NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
मांगने आए रोज़गार, मिली पुलिस की लाठी–पानी की बौछार
पुलिस ने माले विधायक मनोज मंजिल और संदीप सौरभ से भी मार-पीट की, यहां तक कि विधायक अजित कुशवाहा जी के कपड़े भी फाड़ दिए गए। 
अनिल अंशुमन
01 Mar 2021
मांगने आए रोज़गार, मिली पुलिस की लाठी–पानी की बौछार

आज 19 लाख रोजगार देने की घोषणा को पूरा करने तथा शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी की मांग को लेकर बिहार विधान सभा मार्च के लिए प्रदेश के विभिन्न इलाकों से जुटे छात्र–युवाओं पर नितीश कुमार सरकार की पुलिस ने बेलगाम होकर आँसू गैस दागते हुए वाटर कैनन से पानी की बौछार के साथ लठियाँ भांजी।                                                            

इतना ही नहीं छात्र–युवाओं के मार्च को गांधी मैदान स्थित जेपी स्मारक के पास जब पुलिस ने भारी बैरिकेड लगाकर रोक दिया तो मार्च का नेतृत्व कर रहे इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व माले विधायक मनोज मंजिल, आइसा अध्यक्ष व विधायक संदीप सौरभ, युवा विधायक अजित कुशवाहा तथा इनौस महासचिव नीरज कुमार ने प्रशासन से कहा कि हम लोग राज्य विधायक हैं और कानून–व्यवस्था का पालन करना जानते हैं इसलिए सरकार के प्रतिनिधि यहाँ आकर हमसे बात करें। जिसे अनसुना किया जाने पर तीनों विधायकों व आंदोलनकारी छात्र युवा प्रतिनिधियों ने कहा कि अब हमलोग यहीं बैठकर प्रतिवाद करेंगे। तभी वहाँ पहले से ही लाकर खड़े किए गए वाटर कैनन से पानी की बौछार शुरू कर, आनन फानन पुलिस को लठियाँ चलाने का ऐसे हुक्म दिया गया मानो सरकार–प्राशसन द्वारा पूर्व से ही तय था। दर्जनों पुलिस अधिकारी और जवानों ने तीनों युवा विधायकों और मार्च का नेतृत्वकर्त्ताओं के साथ धक्का मुक्की करते हुए लठियाँ चलानी शुरू कर दी। तीनों युवा विधायकों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ लठियाँ बरसाईं गईं। उन्हें बचाने आए युवाओं को भी बुरी तरह से पीटा गया। युवा विधायक अजित कुशवाहा जी के तो कपड़े भी फाड़ दिए गए।

पुलिस की इस बर्बरता और अपने नेताओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार–दमन को देखकर शांतिपूर्ण ढंग से नारे लगा रहे संयमित छात्र–युवाओं का आक्रोश भड़क उठा और वे ज़ोर ज़ोर से बैरिकेड हिलाने लगे। बिना किसी पूर्व चेतावनी दिए नारे लगा रहे छात्र-युवाओं पर आँसू गैस के गोले दागते हुए फिर से वाटर कैनन से पानी बौछार करते हुए लाठी चार्ज कर दिया। तितर बितर हुए छात्र–युवाओं के जत्थे जब बचने के लिए गांधी मैदान परिसर में घुस गए तो पुलिस के अधिकारी–जवानों ने मैदान के गेट बंद कर वहां भी लाठीयां भांजी । जिससे दर्जनों छात्र–युवा घायल हो गए। जिन्हें प्रशासन द्वारा समय पर एंबुलेंस नहीं उपलब्ध कराए जाने पर वहाँ एकत्र लोगों कि मदद से घायलों को रिक्शे से ही अस्पताल ले जाया गया। 

इस दौरान विधान सभा का सत्र छोड़कर माले के सारे विधायक वहां पहुँच गए और पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई का विरोध करने लगे जिससे प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।

गांधी मैदान में इकट्ठे आंदोलनकारी छात्र–युवाओं को संबोधित करते हुए इनौस नेता–विधायक मनोज मंजिल, माले के युवा विधायक अजित कुशवाहा व महानन्द ने कहा कि आज अगर ये गांधी मैदान नितीश कुमार के पुलिसिया दमन का अखाड़ा बना है तो एक दिन बिहार के छात्र–युवाओं द्वारा भाजपा–जदयू कुशासन के खात्मे का भी गवाह बनेगा। 

घटना स्थल पर मौजूद पुराने छात्र आंदोलनकारी तरकेश्वर ओझा ने कहा कि आज की घटना ने साबित कर दिया है कि खुद को छात्र आंदोलन की पैदाइश बतानेवाले बिहार के मुख्य मंत्री नितीश कुमार ने ये तय कर रखा है कि जब भी बिहार के छात्र–युवा उनसे शिक्षा–रोजगार की मांग करने के लिए राजधानी में आएंगे तो उन्हें लाठी–पानी की बौछार और दमन के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।

सनद रहे कि इसके पहले भी जब प्रदेश के टेट/सीटेट पास अभ्यर्थी, शिक्षक अभ्यर्थी अपने नियोजन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना पर बैठे हुए थे तो हथियारबंद पुलिस ने उन्हें दौड़ा दौड़ा कर पीटा था। जिसमें अनेक महिला अभ्यर्थी बुरी तरह से घायल हो गईं थीं। बाद में आंदोलनकारी अभ्यर्थियों को ही गिरफ्तार कर उनपर फर्जी मुकदमे थोप दिये गए थे।

ज्ञात खबरों के अनुसार कि इंकलाबी नौजवान सभा तथा आईसा ने संयुक्त रूप से  पहले से ही 1 मार्च को रोजगार–शिक्षा व स्वास्थ्य के सवाल पर बिहार के छात्र–युवाओं के विधान सभा मार्च की घोषणा कर रखी थी। जिसके लिए 8 से 15 फरवरी तक पूरे प्रदेश में एक सप्ताह का रोजगार यात्रा अभियान भी चलाया गया था।

जिसके माध्यम से बिहार के छात्र–युवाओं को भाजपा–जदयु सरकार से 19 लाख रोजगार देने व राज्य में शिक्षा-स्वास्थ्य की दुरवस्था अविलंब दूर करने हेतु नितीश कुमार सरकार पर व्यापक जन दबाव पैदा करने का आह्वान किया गया था।

विधान सभा मार्च के लिए 6 सूत्री छात्र–युवा चार्टर पेश करते हुए मांग की गई कि नितीश कुमार सरकार एक महीने के अंदर पहले तो रेलवे समेत तमाम सरकारी कंपनियों/उपक्रमों के निजीकरण की नीतियों के खिलाफ बिहार विधान सभा से प्रस्ताव पारित करे। दूसरा संविदा–मानदेय व ठेका नौकरी व्यवस्था बंद कर सरकारी स्थायी वेतनमान वाले रोजगार का प्रबंध करे। तीसरा शिक्षकों–स्वास्थ्यकर्मियों समेत तमाम सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों रिक्त पदों पर जल्द से जल्द बहाली की जाए। चौथा सभी स्कूल–कॉलेजों–पुस्तकालयों–शिक्षण संस्थानों–छात्रावासों को अविलंब खोला जाए तथा ऑनलाइन शिक्षा को जबरन थोपना बंद किया जाए। पाँचवा आम छात्रों को शिक्षा से बेदखल करने वाली नई शिक्षा नीति 2020 अविलंब रद्द की जाए। छठा प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगे तथा सभी सरकारी अस्पतालों की लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक की जाए।

इसे विडम्बना ही कही जाएगी कि चालू बजट सत्र में राज्यपाल अभिभाषण के माध्यम से भाजपा–जदयू की नितीश कुमार सरकार ने बड़े ही ज़ोर शोर से ‘विकसित बिहार के 7 निश्चय’ का ढींढोरा पीटते हुए ऐलान किया है।

घटना स्थल पर यह भी देखा गया कि कई अधेड़ उम्र के पुलिस जवानों से मार्च में आए छात्र–युवाओं ने बैरिकेड हटाने की मांग करते हुए कहा कि आप तो नौकरी ले लिए हैं, अब हम लोगों को भी तो सरकार से नौकरी मांगने दीजिए...तो उन्होंने भी सफाई दी–हमारी ड्यूटी लगा दी गयी है, क्या करें! आज रोजगार और शिक्षा–स्वास्थय के सवाल पर बिहार प्रदेश के कोने-कोने से आए हुए छात्र–युवाओं के शांतिपूर्ण विधान सभा मार्च पर वाटर कैनन–आँसू गैस और पुलिस की लठियाँ–पत्थर चलने की घटना ने साफ दर्शा दिया है कि डबल इंजन की सरकार कितनी लोकतान्त्रिक है? साथ ही यह भी दिखा कि यदि विपक्ष के युवा विधायक भी छात्र–युवाओं के रोजगार–शिक्षा जैसे सवालों के लिए सड़कों पर आवाज़ उठाएंगे तो किसी भी लोकतान्त्रिक मर्यादा की परवाह नहीं की जाएगी।

Bihar
Student Protests
unemployment
Nitish Kumar
CPIM
bihar police
Police lathicharge
Police brutality

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया


बाकी खबरें

  • JANAZA
    ज़ाकिर अली त्यागी
    हरदोई: क़ब्रिस्तान को भगवान ट्रस्ट की जमीन बता नहीं दफ़नाने दिया शव, 26 घंटे बाद दूसरी जगह सुपुर्द-ए-खाक़!
    08 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश के हरदोई बीजेपी से जुड़े एक शख़्स ने शव को दफ़्न करने से रोक दिया, और क़ब्रिस्तान की ज़मीन पर अपना दावा ठोक दिया, हैरानी की बात यह रही कि कार्रवाई करने की बजाय प्रशासन भी उनकी ताल में…
  • अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड’ की सवर्ण जातियां भाजपा के समर्थन में हैंः सीपीआई नेता समर भंडारी
    एजाज़ अशरफ़
    अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड’ की सवर्ण जातियां भाजपा के समर्थन में हैंः सीपीआई नेता समर भंडारी
    08 Jan 2022
    यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि आखिर क्यों रक्षा कर्मी हिंदुत्व के समर्थन में हैं और पर्यावरण का मुद्दा इस पहाड़ी राज्य के लिए चुनावी मुद्दा नहीं है।
  • ECI
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    5 राज्यों में चुनाव तारीख़ों की घोषणा, यूपी में 7 चरणों में चुनाव, 10 मार्च को मतगणना
    08 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से लेकर 7 मार्च तक 7 चरणों में मतदान होगा, वहीं उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में 14 फरवरी को एक चरण में और मणिपुर में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। इसी के साथ 15 जनवरी तक रैली,…
  • रवि कौशल
    राजस्थान: REET अभ्यर्थियों को जयपुर में किया गया गिरफ़्तार, बड़े पैमाने पर हुए विरोध के बाद छोड़ा
    08 Jan 2022
    दरअसल यह लोग राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) के तहत अगले चरण में पदों को बढ़वाने के लिए 70 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं। इनकी मांग है कि सीटों की संख्या को बढ़ाकर 50,000 किया जाए।
  • सोनिया यादव
    यूपी: देश के सबसे बड़े राज्य के ‘स्मार्ट युवा’ सड़कों पर प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
    08 Jan 2022
    एक ओर रैलियों में बीजेपी की योगी सरकार अपनी उपलब्धियां गिनवा रही है तो वहीं दूसरी ओर चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश के युवाओं ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License