NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
बाल यौन शोषण प्रकरण: महिलाएं हों या बच्चे यूपी में कोई सुरक्षित नहीं!
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के साथ शारीरिक दुर्व्यहार के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों में सबसे आगे है। वहीं 2,023 केसों के साथ पूरे देश में चाइल्ड रेप के केसों के मामले में दूसरे नंबर पर है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Nov 2020
Child abuse protest
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए

एक सरकारी अधिकारी बीते 10 सालों से लगातार बच्चों का शोषण करता है। उनकी वीडियो और तस्वीरें पोर्न साइट्स को मोटी कीमतों पर बेचता है। लेकिन इसकी खबर न तो पुलिस प्रशासन को होती है और न ही राज्य में न्यूनतम अपराध का दावा करने वाली सरकार को। ये हाल देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश का है। जहां हाल ही में सीबीआई ने एक इंजीनियर को 50 से ज्यादा बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया है। सीबीआई अब इंजीनियर के बाकी लिंक्स को खंगाल रही है, उससे वीडियो खरीदने वाले ग्राहकों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

17 नवंबर को सीबीआई ने उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर रामभवन को बाल शोषण के आरोप में बांदा से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि बच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न पर नज़र रखने के लिए बनी एजेंसी की स्पेशल यूनिट कई दिन से जूनियर इंजीनियर पर नज़र रखे हुए थी।

खबरों के मुताबिक ये जूनियर इंजीनियर बीते 10 साल के दौरान पांच से 16 साल के करीब 50 बच्चों का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न कर चुका है। ये बच्चे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, बांदा और हमीरपुर ज़िलों के हैं।

अधिकारियों के मुताबिक गिरफ़्तार जेई बच्चों को चुप रखने के लिए उन्हें नकदी और मोबाइल फोन जैसे तोहफे देता था। इस तरह से वो अर्से तक क़ानून की पकड़ से बचा रहा।

सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौर ने मीडिया को बताया कि आरोपी के पास से करीब आठ लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेब कैमरा, पेन ड्राइव, मेमेरी कार्ड और कई सेक्स टॉय बरामद किए गए हैं।

सिर्फ़ भारतीय ही नहीं, कई विदेशी नागरिकों के भी संपर्क में था

कई मीडिया रिपोर्ट्स में सीबीआई सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जूनियर इंजीनियर पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल साइट्स पर बच्चों से दोस्ती करता था। इसके बाद बच्चों को मोबाइल, महंगी घड़ी, विदेशी चॉकलेट आदि का लालच देकर अपने पास बुलाता था। हरकत के वक्त ध्यान रखता था कि बच्चे किसी तरह का शोर न मचा पाएं। आरोपी ईमेल्स के जरिए सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि कई विदेशी नागरिकों के भी संपर्क में भी था और कई सालों से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो बेच रहा था।

बाल यौन-शोषण की कई शिकायतें सीबीआई को मिली

पिछले कुछ महीनों से बांदा, चित्रकूट और उसके आसपास के इलाकों से 10 से 15 साल के बच्चों के यौन-शोषण की कई शिकायतें सीबीआई के पास आई थीं। ये भी पता चला था कि यौन शोषण के साथ-साथ बच्चों के अश्लील वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री डार्कवेब के जरिए इंटरनेट पर अपलोड की गई थी।

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा होता है, जहां पॉर्न कंटेट के अलावा दूसरी गैरकानूनी गतिविधियां भी होती हैं। खास सॉफ्टवेयर के जरिए ही इसे एक्सेस किया जा सकता है। इलाके से यौन उत्पीड़न की कई शिकायतें मिलने के बाद CBI लंबे वक्त से इस शख्स पर नजर बनाए हुए थी।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक रामभवन की गिरफ्तारी के बाद सिंचाई विभाग ने उसे सस्पेंड कर दिया है।

चित्रकूट में सिंचाई विभाग के एग्ज़िक्युटिव इंजिनियर बीबी सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया, ''मुझे सीबीआई का एक लेटर मिला है। उसी के क्रम में मैं सस्पेंशन की रेकमंडेशन कर रहा हूं।''

हालांकि सीबीआई की तरफ से जानकारी दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है।

बाल शोषण की सबसे बड़ी तादाद भारत में

गौरतलब है कि दुनिया में यौन शोषण के शिकार हुए बच्चों की सबसे बड़ी संख्या भारत में है लेकिन फिर भी यहां इस बारे में बात करने में हिचक दिखती है। इस साल जनवरी में नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की ओर से जारी डेटा के मुताबिक हर रोज देश में औसतन 100 बच्चों का यौन शोषण किया जाता है। यह पिछले साल के मुकाबले 22 फीसदी ज्यादा है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के साथ शारीरिक दुर्व्यहार के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों में सबसे आगे है। उत्तर प्रदेश 2,023 केसों के साथ पूरे देश में चाइल्ड रेप के केसों के मामले में दूसरे नंबर पर है।

बाल अधिकारों की रक्षा के लिये ‘संयुक्त राष्ट्र का बाल अधिकार कन्वेंशन (CRC)’ एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जो सदस्य देशों को कानूनी रूप से बाल अधिकारों की रक्षा के लिये बाध्य करता है।

क़ानून अच्छा है लेकिन इसके अमल में भारी अंतर है!

इस संबंध में साल 2012 में भारत में बच्चों को यौन हिंसा से बचाने वाला क़ानून (पॉक्सो) बनाया गया ताकि बाल यौन शोषण के मामलों से निपटा जा सके। इसमें अपराधों को चिह्नित कर उनके लिये सख्त सजा निर्धारित की गई है। साथ ही त्वरित सुनवाई के लिये स्पेशल कोर्ट का भी प्रावधान है। लेकिन इसके तहत पहला मामला दर्ज होने में दो साल लग गए।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह क़ानून बहुत अच्छा बना है लेकिन इसके अमल और सज़ा दिलाने की दर में भारी अंतर है। इस पर केवल 2.4 प्रतिशत मामलों में ही अमल हुआ है। बाल यौन शोषण के अधिकतर मामलों में पॉक्सो लगाया ही नहीं गया।

वहीं क़ानूनी जानकार कहते हैं कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अक्सर पीड़ितों के अभियुक्त- जो हमेशा ही बच्चे को जानते हैं या उनके रिश्तेदार होते हैं- उन पर मुकर जाने का दबाव डालते हैं, इसलिए यह मामले अंजाम तक नहीं पहुंच पाते।

बाल शोषण या उत्पीड़न क्या है?

बच्चों के साथ शारीरिक, मानसिक, यौनिक अथवा भावनात्मक स्तर पर किया जाने वाला दुर्व्यवहार बाल दुर्व्यवहार कहलाता है। हालाँकि हम बाल दुर्व्यवहार में सामान्यतः यौनिक एवं शारीरिक शोषण को ही शोषण समझाते हैं, जबकि मानसिक तथा भावनात्मक स्तर पर होने वाला शोषण भी बच्चों के मानस पर दीर्घकालिक प्रभाव डालता है।

बाल यौन शोषण का दायरा केवल बलात्कार या गंभीर यौन आघात तक ही सिमटा नहीं है बल्कि बच्चों को इरादतन यौनिक कृत्य दिखाना, अनुचित कामुक बातें करना, गलत तरीके से छूना, जबरन यौन कृत्य के लिये मजबूर करना, भोलेपन का फायदा उठाने के लिये चॉकलेट, पैसे आदि का प्रलोभन देना चाइल्ड पोर्नोग्राफी बनाना आदि बाल यौन शोषण के अंतर्गत आते हैं।

UttarPradesh
crimes against women
exploitation of women
sexual crimes
sexual violence
Sexual Exploitation
CRIMES IN UP
UP police
Yogi Adityanath
Child Rape
child abuse
Girl child

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • women in politics
    तृप्ता नारंग
    पंजाब की सियासत में महिलाएं आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जगह बना रही हैं 
    31 Jan 2022
    जानकारों का मानना है कि अगर राजनीतिक दल महिला उम्मीदवारों को टिकट भी देते हैं, तो वे अपने परिवारों और समुदायों के समर्थन की कमी के कारण पीछे हट जाती हैं।
  • Indian Economy
    प्रभात पटनायक
    बजट की पूर्व-संध्या पर अर्थव्यवस्था की हालत
    31 Jan 2022
    इस समय ज़रूरत है, सरकार के ख़र्चे में बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी मेहनतकश जनता के हाथों में सरकार की ओर से हस्तांतरण के रूप में होनी चाहिए और सार्वजनिक शिक्षा व सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हस्तांतरणों से…
  • Collective Security
    जॉन पी. रुएहल
    यह वक्त रूसी सैन्य गठबंधन को गंभीरता से लेने का क्यों है?
    31 Jan 2022
    कज़ाकिस्तान में सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO) का हस्तक्षेप क्षेत्रीय और दुनिया भर में बहुराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बदलाव का प्रतीक है।
  • strike
    रौनक छाबड़ा
    समझिए: क्या है नई श्रम संहिता, जिसे लाने का विचार कर रही है सरकार, क्यों हो रहा है विरोध
    31 Jan 2022
    श्रम संहिताओं पर हालिया विमर्श यह साफ़ करता है कि केंद्र सरकार अपनी मूल स्थिति से पलायन कर चुकी है। लेकिन इस पलायन का मज़दूर संघों के लिए क्या मतलब है, आइए जानने की कोशिश करते हैं। हालांकि उन्होंने…
  • mexico
    तान्या वाधवा
    पत्रकारों की हो रही हत्याओंं को लेकर मेक्सिको में आक्रोश
    31 Jan 2022
    तीन पत्रकारों की हत्या के बाद भड़की हिंसा और अपराधियों को सज़ा देने की मांग करते हुए मेक्सिको के 65 शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License