NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान संकट: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते
राजस्थान में जारी सियासी संकट पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अगर असहमति को दबाया जाएगा तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Jul 2020
cartoon click

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर दोहराया, ‘लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते’ और राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष सी पी जोशी से बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने की वजह पूछी।

शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब विधानसभा अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अयोग्यता कार्यवाही शुरू करने की वजहें गिनाईं और कहा कि ये विधायक पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं हुये तथा उन्होंने अपनी ही सरकार को अस्थिर करने की साजिश की।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष की याचिका पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान इस पर यह टिप्पणी की और कहा, ‘ये इतना आसान मसला नहीं है और ये विधायक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाये नहीं जा सकते हैं।’ पीठ ने कहा, ‘हम यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या इस प्रक्रिया (अयोग्यता) की अनुमति है या नहीं।’

पीठ द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा, ‘ये विधायक हरियाणा चले गये, वहां एक होटल में ठहरे और टीवी चैनलों से कहा कि वे सदन में शक्तिपरीक्षण चाहते हैं।’

उन्होंने कहा कि न्यायालय इस समय इसका संज्ञान नहीं ले सकता कि क्या अयोग्यता की प्रक्रिया की अनुमति है या नहीं । उन्होंने कहा, ‘हमारी शिकायत पूरी तरह संवैधानिक है और अध्यक्ष का फैसला होने तक कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।’

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक अध्यक्ष से यह कहा जा सकता है कि वह एक समयसीमा के अंदर इसका फैसला करे, लेकिन इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और विधायकों की अयोग्यता या निलंबन के बारे में अध्यक्ष का निर्णय होने से पहले उसके समक्ष लंबित कार्यवाही को चुनौती नहीं दी सकती।

सुनवाई के दौरान पीठ ने सिब्बल से जानना चाहा कि क्या बैठकों में शामिल नहीं होने के कारण विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया जा सकता है और क्या इसे पार्टी के खिलाफ माना जा सकता है। पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब सिब्बल ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों को बैठकों में शामिल होने के लिये पार्टी के व्हिप प्रमुख ने नोटिस जारी किया था।

इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही जोशी की ओर से पीठ के समक्ष दलील दी गयी कि बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही करने से 24 जुलाई तक उन्हें रोकने का उच्च न्यायालय को कोई अधिकार नहीं है।

सिब्बल ने इस संबंध में 1992 के बहुचर्चित किहोतो होलोहान प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले का उल्लेख किया जिसमे कहा गया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष द्वारा की गयी अयोग्यता की कार्यवाही में अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय सिर्फ उसी स्थिति में हस्तक्षेप कर सकता है जब अध्यक्ष ने सदन के किसी सदस्य को अयोग्य या निलंबित करने का फैसला ले लिया हो।

सिब्बल ने यह जवाब उस समय दिया जब पीठ ने जानना चाहा कि अगर अध्यक्ष किसी सदस्य को निलंबित या अयोग्य घोषित करता है तो क्या न्यायालय इसमें हस्तक्षेप कर सकता है। विधान सभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने राजस्थान उच्च न्यायालय के 21 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कहा गया है कि 19 विधायकों की याचिका पर 24 जुलाई को फैसला सुनाया जायेगा और उसने अध्यक्ष से कहा कि तब तक के लिये अयोग्यता की कार्यवाही टाल दी जाये।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

cartoon click
cartoon
Irfan ka cartoon
Supreme Court
Rajasthan
democracy
Nationalism

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

कार्टून क्लिक: मैंने कोई (ऐसा) काम नहीं किया जिससे...


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License