NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़: 'साझा कम्युनिकेशन' के ज़रिये वनाधिकार क़ानून को कमज़ोर करने की कोशिश, किसान सभा ने जताया विरोध
किसान सभा ने इस कम्युनिकेशन को वापस लेने तथा वनाधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार इसके क्रियान्वयन के लिए पूर्व की तरह ही आदिवासी मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाने की मांग की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Jul 2021
छत्तीसगढ़: 'साझा कम्युनिकेशन' के ज़रिये वनाधिकार क़ानून को कमज़ोर करने की कोशिश, किसान सभा ने जताया विरोध

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने केंद्र की मोदी सरकार पर आदिवासी मंत्रालय तथा वन व पर्यावरण मंत्रालय के 'साझा कम्युनिकेशन' के जरिये आदिवासी वनाधिकार कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया है। किसान सभा ने इस कम्युनिकेशन को वापस लेने तथा वनाधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार इसके क्रियान्वयन के लिए पूर्व की तरह ही आदिवासी मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाने की मांग की है।

आज यहां जारी एक बयान में छग किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार वनाधिकार कानून को कमजोर व निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश का नतीजा हाल ही में आदिवासी और वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी 'साझा कम्युनिकेशन' है, जो पूरी तरह वनाधिकार कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है और आदिवासी मंत्रालय को शक्तिहीन बनाते हुए उसे वन व पर्यावरण मंत्रालय के मातहत करता है।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून में 'आदिवासियों के साथ जारी ऐतिहासिक अन्याय' के लिए वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया गया है और इस कानून को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी आदिवासी मंत्रालय को सौंपी है। इसके बावजूद यह कम्युनिकेशन सामुदायिक वन प्रबंधन में, गैर-इमारती वनोत्पादों के उपयोग में आदिवासी समुदायों की भागीदारी को सीमित करता है तथा नीति निर्धारण के क्षेत्र में वन मंत्रालय को महत्वपूर्ण स्थान देता है, जो पूरी तरह से वनाधिकार कानून की भावना के ही खिलाफ है।

किसान सभा नेताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून बनने के बाद भी वन मंत्रालय वनों पर अपने आधिपत्य को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। यही कारण है कि उसने वन अधिनियम में आदिवासी विरोधी संशोधनों को प्रस्तावित किया था, वनों को निजी हाथों में सौंपने की वकालत करती है तथा विकास के नाम पर आदिवासियों को विस्थापित करने की योजना बनाती है। अपने आदिवासी विरोधी रुख के कारण इस मंत्रालय ने कभी भी न तो वनाधिकार कानून का सम्मान किया और न ही आदिवासी समुदायों की स्वीकृति और सहमति प्राप्त करने की कोशिश की।

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने इस आदिवासी विरोधी 'साझा कम्युनिकेशन' वापस लेने, वनाधिकार कानून के सही क्रियान्वयन के लिए आदिवासी मंत्रालय को सशक्त बनाने तथा वन भूमि पर काबिज आदिवासियों व कमजोर वर्गों की बेदखली पर रोक लगाकर उन्हें व्यक्तिगत व सामुदायिक उपभोग के लिए अधिकार पत्र देने तथा पेसा कानून के अनुसार विकास कार्यों के लिए आदिवासी समुदायों की सहमति व स्वीकृति को अनिवार्य बनाने की मांग की है।

 


बाकी खबरें

  • उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा : क्या रहे जनता के मुद्दे?
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा : क्या रहे जनता के मुद्दे?
    09 Mar 2022
    उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा के चुनाव की चर्चा भले ही मीडिया में कम हुई हो, मगर चुनावी नतीजों का बड़ा असर यहाँ की जनता पर पड़ेगा।
  • Newschakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    Akhilesh Yadav का बड़ा आरोप ! BJP लोकतंत्र की चोरी कर रही है!
    09 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma बात कर रहे हैं चुनाव नतीजे के ठीक पहले Akhilesh Yadav द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस की।
  • विजय विनीत
    EVM मामले में वाराणसी के एडीएम नलिनीकांत सिंह सस्पेंड, 300 सपा कार्यकर्ताओं पर भी एफ़आईआर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले राज्य कई स्थानों पर ईवीएम को लेकर हुए हंगामे के बाद चुनाव आयोग ने वाराणसी के अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) नलिनी कांत सिंह को सस्पेंड कर दिया। इससे पहले बना
  • बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
    09 Mar 2022
    मौजूदा 17वीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 26 है। 2020 के चुनाव में 243 सीटों पर महज 26 महिलाएं जीतीं यानी सदन में महिलाओं का प्रतिशत महज 9.34 है।
  • सोनिया यादव
    उत्तराखंड : हिमालयन इंस्टीट्यूट के सैकड़ों मेडिकल छात्रों का भविष्य संकट में
    09 Mar 2022
    संस्थान ने एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे चौथे वर्ष के छात्रों से फ़ाइनल परीक्षा के ठीक पहले लाखों रुपये की फ़ीस जमा करने को कहा है, जिसके चलते इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License