NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
अंतरराष्ट्रीय
अफ्रीका
शीर्ष कोविड-19 वैक्सीन निर्माताओं ने गरीब देशों को निराश किया
फ़ाइज़र, मोडेरना एवं जेएंडजे जैसे फार्मा दिग्गजों ने न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवाक्स में ही अपना कोई योगदान दिया और न ही गरीब देशों को बड़ी संख्या में खुराक ही मुहैया कराई है।

ऋचा चिंतन
23 Feb 2022
vaccine
प्रतिनिधि तस्वीर। चित्र साभार: फ़्लिकर

करीब एक साल पहले से ही टीकों के उत्पादन की शुरुआत के बावजूद दुनिया भर में अरबों लोगों को कोविड-19 के खिलाफ टीका नहीं लगाया जा सका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसुस के अनुसार, ऐसे 116 देश हैं “जो इस वर्ष के मध्य तक हर देश की 70% आबादी का टीकाकरण करने के हमारे साझे लक्ष्य के पथ से अभी भी दूर हैं।” 16 फरवरी को महाद्वीप में टीकाकरण में असमानता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अभी भी अफ्रीका में 83% लोगों को एक भी खुराक नहीं मिल पाई है। 

निम्न-आय वाले देशों में बेहद कम टीकाकरण  

विभिन्न देशों में सभी आय समूहों के बीच में टीकाकरण की दरों पर एक निगाह डालने पर स्पष्ट रूप से असमानता नजर आती है। जैसा कि नीचे दिए गये चित्र 1 में दिखाया गया है, कि उच्च-आय (एचआईसी) और उच्च-मध्य-आय वाले देशों (यूएमआईसी) में 70% से अधिक लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। वहीँ दूसरी तरफ निम्न-आय वाले देशों में 6% टीकाकरण की दर बेहद चौंकाने वाली है। निम्न-एवं-मध्यम-आय वाले देशों (एलएमआईसी) में भी सिर्फ 44% ही पूर्ण टीकाकरण वाली आबादी है। 

इनमें से अधिंकाश देश, जो कि अफ्रीका, एशिया और लातिनी अमेरिका में हैं, आज भी टीके के लिए प्रतीक्षारत हैं। टीकाकरण की मुहिम में और भद्दा मजाक, अफ्रीका के लिए टीकों की आपूर्ति में नजर आती है, जिसमें अलग-अलग देशों और कोवाक्स इन दोनों के जरिये आपूर्ति की गई टीकों की शेल्फ लाइफ (मियाद) बेहद कम थी और उनका इस्तेमाल किये जाने से पहले ही खत्म हो गई थी।

वैक्सीन निर्माताओं ने निम्न-आय वाले देशों को विफल कर दिया है 

फ़ाइज़र/बायोएनटेक और एस्ट्राज़ेनेका/ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय जैसी कुछ बड़ी दवा कंपनियों द्वारा उत्पादित कुछ टीकों ने वैश्विक बाजार पर कब्जा जमा रखा है (नीचे चित्र 2 में)। चीनी फार्मा प्रमुख सिनोफार्म और सिनोवाक ने भी टीकों के अच्छे-खासे स्टॉक को उत्पादित किया है। 

जबकि अधिकांश प्रमुख वैक्सीन निर्माता निजी कंपनियां हैं, वहीँ चीनी राज्य-स्वामित्व वाली सिनोफार्म एक प्रमुख वैक्सीन निर्माता के तौर पर उभरी है जिसने एलएमआईसी देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की है।

नीचे चित्र 3 में विभिन्न देशों को इन टीकों की आपूर्ति को दर्शाया गया है। अधिकांश बड़ी फार्मा कंपनियों ने निम्न-आय वाले देशों (एलआईसी) की उपेक्षा ही की है। फाइजर और मोडेरना ने अपने उत्पादन के 80% और 70% से अधिक हिस्से को एचआईसी और यूएमआईसी देशों की ओर ही निर्देशित कर रखा है। 

इसके विपरीत, एस्ट्राज़ेनेका ने अपने उत्पादन के 70% से अधिक हिस्से को एलएमआईसी और एलआईसी देशों को आपूर्ति की है। हालाँकि जेएंडजे ने फ़ाइज़र के टीकों की संख्या की तुलना में सिर्फ आठवें हिस्से का ही उत्पादन किया है, लेकिन इसके बावजूद इसने उनमें से करीब 53% हिस्से की आपूर्ति एलएमआईसी और एलआईसी देशों को की है।

चित्र 3 यह भी दर्शाता है कि एलआईसी एवं एलएमआईसी देशों के प्रति कंपनियों की सीधी प्रतिबद्धता काफी कम है। इन देशों में, विशेषकर एलआईसी देशों की मुख्य तौर पर कोवाक्स पर निर्भरता बनी हुई है, जिसे स्वंय अमीर देशों या बिग फार्मा से भी पर्याप्त मदद नहीं मिली है।  

बिग फार्मा द्वारा कोवाक्स की उपेक्षा  

कोवाक्स, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य बहुपक्षीय एजेंसियों के बीच की एक सहभागिता है, जिसका गठन टीकों के विकास और निर्माण में तेजी लाने और इसके जरिये उनके निष्पक्ष एवं न्यायसंगत पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बार-बार अमीर देशों के साथ बिग फार्मा से कोवाक्स में योगदान करने की अपील की है ताकि गरीब देशों को कम दामों पर टीकों को उपलब्ध कराया जा सके। 

हालाँकि, नीचे दिए गए चित्र से 4 पता चलता है कि शीर्ष फार्मा कंपनियां कोवाक्स में अपने योगदान के मामले में बुरी तरह से विफल रही हैं। उदाहरण के लिए, जहाँ 2021 में फ़ाइज़र ने छप्पर-फाड़ मुनाफा कमाया, इसने कोवाक्स में मात्र 4 करोड़ खुराक का योगदान दिया। 2021 में, फ़ाइज़र ने अपने राजस्व में करीब 4,200 करोड़ डॉलर से 8,100 करोड़ डॉलर तक की आय के साथ 95% की उछाल दर्ज की है। 2020 से 2021 के बीच में फ़ाइज़र की शुद्ध आय में 140% की जबर्दस्त वृद्धि हुई है। मोडेरना ने भी सिर्फ 5 करोड़ खुराक मुहैय्या कराए, जबकि जेएंडजे ने 60 लाख खुराक का मामूली योगदान किया है। 

एस्ट्राज़ेनेका, सिनोवाक और सिनोफर्म ही वे अकेली वैक्सीन निर्माता कंपनियां रही हैं जिनमें से हर एक ने कोवाक्स में 10 करोड़ डोज से अधिक खुराक का योगदान दिया है। मोडेरना और फ़ाइज़र जैसी कंपनियों जिन्होंने महामारी के दौरान सबसे ज्यादा मुनाफा बनाया है, ने कोवाक्स को बहुत कम डोज प्रदान कर सिर्फ मुहं-जबानी जमाखर्च से काम चला लिया है।

इसके अलावा, बिग फार्मा ने एलआईसी और एलएमआईसी देशों के निर्माताओं के साथ तकनीकी जानकारी साझा करने से भी इंकार कर दिया है। इन फार्मा दिग्गजों के द्वारा ट्रिप्स छूट प्रस्ताव का जमकर विरोध किया जा रहा है और अमीर देशों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसे विफल करने के लिए पैरवी की जा रही है। 

बिग फार्मा लॉबी का मुकाबला करने और टीके की असमानता से निटपने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 2021 में दक्षिण अफ्रीका में अपने वैश्विक एमआरएनए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र को स्थापित किया था, जिसका उद्देश्य एलआईसी एवं एलएमआईसी देशों में वैक्सीन निर्माण की क्षमता को विकसित करने का था।

हाल ही में घेब्रेयेसुस साफ-साफ़ शब्दों में बताया था, “इस असमानता की एक बड़ी वजह इस तथ्य से प्रेरित है कि वैश्विक स्तर पर वैक्सीन उत्पादन का काम चुनिंदा उच्च-आय वाले देशों में संकेंद्रित है। इसलिए, महामारी के सबसे स्पष्ट सबकों में से एक यह मिला है कि टीकों के स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है, विशेष कर निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में।” 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रौद्योगिकी केंद्र के निर्माण के प्रयासों का नतीजा मिलना शुरू हो गया है, और इसने मोडेरना के एमआरएनए वैक्सीन के पुनरुत्पादन में सफलता हासिल कर ली है। छह देशों, मिश्र, केन्या, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका और ट्यूनीशिया को सबसे पहले-पहल अपने खुद के एमआरएनए टीके बनाने की तकनीक प्राप्त होने जा रही है।

जहाँ एक तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई वैज्ञानिकों जैसे क़िरदार वैक्सीन की असमानता से निपटने के लिए हर-संभव कोशिशों में जुटे हुए हैं, वहीँ दूसरी तरफ बिग फार्मा की ओर से लगातार मुनाफा कमाने और वैक्सीन, दवा और चिकत्सा शास्त्र पर पेटेंट एकाधिकार को अपने लिए सुरक्षित बनाये रखने के प्रयास जारी हैं।

Coronavirus
COVID-19
Covid Vaccination

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Biden
    पीपल्स डिस्पैच
    बाइडेन का पहला साल : क्या कुछ बुनियादी अंतर आया?
    25 Jan 2022
    जनआंदोलनों के दबाव की प्रतिक्रिया में बाइडेन ने अपने कार्यकाल के लिए ऊंचे-ऊंचे लक्ष्य तय किए थे। लेकिन इनमें से कितने पूरे हुए?
  • Sudha Bharadwaj
    एजाज़ अशरफ़
    सामाजिक कार्यकर्ताओं की देशभक्ति को लगातार दंडित किया जा रहा है: सुधा भारद्वाज
    25 Jan 2022
    जेल में अपने तजुर्बों का हवाला देते हुए और कामगारों की नुमाइंदगी करने वाली एक वकील के तौर पर जानी-मानी कार्यकर्ता कहती हैं कि भारत अब भी संविधान में किये गये इंसाफ़ और बराबरी के वादों को साकार करने…
  • Netaji
    सबरंग इंडिया
    नेताजी पर कब्ज़ा ज़माने की हिन्दू राष्ट्रवादी कवायद
    25 Jan 2022
    नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती (23 जनवरी) के अवसर पर देश भर में अनेक आयोजन हुए. राष्ट्रपति भवन में उनके तैल चित्र का अनावरण किया गया. केंद्र सरकार ने घोषणा की कि नेताजी का जन्मदिन हर वर्ष '…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,55,874 नए मामले, 614 मरीज़ों की मौत 
    25 Jan 2022
    देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 97 लाख 99 हज़ार 202 हो गयी है।
  • up map
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव:  कई सीटें ऐसी भी जहां हार-जीत का अंतर 500 वोटों से भी कम
    25 Jan 2022
    इसमें कोई दो राय नहीं कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाले हैं, जानें किन-किन सीटों पर होगा एक-एक वोट का महत्व?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License