NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
चीन और 14 अन्य देशों ने विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये
हालांकि, रीजनल कम्प्रीहेंसिव इकॉनोमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) का मज़दूर संघों, ट्रेड जस्टिस ग्रुप और महिलाओं के संगठनों ने पुरजोर विरोध किया है।
पीपल्स डिस्पैच
17 Nov 2020
चीन और 14 अन्य देशों ने विश्व के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये

एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने रविवार 15 नवंबर को दुनिया के सबसे बड़े ट्रेडिंग ब्लॉक के लिए हस्ताक्षर किया है। रीजनल कम्प्रीहेंसिव इकॉनोमिक पार्टरनशिप (आरसीईपी) एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) के 10 सदस्य देशों के बीच हस्ताक्षरित एक मुक्त व्यापार समझौता है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया भी शामिल है। ये समझौता वियतनाम द्वारा आयोजित एक वर्चुअल आसियान की बैठक में अपने एफटीए भागीदारों के साथ हस्ताक्षर किया गया जिसमें भारत शामिल नहीं है।

आरसीईपी को प्रभाव में आने के लिए प्रत्येक सदस्यों द्वारा मंजूरी देनी होगी। इस शिखर सम्मेलन के नेताओं को उम्मीद है कि ये मंजूरी की प्रक्रिया दो साल के भीतर पूरी हो जाएगी। एक बार पूर्ण प्रभाव में आने पर ये समझौता वैश्विक आबादी और वैश्विक जीडीपी के 30% के क़रीब को कवर करते हुए सबसे बड़े मुक्त व्यापार ब्लॉक के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। भारत जो आठ साल तक चली लंबी वार्ता का हिस्सा था वह घरेलू दबाव के कारण अंतिम रूप से वार्ता से एक साल पहले इस वार्ता से हट गया।

आरसीईपी को पहली बार आसियान शिखर सम्मेलन 2011 में प्रस्तावित किया गया था और आधिकारिक वार्ता 2012 में शुरू हुई थी। कम्प्रीहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रिमेंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) के स्थानांतरित करने की उम्मीद है जो पहले संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में था जो बाद में इससे निकाल गया।

इस समझौते के विस्तृत ब्यौरे को उसी दिन एक क्षेत्रीय ब्लॉक की स्थापना करने के उद्देश्य के साथ जारी किया गया जो व्यापार और प्रतिस्पर्धा पर "टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर" और "प्रतिबंध और भेदभावपूर्ण नियमों" को समाप्त करेगा। आरसीईपी व्यापार के सामानों के श्रोत के नियमों को मानकीकृत करने की भी मांग करेगा और विवादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निपटाने के लिए भी नियमों को बेहतर करने की मांग करेगा।

इस आरसीईपी समझौते को ट्रेड यूनियनिस्टों, हेल्थकेयर एक्टिविस्ट्स और ट्रेड जस्टिस समूहों की व्यापक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। एशिया पैसिफिक फोरम ऑन वूमेन, लॉ एंड डेवलपमेंट (एपीडब्ल्यूएलडी) द्वारा जारी एक बयान में महिला अधिकार समूहों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया है। इस बयान में कहा गया है कि आरसीईपी “जीवन रक्षक दवाओं के अधिक किफायती जेनेरिक प्रकार के उत्पादन को नज़रअंदाज़ करेगा, किसानों और बीज और खाद्य संप्रभुता के लिए स्थानीय लोगों के अधिकारों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, सार्वजनिक सेवाओं के लॉक-इन निजीकरण, श्रमिकों के वेतन को कम करने और बेहतर नौकरियों के निर्माण में बाधा डालेगा और जनहित में सुरक्षा और विनियमन के लिए आवश्यक औद्योगिक और राजकोषीय नीतियों को लागू करने के लिए सरकारों की क्षमता को सीमित करेगा।"

Asia Pacific Forum on Women Free Trade Agreements
Law and Development
Public Services International
RCEP
RCEP Negotiations
Regional Comprehensive economic partnership
Risa Hontiveros
Trade Justice Pilipinas

Related Stories

क्यों दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक साझेदारी यानी आरसीईपी में भारत शामिल नहीं हुआ?

आरसीईपी क्या है और एशिया-पैसिफ़िक की ट्रेड यूनियनें इसके बारे में चिंतित क्यों हैं?

आरसीईपी (RCEP) : ‘क़ीमतों में प्रतिस्पर्धा’ का तर्क ध्यान भटकाने वाला है 

व्हाट्सएप हैकिंग मामला, आरसीईपी विरोध प्रदर्शन और अन्य ख़बरें

एक ख़तरनाक समझौते पर हस्ताक्षर की तैयारी  

RCEP पर भारत की दुविधा : क्या इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता है?

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) से क्यों है डर?


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    कच्चे तेल की तलाश की संभावनाओं पर सरकार ने उचित ख़र्च किया है?
    08 Apr 2022
    कच्चे तेल को लेकर भारत की स्थिति क्या है? क्या वाक़ई ऐसा है कि कच्चा तेल निकालने से जुड़े वह सारे उपाय किये जा चुके हैं, जिसके बाद यह कहा जा सके कि भारत में कच्चे तेल उत्पादन को लेकर कोई बहुत बड़ी…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,109 नए मामले, 43 मरीज़ों की मौत
    08 Apr 2022
    देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 492 रह गयी है।
  • कुशल चौधरी, गोविंद शर्मा
    नोएडा की झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजना ख़त्म, अब भी अधर में लटका है ग़रीबों का भविष्य
    08 Apr 2022
    एक दशक तक ख़राब तरीक़े से लागू किये जाने के बाद झुग्गी पुनर्वास योजना ख़त्म हो गयी है। इस योजना के तहत नये बने फ्लैटों में से महज़ 10% फ़्लैट ही भर पाये हैं।
  • अब्दुल रहमान
    बुका हमले के बावजूद रशिया-यूक्रेन के बीच समझौते जारी
    08 Apr 2022
    रूस ने आरोप लगाया है कि पश्चिमी देशों और मीडिया ने जानबूझकर उन तथ्यों की अनदेखी की है जो बुचा हत्याओं में अपनी संलिप्तता से इनकार करते हैं क्योंकि उनका एकमात्र उद्देश्य शांति वार्ता में अब तक हुई…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मानवाधिकार के असल मुद्दों से क्यों बच रहे हैं अमित शाह?
    07 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं गृह मंत्री अमित शाह की जिसमे उन्होंने लोक सभा में मानवाधिकार की बात उठाई। अभिसार इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License