NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छत्तीसगढ़: सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए चर्चित कवर्धा में अचानक हिंसा कैसे भड़क गई?
दो समूहों के बीच विवाद के बाद शुरू हुई हिंसक घटनाओं के चलते रविवार, 3 अक्टूबर की शाम से कवर्धा में कर्फ्यू लगा है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा ज़िले की सीमाओं को भी सील कर दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Oct 2021
Chhattisgarh
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

छत्तीसगढ़ का कबीरधाम ज़िला जो कवर्धा के नाम से भी चर्चित है, अपने सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए जाना जाता रहा है। इसी इलाक़े से कबीरपंथ के चार आचार्य भी हुए हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हिंसा की खबरों को लेकर सुर्खियों में है। दो समूहों के बीच विवाद के बाद शुरू हुई हिंसक घटनाओं को देखते हुए रविवार, 3 अक्टूबर की शाम से यहां कर्फ्यू लगा है। कवर्धा समेत आस-पास के तीन ज़िलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और ज़िले की सीमाओं को सील कर दिया गया है। इसके अलावा इस मामले में पुलिस ने अब तक 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और कई अन्य की तलाश जारी है। खबर है कि शहर में घुसने से रोकने पर पूर्व मंत्री सहित कई बीजेपी नेता बाहर धरने पर बैठ गए हैं।

बता दें कि विपक्ष जहां इस घटना का ठिकरा प्रशासन पर फोड़ रहा है तो वहीं सरकार इस मामले सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से पुलिस की तारीफ कर रही है। कबीरधाम, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का गृह ज़िला है, तो वहीं राज्य के वन मंत्री और प्रवक्ता मोहम्मद अकबर इसी इलाक़े से विधायक हैं।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक रविवार 3, अक्टूबर को कवर्धा के लोहारा नाका चौक पर कुछ युवकों ने एक “धार्मिक” झंडा लगा दिया था। इसे लेकर एक युवक की पिटाई भी कर दी गई थी। बाद में मामला दो गुटों की झड़प में तब्दील हो गया, जिसने हिंसक रूप ले लिया। दोनों गुटों की तरफ से जमकर पत्थरबाज़ी हुई।

वहीं, हालात पर क़ाबू पाने के लिए प्रशासन ने धारा 144 लगा दी। लेकिन लोगों का ग़ुस्सा शांत नहीं हुआ। मंगलवार 5 अक्टूबर को एक संगठन ने कवर्धा बंद का ऐलान किया। उसने घटना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए रैली निकाली। खबरों की मानें, तो रैली में बीजेपी सांसद सतीश पांडे ने भी शिरकत की थी। बाद में इसी प्रदर्शन में हिंसा हो गई। भीड़ ने दूसरे पक्ष के लोगों पर जमकर पथराव किया। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ भी की गई। स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।

पुलिस का क्या कहना है?

पुलिस के मुताबिक रविवार को लोहारा नाका चौक पर बिजली के खंबे पर एक झंडा लगाने और फिर उसे उतारने को लेकर दो पक्षों में जम कर मारपीट हुई। झंडा लगाने वाले युवक के साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद से विवाद बढ़ता चला गया।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार, 5 अक्तूबर को भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने कबीरधाम को बंद रखने की घोषणा की थी। हालांकि प्रशासन ने धारा 144 लागू किया था लेकिन भारी संख्या में पहुँची भीड़ ने एक बड़ी रैली निकाली। भीड़ की माँग थी कि इस विवाद में जिन लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन्हें गिरफ़्तार किया जाए।

पुलिस का दावा है कि कबीरधाम ज़िले में सुनियोजित तरीक़े से भीड़ को भड़काने की कोशिश की गई। बंद की रैली के लिए कई पड़ोसी ज़िलों से लोग मंगलवार को शहर पहुँचे थे और उन्होंने जगह-जगह तोड़फोड़ की और आगज़नी की।

पुलिस का ये भी दावा है कि हिंसक और बेक़ाबू भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया, इसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इधर मंगलवार की देर शाम, ज़िला प्रशासन ने उसी जगह पर फिर से झंडा लगा दिया, जिस जगह से विवाद शुरू हुआ था।

पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, “मंगलवार को एक दक्षिणपंथी संगठन ने एक विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारी दूसरे समुदाय वाले बहुल इलाक़े में गए और वहां हिंसक हो गए। हालात पर क़ाबू पाने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है। कुछ पुलिसकर्मियों सहित कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है।”

सरकार का क्या कहना है?

राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने मीडिया से कहा कि व्यवस्था को बनाए रखने के दृष्टिकोण से पुलिस बेहतर काम कर रही है। उन्होंने कबीरधाम की घटना पर कहा कि आज़ादी के बाद से आज तक छत्तीसगढ़ में सांप्रदायिक उन्माद की कोई घटना नहीं हुई है। गृहमंत्री ने कहा कि कबीरधाम की घटना को किसी सांप्रदायिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है।

ताम्रध्वज साहु ने आगे कहा, "हम ऐसा कोई काम नहीं करते, जिससे धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता बढ़े। हम लोग कोशिश करते हैं कि उसे किस तरीक़े से रोका जाए।"

विपक्ष क्या कह रहा है?

बीजेपी नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस घटना के लिए स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मीडिया को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि दो समुदायों के बीच एक मामूली मामले को हल करने में प्रशासन और पुलिस नाकाम रही, जिस वजह से हिंसा और झड़प हुई।

रमन सिंह ने आगे कहा है, "ढाई-ढाई साल के खेल में सरकार इतनी मशग़ूल है कि न उनसे क़ानून व्यवस्था संभल रही है और न ही विकास संभल रहा है। कवर्धा जैसी शांत जगह में अब ये इतनी बड़ी घटना हो जाती है कि लाठी चार्ज करना पड़ जाता है। सरकार को ध्यान देना चाहिए।"

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से छत्तीसगढ़ लगातार खबरों में बना हुआ है। कभी सियासी उठा-पठक को लेकर तो कभी घोटालों को लेकर। कभी सत्ताधारी पार्टी के अंदर ही फूट नज़र आती है, तो कभी विपक्ष सरकार को उसके ही दाव में फंसा देती है। कुल मिलाकर राज्य में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है, जो धीरे-धीरे बघेल सरकार की चिंताएं बढ़ा रही है।

Chhattisgarh
communal polarisation
Communalism
Kabir
riots
Internet Shutdown

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी


बाकी खबरें

  • बहरामपुर में सैनिटाइजेशन करते रेड वालंटियर्स। फ़ोटो: साभार: अनिर्बन
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: रेड वॉलंटियर्स को राज्य सरकार का नहीं, बल्कि सिविल सोसाइटी की तरफ़ से भारी समर्थन
    05 Jun 2021
    राज्य में कोविड प्रभावित लोगों की मदद को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने राज्य में रेड वॉलंटियर्स का समर्थन करना शुरू कर दिया है, ताकि ज़रूरतमंद लोगों तक ज़्यादा असरदार तरीक़े से पहुंचा जा सके।
  • वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'
    एम. के. भद्रकुमार
    वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'
    05 Jun 2021
    पश्चिमी दवा कंपनियों के खून चूसने और शिकारियों की तरह मानव रोग से अंधा मुनाफा कमाने की भयंकर प्रवृत्ति के बावजूद, हमारी सरकार ने अपने सारे अंडे एंग्लो-अमेरिकन टोकरी में डाल दिए हैं।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में फिर 3 हज़ार से ज़्यादा मरीज़ों की मौत
    05 Jun 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,20,529 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में अब तक 3 लाख 44 हज़ार 82 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
  • एक बूढ़े पेड़ की प्रार्थना  
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    एक बूढ़े पेड़ की प्रार्थना  
    05 Jun 2021
    “सुनो...बाढ़ की चेतावनी जारी हो चुकी है”। आज 5 जून, पर्यावरण दिवस पर विशेष
  • नोट छापने से बच सकती है इकॉनमी
    न्यूज़क्लिक टीम
    नोट छापने से बच सकती है इकॉनमी
    04 Jun 2021
    उदय कोटक से लेकर पी. चिदंबरम, सभी यह कह रहे हैं कि सरकार को नोट छपवाने के उसे बाजार में पहुँचाया जाए. ताकि लोगों के हाथ में पैसे आये और वह चीज़े ख़रीद सकें। पर इसका अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License