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कोविड-19
स्वास्थ्य
भारत
Covid-19 : मुश्किल दौर में मानसिक तनाव भी अब बन चुका है महामारी
सामने आ रहे नए आकंड़ों और रिपोर्टों से पता चलता है कि कोविड-19 के फैलने के बाद महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा, ख़ासकर घरेलू हिंसा में काफ़ी तेज़ी आई है।
डॉ कफ़ील ख़ान
08 Dec 2020
Covid-19

कोविड-19 के ख़िलाफ़ जंग जीतने के लिए हमें अपने और अपने बच्चों के भीतर बढ़ रहे मानसिक स्वास्थ्य तनाव की समस्या का हल निकालना होगा। मानवाधिकार कार्यकर्ता और बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कफ़ील ख़ान हमें कुछ सुझाव दे रहे हैं, जिनके ज़रिए हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं।

मानव अपनी प्रवृत्ति से सामाजिक जानवर है।

लेकिन क्वारंटीन और लॉकडाउन के दौरान इंसानों को अपने परिवार, दोस्तों और साथ में काम करने वाले साथियों से सामाजिक दूरी, आइसोलेशन (एकांत) और शारीरिक दूरी बनाए रखने को मजबूर किया गया। इसके अलावा कई लोग अस्थायी बेरोज़गारी औऱ वित्तीय संघर्ष से भी लॉकडाउन के दौरान जूझते रहे। कभी खत्म ना होने वाली अफवाहें, अवैज्ञानिक विचार, सूचनाओं की बाढ़, कोरोना से संक्रमित होने के बाद लगने वाले लांछन, व्यक्तिगत आजादी के हनन, अपने करीबियों की मौत और भविष्य की अनिश्चित्ता ने वयस्कों के साथ-साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत दबाव डाला है।

शोध से पता चलता है कि कोमॉर्बिडिटी (एक साथ एक से ज्यादा रोग होने की स्थिति) में हृ्दय-श्वांस संबंधी समस्याओं के बाद मानसिक समस्याएं सबसे ज़्यादा पाई गई हैं।

आंकड़े और रिपोर्ट्स बताती हैं कि कोविड-19 के फैलने के बाद महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, खासकर घरेलू हिंसा में काफ़ी तेजी आई है।

मानसिक स्वास्थ्य तनाव के लक्षण

शोध से पता चलता है कि कोमॉर्बिडिटी (एक साथ एक से ज्यादा रोग होने की स्थिति) में हृ्दय-श्वांस संबंधी समस्याओं के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं सबसे ज़्यादा पाई गई हैं।

सभी लोगों द्वारा साझा तौर पर भय और चिंता (एंजॉयटी) भावनाओं का अहसास किया गया है। लोगों में कई तरह के विचारों, भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का अनुभव किया जाना सामान्य है। अगर आपके आसपास किसी में इस तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो हमें सावधान रहना चाहिए:

- अगर कोई तनाव या बहुत ज़्यादा दबाव महसूस कर रहा है

- अपनी और अपने करीबियों के स्वास्थ्य को लेकर कोई ज़्यादा एंजॉयटी या डर महसूस कर रहा है

- सोने या ख़ाने की आदतों में परिवर्तन

- एकाग्रता बनाने में मुश्किल

- विचारों की बाढ़

- दुख, अंदर से बिखराव का महसूस किया जाना या मजेदार गतिविधियों में रुचि खोना

- शारीरिक लक्षण, जैसे बढ़ी हुई धड़कन, पेट में खराबी, आलसपन।

- अंदर से उथल-पुथल मचना

- असहाय महूसस करना और आराम महसूस करने में दिक्कतों का सामना करना 

- दूसरों से कटे-कटे महसूस करना

- सार्वजनिक जगहों पर जाने में आनाकानी

- स्वास्थ्य समस्याओं का और ज़्यादा खराब होना

- मानसिक स्वास्थ्य स्थिति और ज़्यादा खराब होना

- तंबाकू, शराब या दूसरी नशीली चीजों के सेवन में बढ़ोत्तरी

- खुद के संक्रमित होने या दूसरों को संक्रमित करने की संभावना का बढ़ना

- बुखार या सर्दी जैसी दूसरी बीमारियों के सामान्य लक्षणों को बढ़ाचढ़ाकर बताना

बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य लक्षण

बच्चे अपनी भावनाओं और वह किस दौर से गुजर रहे हैं, इसे व्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए उनके व्यवहार और आदतों में बदलाव पर सावधान रहना जरूरी है, ताकि उनके मानसिक स्वास्थ्य तनाव के लक्षणों को पहचाना जा सके।

आपको अपने बच्चों में इन अजीबो-गरीब लक्षणों और संकेत पर नज़र रखनी चाहिए:

- स्वाभाव में उतार-चढ़ाव- बिना किसी बात के रोना, अशांत चित्त, बहुत ज़्यादा सक्रियता

- सोने के तरीके में बदलाव, जैसे बहुत ज़्यादा या बहुत कम सोना

- ख़ाने की आदतों में बदलाव, बहुत कम ख़ाना या बहुत ज़्यादा ख़ाना

- माता-पिता या खिलौनों से चिपके रहना

- अकेले रहने की मंशा

- एकाग्रता बनाने में दिक्कत, यहां तक कि ऑनलाइन क्लासों या कार्टून में भी।

- सक्रियता में कमी

- धीमे चलना

- बिस्तर गीला करना, पेशाब जाने की ज़्यादा इच्छा

- कब्ज़ होना

- नाखून कुतरते रहना या बाल खींचना 

- मानसिक दर्द जैसे सरदर्द, पेट में दर्द या असहज करने वाली उत्तेजना

- धड़कन या शरीर के तापमान में बढ़ोत्तरी

बच्चे अपनी भावनाओं और वह किस दौर से गुजर रहे हैं, इसे व्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए उनके व्यवहार और आदतों में बदलाव पर सावधान रहना जरूरी है, ताकि उनके मानसिक स्वास्थ्य तनाव के लक्षणों को पहचाना जा सके।

हम मानसिक स्वास्थ्य तनाव से कैसे निपट सकते हैं?

हर किसी को याद रखना चाहिए कि ज़्यादातर लोग ठीक हो जाते हैं। हर किसी को यह भी याद रखना चाहिए कि आप इस समस्या से जूझने वाले अकेले नहीं हैं।

घर पर रहना कुछ वक़्त के लिए अच्छा लग सकता है, लेकिन लंबे वक़्त में यह ऊबाऊ और बांधने वाला हो सकता है। यहां सकारात्मक और खुशमिजाज रहने के लिए कुछ सुझाव हैं:

1) एक दिनचर्या का पालन करिए और खुद को व्यस्त रखिए। एक समय सारणी बनाइए, जिसमें नाश्ते, दोपहर के ख़ाने, स्नैक्स, रात के ख़ाने, नहाने, खेलने और पढ़ने के लिए अलग-अलग वक़्त तय कीजिए।

2) जल्दी सोने की आदत डालिए: देर रात तक वॉट्सऐप पर चैटिंग, सोशल मीडिया या फिल्में देखने में मत लगे रहिए।

3) सुबह जल्दी उठिए, स्वस्थ्य ख़ाना खाइए और बड़ी मात्रा में पेय पदार्थ लीजिए।

4) नियमित कसरत करिए।

5) संगीत सुनकर, पढ़कर या टेलिविजन देखकर खुद को नकारात्मक भावनाओं से दूर रखिए।

6) अपनी रुचि को दोबारा जिंदा करिए: अगर आपकी कोई पुरानी रुचि है, जैसे पेंटिंग, सिलाई-बुनाई या फिर बागबानी, तो उसमें फिर से समय दीजिए।

7) लेखन, तैराकी, घुड़सवारी, नृत्य, ख़ाने के नए पकवान या वॉयलिन और गिटार बजाने जैसी नई क्षमताएं विकसित करिए।

8) खुशी देने वाली घटनाओं या रुचियों को साझा कीजिए।

9) ख़ाने बनाने और संगीत के सुझावों की अदला-बदली कीजिए।

10) आपस में चीजें या सलाह बांटना-साझा करना एक-दूसरे की परवाह करना है। किसी की भलाई करने के छोटे-छोटे कदम आपको खुशी देंगे। यह जानने की कोशिश करिए कि क्या आपके आसपास किसी को सलाह, ख़ाने या दूसरी चीजों की जरूरत है। साझा करने के लिए तैयार रहिए।

11) ऐसा कुछ करिए जिससे आपको गर्व महसूस होता है।

12) अपने आसपास की प्रकृति की खूबसूरती, रंग और जानवर देखने और उनकी प्रशंसा करने के लिए खुले में जाइए। 

13) जानकारी रखिए, लेकिन पागलों की तरह ख़बरों को लगातार मत देखिए। तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करिए, अफवाहों और धारणाओं को खारिज करिए। सनसनीखेज़ ख़बरों या सोशल मीडिया पोस्ट को मत देखिए। ज्ञान शक्ति है।

14) हर समय इसकी चर्चा मत करिए कि कैसे और कौन बीमार हो गया। इसके बजाए यह देखिए कि कौन ठीक हो गया।

हर किसी को यह याद रखना चाहिए कि ज़्यादातर लोग ठीक हो रहे हैं। हर किसी को यह भी याद रखना चाहिए कि आप अकेले नहीं हैं।

15) बूढ़े लोग शंकित, गुमसुम महसूस कर सकते हैं और उन्हें मदद की जरूरत हो सकती है। उन्हें जिस चीज की जरूरत है, उनकी दवाईयां, उनकी दैनिक जरूरतों की चीजें, यह उन तक पहुंचाकर उनकी मदद करिए।

16) जब एंजॉयटी महसूस हो, तब कुछ मिनट के लिए धीमी सांस लेने की कोशिश कीजिए। कुछ शांत चीज को याद करिए और अपने दिमाग को धीमा कीजिए।

17) जब आपको गुस्सा या चिड़चिड़ाहट महसूस हो रही हो, तब 99 से लेकर 1 तक उल्टी गिनती कीजिए, खुद का ध्यान भटकाने से मदद मिलती है।

18) शराब, तंबाकू या दूसरे नशीले पदार्थों से दूरी रखिए।

19) यह जानकारी रखिए कि अगर आप बीमार होते हैं, तो क्या करेंगे। यह पहले से पता रखिए कि इलाज़ और दूसरी सेवा-संसाधन, जिसमें काउंसलिंग और थेरेपी भी शामिल है, वह कहां उपलब्ध रहेंगी।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष ध्यान रखने की जरूरत

आपके बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष ध्यान देना होगा। पहली बात, जो सबसे ज़्यादा अहम है, वह यह है कि बच्चों के सामने डर मत दिखाइए। युवा होने के नाते हमें अपने डर और एंजॉयटी को आत्म-नियंत्रित करना चाहिए।

एक मुश्किल वक़्त में एक स्वस्थ्य दिमाग हमें महामारी के खिलाफ़ ज़्यादा आसानी से जीत दर्ज कराने में मदद कर सकता है।

आपकी बॉडी लेंग्वेज़ और शब्दों में संतुलन बनाएं।

अपने बच्चों के साथ खुला विमर्श करें। उन्हें उनकी भाषा में चीजें समझाएं और बताएं कि वे बिलकुल पूरी तरह सुरक्षित हैं। याद रखें कि आपका अपने बच्चे के साथ संबंध एक भावनात्मक बैंक खाते की तरह है, जितना ज़्यादा आप ज़मा करेंगे, उतना ही आप निकाल पाएंगे।

ऐसे नियम बनाइए, जो सभी के लिए स्पष्ट और नियमित हों। जैसे किसी तरह की गाली-गलौज, चीखने-चिल्लाने और मारपीट पर प्रतिबंध। हर किसी को इस बात को अच्छी तरह समझना चाहिए कि "ना का मतलब ना होता है"।

हर चीज के लिए समय-सारणी बनाने की कोशिश कीजिए।

बच्चों को एक तय समय के लिए ही टीवी देखने की अनुमति दीजिए। मोबाइल और लैपटॉप उपयोग के साथ भी यही चीज है।

उन्हें घर के कामों में व्यस्त रहने की अनुमति देकर जिम्मेदार होने का अहसास करवाइए। उन्हें उनके अच्छे काम के लिए शाबाशी और इनाम दीजिए।

अपने बच्चों के साथ खुला विमर्श करें। उन्हें उनकी भाषा में चीजें समझाएं और बताएं कि वे बिलकुल पूरी तरह सुरक्षित हैं। याद रखें कि आपका अपने बच्चे के साथ संबंध एक भावनात्मक बैंक खाते की तरह है, जितना ज़्यादा आप ज़मा करेंगे, उतना ही आप निकाल पाएंगे।

अगर किसी तरह लक्षण बने रहते या बदतर होते हैं, तो तुरंत मनोचिकित्सक से संपर्क करिए। आप मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय (हेल्पलाइन नंबर 1075 या 01123978046) से भी संपर्क कर सकते हैं। आप अपने खुद के डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से भी मदद ले सकते हैं।

एक मुश्किल वक़्त में एक स्वस्थ दिमाग हमें महामारी के ख़िलाफ़ ज़्यादा आसानी से जीत दर्ज कराने में मदद कर सकता है।

कोविड-19 को रोकने का ब्रह्मास्त्र यही है कि हम सामाजिक दूरी बनाए रखें, हाथों को स्वच्छ रखें और मास्क का उपयोग ज़रूर करें।

यह लेख मूलत: द लीफ़लेट में प्रकाशित हुआ था।

(डॉ कफ़ील ख़ान BRD मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर, उत्तरप्रदेश में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

COVID-19’s Negative Impact on Mental Health Is a Shadow Andemic

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