NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना सोशल डिस्टेंसिंग से ज्यादा कारगर - रिसर्च
इस रिसर्च का निष्कर्ष है कि कैसे स्कूलों और अन्य स्थानों पर मास्क की अनिवार्यता बेहतर कार्यक्षमता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
संदीपन तालुकदार
08 Apr 2021
कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना सोशल डिस्टेंसिंग से ज्यादा कारगर - रिसर्च
प्रतीकात्मक तस्वीर चित्र साभार: आईएएनएस 

एक ऐसे समय में जब दुनियाभर में विश्वविद्यालय और स्कूलों को दुबारा से खोलने पर विचार किया जा रहा है, ऐसे में हाल ही में किये गए एक अध्ययन के मुताबिक कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए बंद स्थानों पर शारीरिक दूरी के स्थान पर मास्क और बेहतर वायु-संचार की व्यवस्था कहीं ज्यादा बेहतर और कारगर साबित हो सकती है। 

इस शोध को सहकर्मियों द्वारा समीक्षा की गई वैज्ञानिक पत्रिका फिजिक्स ऑफ़ फ्लुइड्स में प्रकाशित किया गया था, और इसमें एक क्लासरूम सेटिंग पर जोर दिया गया, जहाँ पर बेहतर वायु-संचार प्रणाली और मास्क के इस्तेमाल पर अध्ययन किया गया था। शोधकर्ताओं ने एक क्लासरूम का कंप्यूटर मॉडल तैयार किया था जिसमें छात्रों और शिक्षक को शामिल किया गया था। इसके उपरांत उन्होंने कमरे में हवा के बहाव के पैटर्न और रोग के प्रसार का नमूना तैयार किया। इसकी मदद से शोधकर्ताओं को कोविड-19 द्वारा हवा से उत्पन्न होने वाले संचरण के खतरों का आकलन करने में मदद मिली।

हालाँकि यहाँ पर कुछ एहतियात बरतना आवश्यक है। यह अध्ययन कमरों में एयर फिल्टर्स के साथ कुछ विशिष्ट आयामों के साथ ही संभव है। इसे छोटे कमरों में ज्यादा तादाद के साथ छात्रों या लोगों की उपस्थिति पर लागू करना संभव नहीं है, भले ही पर्याप्त वायु-संचार की व्यवस्था चाहे हो या न हो, जैसा कि भारत के मामले में ऐसा देखने को मिल सकता है।

यह तथ्य सर्वविदित है कि कोरोनावायरस वायु के कणों के जरिये फैलता है, जो किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा छींकने, खांसने या बात करने से हो सकता है। वायरस युक्त वायुवाहक कण किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सांस लेने पर प्रविष्ठ कर जाते हैं, और इस प्रकार वायरस का संचरण एक व्यक्ति सी दूसरे व्यक्ति तक होता है।

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मॉडल क्लासरूम था, जो 9.5 मीटर लंबा 7.0 मीटर चौड़ा और इसकी उंचाई 2.7 मीटर थी। इस मॉडल में छात्र मास्क पहने हुए थे (क्योंकि उनमें से कोई भी संक्रमित हो सकता था) के साथ-साथ अध्यापक भी मास्क धारण किये हुए थे। 

शोधकर्ताओं ने इसके बाद दो स्थितियों को आधार बनाकर हवा के जरिये संक्रमण का विशलेषण किया। पहले मामले में क्लासरूम अच्छी तरह से हवादार था जबकि दूसरे मामले में ऐसा नहीं था। अध्ययन ने बोर्ड पर दो गणनात्मक दृष्टिकोणों को तरल गतिकी अध्ययनों में उपयोग में लिया। पहले वाले को वेल्स-रिले दृष्टिकोण के रूप में जाना जाता है, जबकि दूसरा गणना तरल गतिकी पर आधारित है, जिसे आम तौर पर कारों, हवाई जहाजों की वायुगतिकी या पानी के भीतर चलने वाली पनडुब्बियों की आवाजाही को समझने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।

इस अध्ययन के बारे में टिप्पणी करते हुए, इस अध्ययन के सह-लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट्रल फ्लोरिडा के सहायक प्रोफेसर, माइकेल किन्ज़ेल को यह कहते हुए उद्धृत किया गया है: “यह शोध इस मामले में महत्वपूर्ण है कि यह आंतरिक वातावरण में सुरक्षा के बारे में हम कैसे समझ रहे हैं के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करता है।”

अध्ययन में पाया गया कि मास्क पहनना संक्रमण को रोकने में फायदेमंद है, क्योंकि सांस लेने के कारण मास्क हमें एक गर्म हवा का कमजोर झोंका प्रदान करता है, और इसकी वजह से एयरोसोल लंबवत दिशा में जाने लगते हैं। एयरोसोल के इस बहाव से (यदि वायरल के कण मौजूद हैं) उन्हें पास बैठे छात्रों तक पहुँचने से रोकना संभव हो जाता है। 

खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा “अध्ययन में पाया गया है कि यदि मास्क धारण करने को अनिवार्य बना दिया जाता है, तो उस स्थिति में एयरोसोल संचरण की राह को रोकने के लिए छह फीट की शारीरिक दूरी की आवश्यकता नहीं रह जाती है। ये नतीजे बताते हैं कि मास्क की मौजूदगी में, शारीरिक दूरी को कायम रखने से संचरण की संभावना कम नहीं होती, जो इस बात पर जोर देती है कि कैसे मास्क की अनिवार्यता स्कूलों और अन्य स्थानों की कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी करने में प्रमुख कारक साबित हो सकती है।”

इसके अलावा एयर फिल्टर के साथ एक बेहतर वायु-संचार प्रणाली से संक्रमित होने के खतरों को बिना हवादार क्लासरूम वाली जगहों की तुलना में 40% से 50% तक कम किया जा सकता है। एक बेहतर वायु-संचार प्रणाली से हवा के अंदर और बाहर के लगातार प्रवाह के क्रम को स्थापित किया जा सकता है, और इस हवा के बहाव के साथ कई एयरोसोल कणों (जिनमें वायरल कण शामिल हो सकते हैं) को एयर फिल्टर तक ले जाते हैं। एयर फिल्टर एयरोसोल के एक हिस्से को हटा देता है। इसके विपरीत एक ऐसे कमरे में जहाँ अच्छे वायु-संचार की व्यवस्था नहीं है, वहां पर एयरोसोल कमरे के अंदर बैठे लोगों के उपर केन्द्रित हो जाती है।

अपने नतीजों पर आगे बात करते हुए किन्ज़ेल ने कहा: “यदि हम मास्क धारण करने की अवस्था की शारीरिक दूरी से संक्रमित होने की संभावनाओं से तुलना करें तो तीन फीट की शारीरिक दूरी से छह फीट की दूरी बनाये रखने की तुलना में संक्रमण में इजाफा होने के संकेत नहीं मिलते हैं। यह संभवतया स्कूलों एवं अन्य व्यवसायों को बाकी के महामारी के दिनों में सुरक्षित तरीके से संचालन करने में मददगार साबित हो सकता है। इन नतीजों से जो बात निकलकर आई है, वह यह है कि संचरण को रोकने के लिए वायु-संचार प्रणाली और मास्क का इस्तेमाल बेहद अहम है, और शारीरिक दूरी वह पहली चीज होगी, जिसका हमें जल्द से जल्द परित्याग कर देना चाहिए।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

COVID-19: Study Says Masks, Good Ventilation Prevent Spread Better than Social Distancing in Closed Spaces

COVID19
COVID-19 Transmission
COVID Masks
Aerosols
Airborne Transmission of COVID19
Ventilation and Spread of COVID19

Related Stories

कोविड-19 के चलते अनाथ हुए बच्चों की स्तब्ध करती तादाद

इस संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने के लिए सरकार को ख़र्च बढ़ाना चाहिए

हरियाणा: कोविड की दूसरी लहर में सैकड़ों आशा कार्यकर्ता हुईं पोज़िटिव;10 की मौत,लेकिन नहीं मिला मुआवज़ा

जीटीबी अस्पताल के डॉक्टर की कोरोना से मौत : न मुआवज़ा, न खेद

सीपीएम ने बंगाल के कोविड संकट के बीच जवाबदेही की मांग की, ट्रेड यूनियनों ने  उठाया पूर्ण टीकाकरण का मुद्दा

माघ मेला : ‘दो गज़ की दूरी, मास्क है ज़रूरी’ का ऐलान और लाखों की भीड़

कोविड-19 पुनर्संक्रमण: नए अध्ययन के मुताबिक यह वायरस खुद को इंसानी क्रोमोसोम में छुपाकर जिन्दा रख सकता है!


बाकी खबरें

  • केवल बढ़ती अव्यवस्था के कारण
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    बढ़ती अव्यवस्था के कारण
    14 Sep 2021
    हम कैसे समय में जी रहे हैं जहाँ हमसे एक ऐसी दुनिया में तर्कसंगत रहने की बात कही जाती है जहाँ केवल अव्यवस्था ही एकमात्र आदर्श है, युद्ध और बाढ़ के कारण अव्यवस्था, किसी-न-किसी महामारी के कारण अव्यवस्था।
  •  'मैं देश नहीं बिकने दूंगा' से 'मैं शेष नहीं बचने दूंगा' तक का सफर
    प्रभात पटनायक
    'मैं देश नहीं बिकने दूंगा' से 'मैं शेष नहीं बचने दूंगा' तक का सफर
    14 Sep 2021
    भारत में मोदी सरकार का अपना ही विचित्र एजेंडा है। हरेक चीज को एक माल में तब्दील कर देने का एजेंडा। कुछ भी पवित्र नहीं हैं, कुछ भी पूजनीय नहीं है, कुछ भी बाजार से ऊपर नहीं है, सब कुछ बिकाऊ है।
  • farmers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल: सेब के उचित दाम न मिलने से गुस्साए किसानों का प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन
    14 Sep 2021
    संयुक्त किसान मंच ने सरकार को चेताया है कि अगर आगामी 15 दिनों के भीतर सरकार बागवानों और किसानों के साथ मिलकर उनकी मांगों पर अमल नहीं करती है तो संयुक्त किसान मंच, अन्य संगठनों के साथ मिलकर 27 सितंबर…
  • इको गॉर्डन, लखनऊ में 10 सितंबर को युवाओं को सम्बोधित करते किसान नेता डॉ. दर्शन पाल।
    लाल बहादुर सिंह
    युवा रोज़गार आंदोलन किसान-मज़दूर आंदोलन के साथ जुड़कर नवउदारवाद और फ़ासीवाद के लिए चुनौती बनेगा
    14 Sep 2021
    27 सितम्बर का भारत बन्द इस मिशन का अहम पड़ाव है। इसके अलावा मोदी जी के जन्मदिन 17 सितंबर को इस वर्ष भी युवाओं ने जुमला दिवस-बेरोजगार दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
  • अर्जेंटीना में भूख से निपटने में मदद करते सामुदायिक संगठन, उनकी हमदर्दी और एकजुटता
    जूलियन इंजुगारट, एना डागोरेट
    अर्जेंटीना में भूख से निपटने में मदद करते सामुदायिक संगठन, उनकी हमदर्दी और एकजुटता
    14 Sep 2021
    महामारी अपने साथ पहले से कहीं ज़्यादा ग़ैर-बराबरी और नाइंसाफ़ी लेकर आयी। लेकिन,ज़मीनी स्तर के आंदोलनों ने संघर्ष कर रहे लोगों को एकजुट किया, संगठित किया और उनके लिए खाने-पीने का इंतज़ाम किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License