NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सीडब्ल्यूसी ने कोरोना से निपटने को लेकर सरकार पर भारी कुप्रबंधन और अक्षमता का आरोप लगाया
 ‘‘भारत में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी, 2020 को सामने आया था। भारत में कोविड का पहला टीका 16 जनवरी, 2021 को लगाया गया था। इन दो तारीखों के बीच और उसके पश्चात, त्रासदी, अक्षमता और भारी कुप्रबंधन की एक विस्तृत गाथा है।’’
भाषा
17 Apr 2021
सीडब्ल्यूसी ने कोरोना से निपटने को लेकर सरकार पर भारी कुप्रबंधन और अक्षमता का आरोप लगाया
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

नयी दिल्ली: कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने शनिवार को आरोप लगाया कि कोरोना वायरस महामारी से निपटने में केंद्र सरकार का भारी कुप्रबंधन और अक्षमता देखने को मिली है।

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में यह फैसला भी किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पार्टी के सुझावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजेंगे।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे देश भर में जरूरतमंद लोगों की मदद करें। प्रदेश कांग्रेस कमेटियों से कहा गया है कि वे राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित करें ताकि लोगों की मदद की जा सके।

सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, ‘‘ भारत में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी, 2020 को सामने आया था। भारत में कोविड का पहला टीका 16 जनवरी, 2021 को लगाया गया था। इन दो तारीखों के बीच और उसके पश्चात, त्रासदी, अक्षमता और भारी कुप्रबंधन की एक विस्तृत गाथा है।’’

कांग्रेस कार्य समिति ने आरोप लगाया कि पहले दिन से ही केंद्र सरकार ने महामारी के नियंत्रण से संबंधित सभी शक्तियां और अधिकार अपने हाथों में ले लिए।

उसने कहा, ‘‘महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार का हर आदेश तथा निर्देश कानून बन गया और राज्य सरकारों के पास प्रशासनिक उपायों को अपनाने तथा लागू करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं रही।’’ कांग्रेस की शीर्ष इकाई ने कहा, ‘‘संक्रमण से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रारंभिक उपाय सतही थे। जब कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं था, ऐसी पस्थितियों में रोकथाम ही मात्र विकल्प था। उसके लिए ‘टेस्टिंग, ट्रैकिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट’ की आवश्यकता थी। लेकिन इस दिशा में भी केंद्र सरकार का प्रयास अपर्याप्त रहा।’’

उसने आरोप लगाया, ‘‘केन्द्र सरकार इस संबंध में पर्याप्त जन जागरूकता पैदा करने में असफल रही कि महामारी का घटता हुआ प्रकोप महामारी की दूसरी लहर का सूचक हो सकता है, जो कि पहली लहर की तुलना में अधिक विनाशकारी हो सकता है।’’

बयान में दावा किया गया, ‘‘पर्याप्त धन और अन्य रियायतें प्रदान करके भारत में दो स्वीकृत टीकों के उत्पादन और आपूर्ति में तेजी से वृद्धि करने में विफलता रही। भारत में अन्य टीका बनाने वाली कंपनियों के स्वीकृत टीकों के अनिवार्य लाइसेंसिंग और उत्पादन का विकल्प अपनाने में विफलता रही।’’

सीडब्ल्यूसी ने कहा, ‘‘पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के टीकाकरण के बाद सार्वभौमिक टीकाकरण लागू करने में विफलता रही। टीकाकरण कार्यक्रम में पूर्व पंजीकरण और नौकरशाही नियंत्रण से छुटकारा दिलाने में विफलता रही। टीकाकरण का क्रियान्वयन राज्य सरकारों और सरकारी तथा निजी अस्पतालों को सौंपने में विफलता रही।’’ उसने दावा किया, ‘‘टीके की खुराक की बर्बादी को रोकने या कम करने में विफलता रही, जिस कारण आज 23 लाख से भी अधिक खुराक बर्बाद हो चुकी है। संक्रमित व्यक्तियों और उनके संपर्कों की टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग के परिमाण और गति को बनाए रखने में विफलता देखने को मिली।’’

उसने यह आरोप भी लगाया, ‘‘आत्मनिर्भरता के अव्यावहारिक जोश’ के कारण अन्य ऐसे टीकों के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने में विफलता रही, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ और जापान में मंजूरी मिल गई थी।’’ सीडब्ल्यूसी ने दावा किया कि राज्यों को पर्याप्त मात्रा में टीके उपलब्ध नहीं कराये गए।

उसने कहा, ‘‘अपारदर्शी पीएम-केयर फंड में सैकड़ों करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद राज्य सरकारों को पर्याप्त धन मुहैया कराने में केंद्र विफल रहा जबकि राज्य दो मोर्चों पर युद्ध लड़ रहे थे - एक महामारी के खिलाफ और दूसरा आर्थिक मंदी के खिलाफ।’’ सीडब्ल्यूसी ने कहा, ‘‘लोगों को समझना होगा कि जब तक तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए जायेंगे, राष्ट्र को एक अभूतपूर्व विनाश का सामना करते रहना पड़ेगा। आशा करते हैं कि सरकार विवेक और सद्बुद्धि से काम लेगी।’’

Congress
cwc
Coronavirus
BJP
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर: हिजाब विवाद हो या नफ़रती भाषण, सब कुछ चुनाव के लिए कब तक
    12 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान में रख कर्नाटक से हुए हिजाब विवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने…
  • goa elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्टः गोवा चुनावों में जोड़-तोड़ व हिंदुत्व ख़िलाफ क्या होगा बदलाव
    11 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने गोवा में चल रहे चुनावी समर का आकलन करते हुए जानने की कोशिश की इस बार क्या चल पाएगा हिंदुत्व का नफ़रती कार्ड या जनता के बुनियादी मुद्दों पर होगा मतदान।…
  • Sunderbans
    अयस्कांत दास
    सुंदरबन में अवैध रिसॉर्ट के मालिक की पहचान नहीं कर पा रही ममता सरकार
    11 Feb 2022
    पारिस्थितिक रूप से नाजुक सुंदरबन में कथित तौर पर केंद्र प्रायोजित मनरेगा योजना के धन का इस्तेमाल एक अवैध 'इको-टूरिज्म' रिसॉर्ट के निर्माण में किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी, पांच लाख से ज़्यादा पद रिक्त
    11 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिकर्मी होने चाहिए जबकि भारत में ये आंकड़ा 156 है। वहीं भारत में स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 195 है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    प्यूर्टो रिको में शिक्षकों ने की वेतन और सुविधाओं की मांग के साथ देशव्यापी हड़ताल
    11 Feb 2022
    सरकार ने वेतन में बढ़ोतरी न करने के साथ साथ पेंशन में कटौती भी कर दी है, इसके ख़िलाफ़ शिक्षकों ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License