NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
COVID-19 : हाल की खोजों से पता चला है कि एक तिहाई कोरोना संक्रमितों में मस्तिष्क संबंधी समस्याएं सामने आई हैं
EEG रिकॉर्ड्स के विश्लेषण करने वाले एक अध्ययन में कोरोना मरीज़ों के मस्तिष्क के फ्रंटल लोब के क्रियाकलापों में ख़राबी सामने आई है। मरीज़ों में दो तिहाई पुरुष और एक तिहाई महिलाएं थीं।
संदीपन तालुकदार
30 Oct 2020
COVID-19
Image Courtesy: Times of India

जैसे-जैसे कोरोना महामारी बढ़ रही है, इस बीमारी और इसके वायरस के बारे में लगातार नई चीजें सामने आ रही हैं। एक हालिया अध्ययन में पता चला है कि कोरोना से संक्रमित मरीजों में से एक तिहाई के दिमागी क्रियाकलापों पर प्रभाव पड़ा है। खासकर "फ्रंटल लोब" नाम के क्षेत्र में प्रतिकूल असर देखने को मिला है। कोरोना के स्नायु प्रभावों को सामने लाने वाला यह शोध "सीज़र: यूरोपियन जर्नल ऑफ एपिलेप्सी" नाम की जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

इस अध्ययन में अलग-अलग जर्नल में प्रकाशित,  कोरोना मरीज़ों की 84 EEG (इलेक्ट्रो एंसेफलोग्राम: जिसे मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को दर्ज करने में उपयोग किया जाता है) रिपोर्टों का विश्लेषण किया गया है। पहले प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया था कि मरीज़ों की EEG रिपोर्ट्स में मस्तिष्क के फ्रंटल लोब में आसामान्यता दिखाई पड़ी थी। मौजूदा अध्ययन ने सभी रिपोर्टों का विश्लेषण किया है और सारे मामलों में साझा चीजों को बताया है।

इस परीक्षण अध्ययन के ज़रिए यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि क्या कोरोना संक्रमण का दिमागी क्रियाकलापों से संबंध महज़ संयोग है या यह एक वास्तविक प्रवृत्ति है। अध्ययन के एक लेखक ज़ुल्फी हनीफ ने कहा: "हमने पाया कि 600 से ज़्यादा मरीज़ों में इस तरह का प्रभाव आया है। शुरू में जब हमने कुछ ही समूहों में ऐसा देखा था, तब हम यकीन से नहीं कह सकते थे कि यह संयोग था या नहीं। लेकिन अब हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि यह प्रभाव इन मरीज़ों में एक साझा प्रभाव है।"

जिन लोगों का EEG करवाया गया, उनमें उत्तेजनाओं को लेकर प्रतिक्रिया धीमी थी। साथ में, उन्हें किसी दौरे के बाद आने वाली दिक्कतों, जैसे बोलने की दिक्कतें, विभ्रांति या बेहोशी के बाद जागने की अक्षमता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

EEG तकनीक में मस्तिष्क के हिस्सों की विद्युत गतिविधियां दर्ज की जाती हैं। यह तकनीक उन गतिविधियों का फायदा उठाती है, जिसमें मस्तिष्क क्रियाकलाप, मस्तिष्क कोशिकाओं या न्यूरॉन्स द्वारा प्रसारित विद्युत संकेतों पर आधारित होती है। यह कोशिकाएं विद्युत संकेतों का "एकरूपीय हस्तांतरण" प्रदर्शित करती हैं। कोई EEG मशीन इस तरह के पैटर्न को दर्ज कर सकती है। इसी तरह, दिमाग के अलग-अलग हिस्सों द्वारा संपन्न होने वाले कार्यों के लिए विशेष इलेक्ट्रिकल पैटर्न होता है। EEG मशीन, दिमाग के किसी निश्चित हिस्से से आने वाले के संकेतों में किसी भी तरह की असामान्यता की पहचान कर सकती है।

अध्ययन में पाया गया कि मरीज़ों के EEG रिकॉर्ड से जानकारी मिलती है कि संक्रमित मस्तिष्क द्वारा भेजे जाने वाले विद्युत संकेत धीमे या असामान्य हो जाते हैं। खासकर मरीज़ों के फ्रंटल लोब हिस्से द्वारा भेजे जाने वाले संकेतों के साथ ऐसा होता है।

दूसरा दिलचस्प तथ्य यह पता चला कि जिन संक्रमित लोगों पर यह प्रभाव नज़र आए, उनकी औसत उम्र 61 साल थी। इनमें से एक तिहाई महिलाएं और दो तिहाई पुरुष थे। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इस तरह की मस्तिष्क असामान्यता ज़्यादा उम्र के लोगों में अधिक थी।

जुल्फी हनीफ के मुताबिक़, फ्रंटल लोब SARS-CoV-2 वायरस के प्रवेश बिंदु के बिलकुल नज़दीक स्थित होता है, इसलिए इसके वायरस की जद में आने की संभावना बढ़ जाती है।

इस तरह के नतीज़ों से उन दीर्घकालीन प्रभावों की तरफ इशारा होता है, जो कोरोना वायरस संक्रमित लोगों में छोड़ सकता है। फिलहाल शुरुआती चरण में कोरोना वायरस के दीर्घकालीन प्रभाव पर बहुत सारे अनुमान लगाए जा रहे हैं। अब इन अनुमानों के लिए वैज्ञानिक शोध आधार प्रदान कर सकते हैं।

हालांकि सटीक जवाबों के लिए फिलहाल ज़्यादा शोध किए जाने की जरूरत है। हनीफ़ का भी कहना है कि हो सकता है असामान्य EEG के दर्ज होने का संबंध सीधे वायरस से ना हुए हों। हो सकता है कि दूसरे संक्रमण या जटिलताओं की वज़ह से ऐसा हो रहा हो।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

COVID-19: Recent Findings Show One-Third COVID-19 Patients Have Problems with Brain Function

EEG of COVID19 Patients
Brain Abnormalities in COVID 19 Patients
Frontal Lobe Abnormalities in COVID 19 Patients
One Third COVID19 Patients have Abnormal Brain Functioning
Zulfi Haneef
EEG

Related Stories


बाकी खबरें

  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में लगातार छठे दिन भी 3 लाख से ज़्यादा नए मामले, अब तक 1.76 करोड़ लोग संक्रमित 
    27 Apr 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,23,144 नए मामले दर्ज किए गए। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 28 लाख 82 हज़ार 204 हो गयी है।
  • मोदी
    अजय गुदावर्ती
    विश्लेषण: वे कौन लोग हैं जो आपदा में भी कर रहे हैं मोदी का समर्थन!
    27 Apr 2021
    निश्चित रूप से अभी भी सबसे मुखर समर्थकों में, वे लोग शामिल हैं, जो समाज के उच्च वर्गों से संबंध रखते हैं। हालत अधिक खराब और चुनौतीपूर्ण उन लोगों के लिए हैं जो इस शासन के पीड़ित होने के बावजूद अपना…
  • आईपीएल 2021: भ्रम के बुलबुले और दिमाग़ में भूंसे भरे हुए आदमज़ाद
    लेस्ली ज़ेवियर
    आईपीएल 2021: भ्रम के बुलबुले और दिमाग़ में भूंसे भरे हुए आदमज़ाद
    27 Apr 2021
    इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मौजूदा सीज़न को लेकर आख़िर ऐसा क्या है,जिससे ग़ुस्सा आता है ? इसके पीछे ख़ुद यह खेल ही तो नहीं है। यह संवेदना की कमी के साथ-साथ आंख-कान मुंद लेने वाला वह रवैया है,…
  • फिर फूट पड़ी महंगाई
    प्रभात पटनायक
    फिर फूट पड़ी महंगाई
    27 Apr 2021
    किसी मांग-बाधित अर्थव्यवस्था में महंगाई में उछाल सिर्फ लागतों के बढऩे से आ सकता है। पेट्रोल और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से भारत में भी यही हो रहा है।
  • fact check
    रौनक बोराणा
    कपूर, लौंग, अजवाइन और नीलगिरी तेल ऑक्सीजन लेवल नहीं बढ़ाते, केन्द्रीय मंत्री ने शेयर किया ग़लत दावा
    27 Apr 2021
    सोशल मीडिया पर एक मेसेज वायरल है जिसके मुताबिक कपूर, लौंग, अजवाइन और नीलगिरी तेल का मिश्रण सूंघने से शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है और सांस संबंधी तकलीफ़ में भी राहत मिलती है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License