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आंदोलन
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राजनीति
'डेको वाहिनी' की मदद से बंगाल में आंदोलनों को धार देने की तैयारी में सीपीएम
यह कोई अलग औपचारिक संगठन नहीं होगा, बल्कि एडवा की क्विक रिस्पांस टीम के रूप में काम करेगा। बांग्ला में डाक का मतलब किसी का आह्वान या बुलाना होता है।
सरोजिनी बिष्ट
12 Nov 2019
protest

पश्चिम बंगाल में इन दिनों हर राजनीतिक पार्टी अपनी गतिविधियों में महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल कर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी है। इसके अलावा विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन को लेकर भी राज्य की विपक्षी पार्टियों में तगड़ी प्रतिद्वंद्विता है। इस मुकाबले में अपनी बढ़त बनाने के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महिला संगठन ने 'डेको वाहिनी' का गठन किया है।

यह कोई अलग औपचारिक संगठन नहीं होगा, बल्कि अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) की क्विक रिस्पांस टीम के रूप में काम करेगा। बांग्ला में डाक का मतलब किसी का आह्वान या बुलाना होता है। यानी, नाम से ही जाहिर है कि 'डेको वाहिनी' बुलाने पर तुरत-फुरत में हाजिर होने वाला विशेष दस्ता होगा।

ऐसी घटनाएं अक्सर घटती रहती हैं जहां फौरन आंदोलन में उतरने की ज़रूरत होती है। बंगाल की तो पहचान ही रही है सरकारों के हर छोटे-बड़े अलोकतांत्रिक कदम व अन्याय के खिलाफ जोरदार आंदोलन की। 35 साल के अपने शासन में भी सीपीएम ने आंदोलनों से किनारा नहीं किया। विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विषयों पर वह सक्रियता से विरोध में उतरती रही। लेकिन सरकार में रहते हुए आंदोलन करना एक बात है और विपक्ष के रूप में भूमिका निभाते हुए आंदोलन करना दूसरी।

इस संबंध में सीपीएम की राज्य कमेटी के एक सदस्य ने एक बांग्ला अखबार से बातचीत में कहा है, ''सड़क पर उतरकर जनता के साथ खड़ा होना ही राजनीतिक लोगों का काम है। अब समय और हालात बदल चुके हैं। ऐसे में संगठन के बहुत से लोगों का मानना है कि फौरन प्रतिक्रिया जताने के लिए एक अलग टीम बनाने से सुविधा होगी।''

'डेको वाहिनी' के गठन की शुरुआत कोलकाता से हुई है। इसके लिए एडवा के कोलकाता जिला नेतृत्व ने संगठन की सदस्यों में से उन महिलाओं को खास तौर पर चयनित किया है, जो किसी आंदोलन या प्रतिवाद के लिए बुलाये जाने पर आनन-फानन में उपस्थित होने में सक्षम हों।

स्थानीय मीडिया में प्रकाशित एडवा की एक राज्य नेता ने इस संबंध में कहा है, ''प्रत्येक जिले में इस तरह की वाहिनी के गठन का इरादा है।

संगठन में ऐसी अनेक कार्यकर्ता हैं जो बुलाने पर फौरन पहुंचने में सक्षम हैं।'' फिलहाल कोलकाता के 40 अंचलों को लेकर 'डेको वाहिनी' का गठन किया गया है। प्रत्येक अंचल से आठ से दस महिलाओं को इसमें रखा गया है। इस तरह 300 से 400 महिलाएं कोलकाता में किसी आंदोलन या प्रतिवाद के लिए तुरंत उपस्थित हो सकती हैं।

पिछले दिनों एडवा का कोलकाता जिला सम्मेलन हुआ, जिसमें पेश सांगठनिक रिपोर्ट में 'डेको वाहिनी' का जिक्र है। रिपोर्ट में कहा गया है, ''विभिन्न कार्यक्रमों के लिए हमलोग कई अंचल कमेटियों को जोड़कर जुटान करते हैं। किसी घटना पर उसी समय प्रतिक्रिया के लिए 'डेको वाहिनी' बनायी गयी है।'' सम्मेलन के दौरान कहा गया कि कोलकाता राज्य की राजनीति का मुख्य केंद्र है। ऐसे में यहां 'डेको वाहिनी' की 300 से ज्यादा महिलाओं के हमेशा आंदोलन के लिए तैयार रहने से विभिन्न मसलों पर पार्टी की ओर से सार्थक और कारगर हस्तक्षेप किया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों बंगाल की राजनीति बेहद गर्म है। विपक्षी भूमिका के लिए सीपीएम को भाजपा से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। भाजपा महिला मोर्चा की ओर से पहले ही 'दुर्गा वाहिनी' का गठन किया जा चुका है, जो राज्य की तृणमूल सरकार के खिलाफ आंदोलनों में लगातार सक्रिय है। जरूरत पड़ने पर तुरंत सड़क पर उतरा जा सके, इसके लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के महिला संगठन के पास भी 'बंगजननी वाहिनी' है। ऐसे में सीपीएम के महिला संगठन एडवा के लिए भी इसी तर्ज पर क्विक रिस्पांस टीम बनाना जरूरी हो गया था। थोड़ी देर से ही सही, पर अब सीपीएम इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में सन 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले, 2020 में होनेवाले नगर निकाय चुनावों को राज्य की सत्ता के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। नगर निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। यानी इन चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के लिए किसी पार्टी में महिलाओं की भागीदारी व सक्रियता बहुत मायने रखती है। इसे देखते हुए राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने प्रत्येक बूथ पर कम से कम एक महिला बूथ कार्यकर्ता तैयार करने का लक्ष्य रखा है। भाजपा ने भी अपने महिला संगठन को मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में सीपीएम ने भी अपने महिला संगठन और पार्टी को मजबूती देने के लिए 'डेको वाहिनी' के माध्यम से एक नयी शुरुआत की है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में रही हैं।)

West Bengal
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TMC
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