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राजनीति
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव नतीजों का पंजाब विधानसभा चुनाव पर कितना असर?
पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी भले ही स्पष्ट बहुमत नहीं ले पाई, पर सब से अधिक सीटें जीतने के कारण वह अति उत्साहित है। आप के नेता इन नतीजों को पंजाब विधान सभा चुनाव की पहली सीढ़ी के तौर पर देख रहे हैं। 
शिव इंदर सिंह
03 Jan 2022
channi or kejriwal
Image courtesy : Hindustan

गत 28 दिसंबर को चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी 35 में से 14 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है। 2016 में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने वाली भाजपा को इस बार 12 सीटों से ही सब्र करना पड़ा, कांग्रेस को मात्र 8 सीट ही मिल पाईं और शिरोमणी अकाली दल के हिस्से 1 सीट ही आई। पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी भले ही स्पष्ट बहुमत नहीं ले पाई, पर सब से अधिक सीटें जीतने के कारण वह अति उत्साहित है। इन चुनावों में भाजपा के मौजूदा मेयर, उप-मेयर और पूर्व-मेयर को भी हार का मुंह देखना पड़ा, आप के नेता इन चुनाव नतीजों को पंजाब विधान सभा चुनाव की पहली सीढ़ी के तौर पर देख रहे हैं। 

आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ संयोजक प्रेम गर्ग का कहना है, “चंडीगढ़ के लोगों ने कुशासन को लेकर भाजपा को सबक सिखाया है। बीते पांच साल में भाजपा ने शहर के  बुनियादी ढांचे को बद से बदतर बना दिया है। चंडीगढ़ तो सिर्फ ट्रेलर है, पंजाब हमारा अगला लक्ष्य है।’

नतीजों के तुरंत बाद इसी तरह की टिप्पणीयाँ आप के बड़े नेता मनीष सिसोदिया, राघव चड्ढा और भगवंत मान कर चुके हैं। इस जीत से बागो- बाग़ हुए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चंडीगढ़ में आप की विजय रैली में कहा, “चंडीगढ़ वाली लहर अब पंजाब में चलेगी। यहाँ जो चमत्कार हुआ है इस जीत को देख कर लोग सोचने लगे हैं कि भाजपा और कांग्रेस को हराया जा सकता है।”

चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में भले ही ‘आप’ सबसे बड़ी पार्टी बन कर सामने आई है पर वोट प्रतिशत के हिसाब से तस्वीर बिलकुल उलट नज़र आती है। इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस को सब से ज़्यादा वोट हासिल हुए हैं। कांग्रेस को 29.98% वोट मिले हैं, भाजपा 29.03% वोट लेकर दूसरे स्थान पर रही और सबसे ज़्यादा सीट लेने वाली आम आदमी पार्टी 27.07% वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही है। जिससे यह साबित होता है कि ‘आप’ ने अपनी वोट मैनेजमेंट काफी बढ़िया कर रखी थी। कई सियासी विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनावों में कुछ हद तक किसान आंदोलन का असर भी रहा पर ज्यादातर स्थानीय मुद्दे ही हावी रहे हैं। भाजपा में मेयर पद को लेकर यहाँ पार्टी के अंदर भी खींचातनी चलती रही है। केंद्रशासित प्रदेश होने की वजह से चंडीगढ़ सीधे तौर पर भाजपा शासित केंद्र सरकार के नियन्त्रण में है। भाजपा की नेता किरण खेर 2014 से चंडीगढ़ से भाजपा सांसद हैं इसके बावजूद शहर में स्थानीय मुद्दों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। 

शहर के लोगों का भाजपा प्रशासन के प्रति रोष था कि चंडीगढ़ जिसे कि ‘सिटी ब्यूटीफुल’ माना जाता है अब प्रशासन की लापरवाही के कारण पहले जैसा खूबसूरत नहीं रहा। जहाँ बारिश के पानी की निकासी के बढ़िया प्रबंध के लिए शहर जाना जाता था अब मुख्य सड़कों पर भी पानी निकासी की समस्या आने लगी है और कई इलाकों में पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। गरीब कालोनियों और ग्रामीण इलाकों की तरफ तो बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया गया।

भाजपा ने इस चुनाव में धुआंधार प्रचार किया था। चुनाव प्रचार में कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की, कई केंद्रीय मंत्रियों, मनोहर लाल खट्टर जैसे कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी चुनाव प्रचार के लिए आये। आम आदमी पार्टी का चुनाव प्रचार इस चकाचौंध से दूर रहा। मतदान से दो दिन पहले केजरीवाल की एक रैली के अलावा पार्टी का अधिकतर प्रचार स्थानीय नेताओं ने ही किया। मुख्य ध्यान उन वॉर्डों की तरफ रहा था, जहां भाजपा का प्रदर्शन खराब था। इसके साथ ही प्रचार के लिए कॉलोनियों व गांवों में रहने वाली निम्न मध्यमवर्गीय आबादी को लक्ष्य बनाया गया। कई कांग्रेस नेताओं के आम आदमी पार्टी में शामिल हो जाने से भी पार्टी मजबूत हुई।

अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या इन चुनावों का असर आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा? बेशक चंडीगढ़ पंजाब के गांवों को उजाड़ के ही बना हो पर यहां रहने वाली आबादी जो पंजाब के अलावा हरियाणा, हिमाचल व अन्य राज्यों से आकर बसी हुई है उसके सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक स्वभाव को पंजाब से अलग माना जाता रहा है। चंडीगढ़ से निकलते ही और पंजाब में प्रवेश करते ही इस बात का एहसास होने लगता है।  

सीनियर पत्रकार और पंजाब की राजनीति को समझने वाले विशेषज्ञ जगतार सिंह का कहना है, "पंजाब का राजनैतिक वातावरण चंडीगढ़ से बिल्कुल अलग है। पंजाब में भाजपा कोई बड़ी ताकत नहीं है। आम आदमी पार्टी पंजाब में अभी तक सिर्फ मालवा क्षेत्र में ताकतवर है पर माझा क्षेत्र में उसका कोई आधार नहीं है। दोआबा क्षेत्र में भी कई सीटों पर उसको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। पंजाब और चंडीगढ़ की जनता के मुद्दे भी अलग हैं।"

लंबे समय से पंजाब और चंडीगढ़ की राजनीति से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार राजीव खन्ना का विचार है, "चंडीगढ़ के नतीजों को यदि हम ध्यान से देखेंतो पता चलता है कि भाजपा को जो सीटें हासिल हुई हैं वो शहर के पॉश इलाक़े हैं। मिडल क्लास और ग्रामीण क्षेत्र में ‘आप’ ने मेहनत कर सीटें जीती हैं। यह बात साबित करती है कि लोगों ने भाजपा के हिंदू- मुस्लिम या तथाकथित राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों की बजाय ज़िन्दगी के रोज़मर्रा से जुड़े मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, पानी, सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि बुनियादी मुद्दों को तरजीह देकर वोट किया है। मोदी सरकार के विकास के दावे खोखले साबित हुए हैं। अन्य राज्यों के विधान सभा चुनावों में भी लोगों के सरोकार से जुड़े मुद्दे एजेंडे पर आयेंगे। चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावी नतीजों का भले ही सीधे तौर पर पंजाब विधान सभा चुनाव पर असर न पड़े पर यह नतीजे आम आदमी पार्टी के पंजाब कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और लोगों में पार्टी की हवा बनाने का काम जरूर करेंगे।”

पंजाब में राजनीतिक स्थितियां अभी भी काफी अस्प्ष्ट बनी हुई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में इसमें और तेज़ी से बदलाव आयेंगे। पर `चंडीगढ़ जीत` से `आप` के कार्यकर्ताओं को काफ़ी ऊर्जा मिली है। यह आने वाला समय ही बतायेगा कि चंडीगढ़ की जीत पंजाब के आम लोगों को आम आदमी पार्टी की तरफ खींच पाएगी या नहीं। 

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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