NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कार्टून क्लिक: बधाई हो, बिहार में फ्री वैक्सीन और रोज़गार से पहले मिलेगा ‘लव जिहाद’ क़ानून?
भाजपा और एनडीए ने बिहार चुनाव में वादा तो कोरोना की फ्री वैक्सीन और 19 लाख रोज़गार का किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद सबसे पहले उसे याद आ रहा है ‘लव जिहाद’!
आज का कार्टून
21 Nov 2020
cartoon click

भाजपा और एनडीए ने बिहार चुनाव में वादा तो कोरोना की फ्री वैक्सीन और 19 लाख रोज़गार का किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद सबसे पहले उसे याद आ रहा है ‘लव जिहाद’!  केंद्रीय मंत्री और बिहार में भाजपा के बड़े नेता गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लव जिहाद के ख़िलाफ़ कानून बनाने की गुज़ारिश या कहें कि सिफ़ारिश की है।

आपको मालूम ही है कि इस समय एक बार फिर कोरोना संकट गहरा रहा है। देश आर्थिक मंदी में फंस रहा है। युवा नौकरी की मांग कर रहे हैं। महिलाएं बलात्कार के ख़िलाफ़ मोर्चा ले रही हैं, तब भारतीय जनता पार्टी को सब समस्याएं छोड़कर लव जिहाद की याद आ रही है। या कहें कि इस मुद्दे की याद ही इसलिए आ रही है जिससे बाक़ी ज़रूरी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके।  

यही वजह है कि भाजपा शासित मध्यप्रदेश में लव जिहाद को लेकर कानून का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसे जल्द लाने के लिए कटिबद्ध हैं। हरियाणा, कर्नाटक में भी इसकी चर्चा है। तो भाजपा बिहार कैसे छोड़ सकती है। हालांकि बिहार में भाजपा की सहयोगी और सरकार का नेतृत्व कर रही जेडीयू ने इससे सहमति नहीं जाहिर की है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि “हमारे नेता नीतीश कुमार सभी धर्मों और जातियों को साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं। कोई सरकार क्या फैसला ले रही है, यह उनका मामला है। उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने वाला कोई भी प्रस्ताव आएगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।” लेकिन वे ये बताना भूल गए कि उनके सहयोगी इसे समाज का सबसे ज़रूरी मुद्दा मान रहे हैं और ये भी मान रहे हैं कि आपके नेता यानी नीतीश कुमार सिर्फ़ सरकार के मुखिया हैं, उनकी बागडोर तो उनके यानी भाजपा के हाथ में है। 

cartoon click
Irfan ka cartoon
cartoon
Bihar
NDA Govt
BJP
love jihad

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    कड़ी कार्रवाई के बावजूद सूडान में सैन्य तख़्तापलट का विरोध जारी
    18 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ती हिंसा के बावजूद अमेरिका और उसके क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र भी बातचीत का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, सड़कों पर "कोई बातचीत नहीं, कोई समझौता…
  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License