब्लीग़ी जमात में शामिल होने निज़ामुद्दीन मरकज़ गए थे और हाल ही में दिल्ली से वापस आए हैं। 21 दिन की तालाबंदी की घोषणा के बाद जब ग़रीब लोग जब दिल्ली से मेरठ तक पैदल गए थे तो वह भी एक विशेष चिंता का विषय है। पुलिस उन्हें बिलकुल भी नहीं बख़्श रही है और यह पता लगाने के लिए उन्हें परेशान कर रही है कि क्या वे कभी भी तब्लीग़ में गए थे या नहीं। उनकी इस मुहिम से ऐसा लगता है जैसे कि ज़िला प्रशासन के सामने प्रत्येक मुसलमान तब्लीग़ का हिस्सा है।“

एक युवक ने अपनी पहचान छिपाते हुए कहा कि उसका भाई यूसुफ़ मलिक (नाम बदला हुआ है) छह महीने पहले निज़ामुद्दीन (दरगाह) पर गया था, लेकिन पुलिस अब उसके घर पर छापा मारा है और उससे पूछताछ की जा रही है, और उससे कहा कि उन लोगों के नाम दे जिन्होंने पिछले महीने दिल्ली की यात्रा की थी। जब उसने कहा कि वह इस बारे में नहीं जानता है, तो पुलिस ने उसे काफ़ी धमकाया।

मुस्लिम समुदाय के लोग, जो पहले राज्य सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ काफ़ी मुखर रहे हैं, वे सभी पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं। नज़ीर मलिक एक ऐसे ही व्यक्ति हैं। सिद्धार्थनगर स्थित नज़ीर पेशे से एक वरिष्ठ पत्रकार हैं, उनके नाम को कथित तौर पर सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी हलक़ों में उछाला या प्रसारित किया जा रहा है, कि वे तब्लीग़ी जमात का हिस्सा रहे हैं और इसलिए वे कोरोनोवायरस से संक्रमित हैं।

अपने बारे में बात करते हुए मलिक ने न्यूज़क्लिक को बताया, “चूंकि मेरा पूरा परिवार शिक्षा और वित्तीय स्थिति के मामले में मज़बूत है, इसलिए हमें निशाना बनाया जा रहा है। मैं भाजपा सरकार और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की नीतियों का आलोचक रहा हूं, इसलिए वे मुझे सार्वजनिक रूप से शर्मसार करने की कोशिश कर रहे हैं। वे खुले आम कह रहे हैं कि मैं एक कोरोनोवायरस संदिग्ध हूं जबकि तथ्य यह है कि मैं वहां (मरकज़-ए-निज़ामुद्दीन) कभी गया ही नहीं था।” उन्होंने कहा, “मैंने इस बारे में सर्किल ऑफ़िसर (सीओ) को सूचित किया था और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया था कि इस 'नकली समाचार/सतर्कता' को फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। अगर ज़िला प्रशासन दक्षिणपंथी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करता है, तो मैं अदालत का दरवाज़ा खटखटाऊंगा और उन पर मुक़दमा दायर करूंगा।"

पूछताछ के दायरे में आईं मस्जिदें

यूपी पुलिस कथित तौर पर न केवल घरों पर छापे मार रही है, बल्कि मस्जिदों के विभिन्न इमामों को भी परेशान कर रही है, और उन्हें फ़रवरी से मार्च के बीच तब्लीग़ी जमात में गए  लोगों का रजिस्टर दिखाने के लिए कह रही है।

बुधवार को गोरखपुर पुलिस ने शहर की एक दर्जन अन्य मस्जिदों के साथ मक्का मस्जिद, और अकबरी जामा मस्जिद में भी छापा मारा।

पुलिस ने हिंदू-मुस्लिम एकता समिति नामक संगठन के प्रमुख शाकिर सलमानी से भी पूछताछ की और उनसे तब्लीग़ी जमात के बारे में पूछा। सलमानी ने कहा, “निज़ामुद्दीन की घटना के बाद, पुलिस गोरखपुर में बहुत सतर्क हो गई है और हर मस्जिद पर नज़र रख रही है। पुलिस की बेतरतीब छापेमारी के कारण लोग भाय के माहौल में में जी रहे हैं। जब से तालाबंदी शुरू हुई, कोई भी मस्जिद में नमाज पढ़ने नहीं जा रहा है। ग़रीब तो बहुत ही डरे हुए हैं।”

जामा मस्जिद के शाही इमाम, इमाम बुखारी ने समुदाय को निशाना बनाने और उससे उत्पन्न हुए डर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “सरकार को भय के माहौल में जी रहे मुसलमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। मीडिया के पास न कोई मुद्दा न ही कोई बहस है बस उन्होंने तब्लीग़ी जमात को हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बना डाला। इस तथ्य के बावजूद कि मरकज़ ने प्रशासन को सूचित किया था कि लोग वहां तालाबंदी के कारण फंसे हुए हैं… अब, मीडिया उन्हें कोरोना वायरस के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहा है, जो पूरी तरह से अनुचित है।"

15 मार्च को निज़ामुद्दीन पश्चिम में जब बड़ी संख्या में लोग 'इज्तेमा' (जमावड़े) में शरीक हुए थे, जिसे तब्लीग़ी जमात द्वारा आयोजित किया गया था उनमें से कई लोगों में बाद में कोविड-19 संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं, उन्हें 29-30 मार्च की रात को दिल्ली सरकार के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। सरकार ने कहा है कि उनकी जांच की जा रही है। इस तब्लीग़ में शामिल 7 लोग कोविड़-19 के कारण मारे गए जबकि कई अन्य लोग कोरोनो वायरस के मामले में पॉज़िटिव पाए गए हैं।

तब्लीग़ में किर्गिस्तान, सऊदी अरब, इंडोनेशिया और मलेशिया के लोग भी शामिल थे। जबकि 15 मार्च को तेलंगाना से भाग लेने आए 6 लोगों की वापस तेलंगाना में जाने के बाद मौत हो गई, एक आगंतुक की पिछले हफ़्ते श्रीनगर में मृत्यु हो गई थी। दिल्ली में आने से पहले, मृतक उत्तर प्रदेश के देवबंद मदरसे भी गया था।

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

COVID19: Muslims in UP Allege Harassment Despite no Link With Tablighi Gathering

Coronavirus
Coronavirus India
COVID 19
UP
Tablighi Jamaat
Muslims India

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • make in india
    बी. सिवरामन
    मोदी का मेक-इन-इंडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा श्रमिकों के शोषण का दूसरा नाम
    07 Jan 2022
    बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गिग कार्यकर्ता नई पीढ़ी के श्रमिक कहे जा सकते  हैं, लेकिन वे सीधे संघर्ष में उतरने के मामले में ऑटो व अन्य उच्च तकनीक वाले एमएनसी श्रमिकों से अब टक्कर लेने लगे हैं। 
  • municipal elections
    फर्राह साकिब
    बिहारः नगर निकाय चुनावों में अब राजनीतिक पार्टियां भी होंगी शामिल!
    07 Jan 2022
    ये नई व्यवस्था प्रक्रिया के लगभग अंतिम चरण में है। बिहार सरकार इस प्रस्ताव को विधि विभाग से मंज़ूरी मिलने के पश्चात राज्य मंत्रिपरिषद में लाने की तैयारी में है। सरकार की कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस…
  • Tigray
    एम. के. भद्रकुमार
    नवउपनिवेशवाद को हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की याद सता रही है 
    07 Jan 2022
    हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ने वाले रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर अपने नियंत्रण को स्थापित करने की अमेरिकी रणनीति की पृष्ठभूमि में चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अफ्रीकी यात्रा काफी…
  • Supreme Court
    अजय कुमार
    EWS कोटे की ₹8 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट को किस तरह के तर्कों का सामना करना पड़ा?
    07 Jan 2022
    आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को आरक्षण देने के लिए ₹8 लाख की सीमा केवल इस साल की परीक्षा के लिए लागू होगी। मार्च 2022 के तीसरे हफ्ते में आर्थिक तौर पर कमजोर सीमा के लिए निर्धारित क्राइटेरिया की वैधता पर…
  • bulli bai aap
    सना सुल्तान
    विचार: शाहीन बाग़ से डरकर रचा गया सुल्लीडील... बुल्लीडील
    07 Jan 2022
    "इन साज़िशों से मुस्लिम औरतें ख़ासतौर से हम जैसी नौजवान लड़कियां ख़ौफ़ज़दा नहीं हुईं हैं, बल्कि हमारी आवाज़ और बुलंद हुई है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License