NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
COVID-19 संकट के समय हथियार बेचने के लिए युद्ध को बढ़ावा देने से बचे देशः ऑक्सफैम
इस वैश्विक एनजीओ द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 में वैश्विक सैनिकों पर व्यय 1.9 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर था जो विकासशील देशों में covid-19 से लड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयास के लिए आवश्यक राशि से कई गुना अधिक है।
पीपल्स डिस्पैच
12 May 2020
हथियार बेचने के लिए युद्ध को बढ़ावा देने से बचे देश

"कन्फ्लिक्ट इन द टाइम ऑफ कोरोनावायरस" शीर्षक से ऑक्सफैम की एक नई रिपोर्ट आज यानी 12 मई को प्रकाशित हुई। वैश्विक ग़रीबी पर काम करने वाली यह एक ग़ैर सरकारी संस्था है। इसने कहा है कि संघर्ष क्षेत्र में सीज़फायर के लिए काम करने में विश्व समुदाय की विफलता ने विश्व भर में दो मिलियन से अधिक लोगों के जोखिम को बढ़ा दिया है।

जारी युद्धों और संघर्षों ने न केवल अपने अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया और शासन को अप्रभावी बना दिया है बल्कि इसने बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों से भागने और भीड़भाड़ वाले शिविरों में रहने के लिए भी मजबूर किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, संघर्षों का जारी रहना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्पष्ट विफलता है। सुरक्षा परिषद के अधिकांश सदस्यों जैसे कि अमेरिका और फ्रांस ने हथियारों का व्यापार जारी रखा है और इस अपील और चेतावनी के बावजूद कि इस तरह के संघर्ष से इन देशों के लोगों के लिए अधिक ख़तरा हो सकता है इसने यमन में सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन जैसे तीसरे पक्ष के लिए अपना समर्थन जारी रखा है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 में सिर्फ सैनिकों पर कुल वैश्विक ख़र्च 1.9 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक था। रिपोर्ट के अनुसार यह धनराशि विकासशील देशों में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा बताए राशि से 280 गुना अधिक है।

अमेरिका जैसे देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर 8 मई को वैश्विक युद्ध विराम के लिए वोट देने से इनकार कर दिया और 23 मार्च को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की एक अपील के बावजूद दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष का समर्थन और उकसाना जारी रखा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल इस संघर्ष को रोक ही Covid-19 महामारी के लिए एक प्रभावी प्रतिक्रिया प्रदान कर सकता है।

इस रिपोर्ट में मध्य अफ्रीकी गणराज्य, म्यांमार, यमन और अफगानिस्तान के मामलों पर टिप्पणी की गई है। यह उजागर करता है कि कैसे कोलंबिया में ईएलएन ने एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की है लेकिन सरकार और अन्य पक्ष ऐसा करने में विफल रहे हैं।

ऑक्सफैम ने दुनिया भर के देशों से कहा कि वे हथियार बेचने के लिए संघर्ष को बढ़ावा देने से बचें। इसके कार्यकारी निदेशक जोस मारिया वेरा ने इन देशों से अपील की है कि वे युद्धरत पक्षों पर दबाव बनाने के लिए वैश्विक युद्ध विराम के लिए सहमत हों और शांति प्रयासों में सहयोग करें।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Coronavirus
COVID-19
War
oxfam report
Oxfam
weapons
Selling weapons

Related Stories

क्यूबाई गुटनिरपेक्षता: शांति और समाजवाद की विदेश नीति

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

कोरोना अपडेट: देश में एक हफ्ते बाद कोरोना के तीन हज़ार से कम मामले दर्ज किए गए

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License