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भारत
राजनीति
कार्टून क्लिक: भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ...
संसद में विपक्षी सांसद महंगाई, नफरत, बेरोजगारी, पत्रकारों पर बढ़ते हमले पर बात करने का निवेदन करते हैं लेकिन माननीय सभापति महोदय मुस्कुरा कर टालते जाते हैं।
आज का कार्टून
08 Apr 2022
cartoon

जनता के शायर दुष्यंत कुमार ने कभी कहा था कि

भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ

आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ

मगर अफ़सोस अब दिल्ली यानी देश की संसद में इस पर बात तक नहीं होती। देश में महंगाई, बेरोज़गारी, गरीबी की मार है। लेकिन संसद में इसबार भी इस पर कोई बहस या चर्चा नहीं हुई। इसकी वजह यही है कि देश में नफ़रत की बयार है, और सरकार को लगता है कि उसका काम जब जनता के मुद्दों पर ध्यान दिए बिना ही चल रहा है तो वो बेकार क्यों चिंता करे। संसद का काम जनता के मुद्दों पर बात करके कानून बनाना है लेकिन बिना लोगों की दुःख परेशानी पर बहस किये वहां केवल कानून बनाने के काम किया जा रहा है। और वो भी ऐसे कानून जो नागरिक अधिकारों पर ही कुठाराघात करते हैं।

संसद में विपक्षी सांसद महंगाई, नफरत, बेरोजगारी, पत्रकारों पर बढ़ते हमले पर बात करने का निवेदन करते हैं लेकिन माननीय सभापति महोदय मुस्कुरा कर टालते जाते हैं।

पिछले मानसून सत्र में लोकसभा में सरकार के मंत्री द्वारा पेश किए गए 15 बिल पर किसी भी दूसरे सांसद ने कोई राय नहीं रखी। और वह बिल संसद से पास होकर कानून में तब्दील हो गए। राज्यसभा में 20 बिलों में से केवल 2 बिल ऐसे थे, जिन पर 1 घंटे से अधिक की चर्चा हुई। यही हाल इस बार हुआ। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण गुरुवार, 7 अप्रैल को एक दिन पहले ही संपन्न हो गया। लोकसभा और राज्यसभा आज 8 अप्रैल तक चलनी थीं, लेकिन कल, दोनों सदनों को कार्यवाही शुरू होते ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License