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आंदोलन
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राजनीति
कार्टून क्लिक : किसान आंदोलन के दबाव में दो मुद्दों पर मानी सरकार, अभी भी दो मुद्दे हैं बाक़ी 
सरकार के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के नेताओं के बीच पांच घंटे से अधिक समय तक चली सातवें दौर की वार्ता में किसानों की कुछ मांगों पर तो सरकार पीछे हटती दिखी लेकिन गतिरोध बरक़रार है, क्योंकि उनकी मुख्य मांगों पर कोई सहमति नहीं बन सकी है।
आज का कार्टून
31 Dec 2020
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दिल्ली : तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे किसानों की सरकार के साथ वार्ता बुधवार को पटरी पर लौटी और बिजली के शुल्क तथा पराली जलाने से संबंधित क़ानूनी प्रावधानों पर उनकी चिंताओं को दूर करने पर सहमति भी बनी, लेकिन नए क़ानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को क़ानूनी दायरे में लाने की उनकी मुख्य मांग पर कुछ फ़ैसला नहीं हो सका।

सरकार के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के नेताओं के बीच पांच घंटे से अधिक समय तक चली सातवें दौर की वार्ता में किसानों की कुछ मांगों पर तो सरकार पीछे हटती दिखी लेकिन गतिरोध बरक़रार है, क्योंकि उनकी मुख्य मांगों पर कोई सहमति नहीं बन सकी है।

अब चार जनवरी को फिर से सरकार और किसान संगठनों के बीच मुख्य मांगों पर आठवें दौर की चर्चा होगी। बहरहाल, यह तय हो गया कि इन विवादास्पद क़ानूनों पर आंदोलनरत किसानों की समस्याओं का समाधान अगले साल ही हो सकेगा।

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