NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छतरपुर: भेल्दा पंचायत में आवास, शौचालय तो दूर, पानी तक नसीब नहीं
पूरा इलाका पहाड़ी होने के कारण यहां लोगों के पास कृषि भूमि भी नहीं है। इनकी दिक्कतों की गूंज विधानसभा और संसद तक नहीं पहुंचती। इस तरह गांव के लोगों के पास पलायन के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं लेकिन इस कोरोना काल ने इन्हें हर तरह से मजबूर बना दिया।
रूबी सरकार
14 Oct 2020
Chhatarpu

मध्यप्रदेश में छतरपुर जिले से 90 किलोमीटर दूर भेल्दा पंचायत के रहवासी इन दिनों अपने गांव में विकास ढूंढ रहे हैं। चारों ओर वनों से अच्छादित इस पंचायत में अभी भी विकास नाम की रोशनी नहीं पहुंची है। महज ढाई हजार आबादी वाले इस पंचायत के लोगों के पास न तो पानी है, न बिजली, न सड़़क। यहां तक कि इनलोगों में से किसी को भी प्रधानमंत्री आवास और शौचालय का लाभ तक नहीं मिला है। पूरा इलाका पहाड़ी होने के कारण यहां लोगों के पास कृषि भूमि भी नहीं है। इनकी दिक्कतों की गूंज विधानसभा और संसद तक नहीं पहुंचती। इस तरह गांव में सर्वहारा बने रहने को मजबूर लोगों के पास पलायन के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

राशन तक नहीं मिला

कोविड-19 संक्रमण में जब इस पंचायत के लोग गांव वापस आये, तो इन्हें घर पर क्वारंटीन कर दिया गया। राशन कार्ड न होने के कारण इन्हें राशन नहीं मिला। जब कोरोना संक्रमण के दौरान  मध्यप्रदेश सरकार ने प्रवासी मजदूरों को आर्थिक सहायता पहुंचाने की योजना शुरू की और  सभी जिला कलेक्टरों को दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा, कि मजदूरों की जानकारी इकट्ठा कर उनके भोजन, दवा आदि के लिए तत्काल उनके खाते में एक हजार रूपये डाला जाये। इन्हें लगा, कि इस बार लोकतांत्रिक देश में रहने का उन्हें एहसास होगा, लेकिन यह आदेश भी इनके लिए खोखला साबित हुआ। यहां घर वापस लौटे परिवारों को एक हजार रूपये तो छोडि़ए राशन कार्ड न होने से पीडीएस का खाद्यान्न भी नहीं मिला। न ही यहां बाहर से लौटने वालों की स्वास्थ्य की जांच हुई। गांव का दौरा करने के बाद यह दावा किया जा सकता है, कि सरकार के सारे दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं।

श्रमदान भी काम न आया

मजदूर महिलाएं कब तक सरकार और ईश्वर पर भरोसा कर घर पर बैठी रहती, पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे बच्चों की प्यास बुझाने यहां की महिलाओं ने लॉकडाउन के समय का सदुपयोग करते हुए श्रमदान कर बरसात से पहले 107 मीटर तक पहाड़ की चट्टानों को खोदकर बारिश में बह जाने वाली पानी की धार को अपने गांव की तरफ मोड़ दिया। लेकिन यहां भी किस्मत ने इनका साथ नहीं दिया। इस बार बहुत कम बारिश होने के कारण तालाब ज्यादा नहीं भरा और अक्टूबर आते-आते यहां फिर से पानी की किल्लत होने लगी है। गांव के हैण्डपम्प और कुएं जो इस तालाब की वजह से रीचार्ज होने शुरू हुए थे, फिर से सूखने लगे।

Agrotha -2.jpg

सौ फीसदी पलायन

दरअसल बुंदेलखण्ड का छतरपुर जिला पलायन के लिए जाना जाता है और भेल्दा पंचायत में तो सौ फीसदी पलायन है। गांव की सबसे पढ़ी-लिखी लड़की बबीता राजपूत बताती हैं, कि सरकारी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए पलायन से लौटे लोगों को घर पर क्वारंटीन कर दिया गया। इस बीच न हमें राशन मिला और न हमारे पास पीने के लिए पानी था। भूखों मरने की स्थिति आ गई थी। तब पानी की संकट से गांव को मुक्त करने के लिए यहां की महिलाओं ने बैठक की। पहले कुछ महिलाएं आगे आईं, फिर देखते-देखते 7 गांव की लगभग 200 से अधिक महिलाओं ने इस श्रमदान में भाग लेकर ग्रामीण तकनीक से मात्र 30 दिनों में पानी के लिए एक नाला बना दिया। बबीता बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह रोज लगभग 24 किलोमीटर साइकिल चलाकर कॉलेज पढ़ने जाती हैं।

जॉब कार्ड तक नहीं बना

वहीं लक्ष्मीबाई सहौद्रा भेल्दा पंचायत के सचिव मनमोहन की शिकायत करते हुए कहती है, कि गांव वाले डेढ़़ किलोमीटर पैदल चलकर अपनी समस्या के साथ पंचायत पहुंचते हैं, लेकिन वे इनकी समस्या को अनसुना कर देते हैं। सहौद्रा बताती हैं, कि हमलोगों का जॉब कार्ड अभी तक नहीं बना है। जॉब कार्ड नहीं होगा, तो हमें गांव में काम भी नहीं मिलेगा। ऐसे में गांव के लोगों को पलायन करना पड़ेगा। यहां अभी तक किसी को  प्रधानमंत्री आवास नहीं मिला है, जबकि यहां अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के यहां लगभग 300 घर हैं, जो खपरैल के कमरे में पूरे परिवार के साथ रहते हैं।

विकास के नाम पर कुछ नहीं

किरण कहती है, कि पानी के लिए गर्मी में रात-रात भर हैण्डपम्प पर लाईन लगाते थे। कक्षा 11वीं की छात्रा रचना लोधी बताती हैं,  कि इस बार मात्र 10 फीसदी बारिश हुई है, जिसके चलते पूरे गांव में सूखा है। वह बताती है, कि विकास के नाम पर यहां कुछ भी नहीं हुआ है, न तो हमारे पास राशन कार्ड हैं और न हमें कोई सरकारी सुविधाएं मिलती है। यहां तक कि एक साल पहले सुझारा बांध से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पाइप लाइन बिछा दी गई, घरों में नल भी लगा दिये गये, लेकिन पानी का अभी तक अता-पता नहीं है। पूरे गांव में एक हैण्डपम्प में पानी आता है, जिसमें लड़कियां सुबह 4 बजे लाइन लगाती हैं, तो 8 बजे वह पानी भर पाती हैं। इस तरह अक्सर लड़कियों का स्कूल छूट जाता है।

यहां कुपोषित बच्चों का इलाज भी नहीं हो पाता। इलाज के लिए बच्चे को ग्वालियर ले जाना पड़ता है। गांव में अभी भी लगभग 20 बच्चे कुपोषित है, लेकिन एक भी बच्चा पोषण पुनर्वास केंद्र में नहीं गया है। उन्होंने कहा, कि 9 साल की प्रतीज्ञा का वजन मात्र 20 किलोग्राम है। कुछ दिन पहले उसके परिजनों ने ग्वालियर ले जाकर उसका इलाज करवाया था, लेकिन गरीबी के कारण बार-बार यह भी संभव नहीं हो पाता।

9वीं की छात्रा रानी बताती हैं, कि केवल 10 फीसदी लोग ही गांव में रहते है, बाकी सभी काम के लिए दिल्ली, राजस्थान पलायन करते हैं। वहां उन्हें निर्माण काम में 250 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिल जाती है। यहां सबके पास अपना खेत भी नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्ता धनीराम बताते हैं, कि जनपद पंचायत कार्यालय को कई बार जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास जैसी अनेक सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए सूची सौंपी गई। लेकिन उनकी तरफ से कभी कोई कार्यवाही नहीं हुई। इससे ऊपर हमारी पहुंच नहीं है। लिहाजा हमलोग बार-बार जनपद कार्यालय में हाजिरी लगाते हैं। हम चाहते हैं, कोई हो, जो हमारी बात शासन तक पहुंचाये।

 (रूबी सरकार स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

 

MP
Chhatarpur
water crises
Toilets
migration
jobloss

Related Stories

मध्य प्रदेश : खरगोन हिंसा के एक महीने बाद नीमच में दो समुदायों के बीच टकराव

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन

पंजाब विधानसभा चुनाव: आर्थिक मुद्दों की अनदेखी

प्रशासन की अनदेखी का खामियाज़ा भुगत रहे मरीज़़ : अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर्स, अब मरीज़ों का क्या होगा?

यूपी चुनाव: बुंदेलखंड से पलायन जारी, सरकारी नौकरियों का वादा अधूरा

कृषि संकट और नौकरी की कमी से बुंदेलखंड के लोग कर रहे हैं पलायन

ग्राउंड रिपोर्ट : किडनी और कैंसर जैसे रोगों का जरिया बनता बिहार का पानी


बाकी खबरें

  • parliament
    एम श्रीधर आचार्युलु
    भारतीय संसदीय लोकतंत्र का 'क़ानून' और 'व्यवस्था'
    03 Dec 2021
    बिना चर्चा या बहस के संसद से वॉकआउट, टॉक-आउट, व्यवधान और शासन ने 100 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों की आकांक्षाओं को चोट पहुंचाई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज दूसरे दिन भी एक्टिव मामले में हुई बढ़ोतरी  
    03 Dec 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 9,216 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश भर में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.29 फ़ीसदी यानी 99 हज़ार 976 हो गयी है।
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    संबित को पर्यटन विभाग का जिम्मा देने पर उठे सवाल
    02 Dec 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में वरिष्ठ अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा को कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा भारत पर्यटन विकास निगम का अध्यक्ष नियुक्त किए…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव से पहले उठ रहा मथुरा के मंदिर का मुद्दा, UN ने किया ख़ुर्रम परवेज़ का समर्थन और अन्य ख़बरें
    02 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी यूपी में घुल रहे सांप्रदायिक ज़हर, कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ का UN ने किया समर्थन और अन्य ख़बरों पर।
  • bihar protest
    अनिल अंशुमन
    बिहार : शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर उतरे राजधानी की सड़कों पर  
    02 Dec 2021
    शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए हैं। इनकी एक सूत्री मांग है कि सरकार नियुक्ति की तिथि बताए, वरना जारी रहेगा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License