NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोयला नीलामी: सभी 42 कंपनियां की तरफ़ से मानदंडों का उल्लंघन, उचित परीक्षण की ज़रूरत
एनवायरोनिक्स ट्रस्ट और मिनरल इनहेरिटर्स राइट्स एसोसिएशन की तरफ़ से किये गये एक आकलन से पता चलता है कि एक भी कंपनी प्राकृतिक संसाधनों की बोली प्रक्रिया में अक्सर अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की तरफ़ से एक मानदंड के तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले फ़िट एंड प्रोपर पर्सन परीक्षण पर खरा नहीं उतरती है।
सुमेधा पाल
05 Nov 2020
कोयला नीलामी

पांच दशकों में पहली बार भारत के कोयला भंडार को निजी क्षेत्र के बोली लगाने वालों के लिए खोल दिया गया है। फ़िलहाल 38 कोयला ब्लॉकों की नीलामी चल रही है। चूंकि बड़े-बड़े कॉरपोरेट्स अपनी संपत्ति की सूची में कोयला भंडार को भी जोड़ने को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, ऐसे में बहुत से कार्यकर्ता और पर्यावरण विशेषज्ञ भारत के प्रमुख प्राकृतिक संसाधन के इस क़ीमती हिस्से को हासिल करने वालों की ज़रूरी पात्रता की तरफ़ ऊंगली उठाते हुए चेता रहे हैं।

एनजीओ, एनवायरोनिक्स ट्रस्ट और मिनरल इनहेरिटर्स राइट्स एसोसिएशन (MIRA)की तरफ़ से किये गये एक आकलन से पता चलता है कि एक भी कंपनी प्राकृतिक संसाधनों की बोली प्रक्रिया में अक्सर अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की तरफ़ से एक मानदंड के तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले फ़िट एंड प्रोपर पर्सन परीक्षण पर खरा नहीं उतरती है।  

कोयला ब्लॉकों की बोली प्रक्रिया और उसके बाद के आवंटन को लेकर बरते जाने वाली ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए शोधकर्ताओं ने नियामक निकायों, विश्वसनीय इंटरनेट स्रोतों, क़ानूनी निष्कर्षों और समाचार स्रोतों से हासिल रिपोर्ट के आधार पर सुबूत इकट्ठे किये हैं। इस अध्ययन का दावा है कि इसका मक़सद विभिन्न कोणों से कंपनियों की साख का मूल्यांकन करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राष्ट्रीय संपत्ति कहीं उस इकाई को तो नहीं सौंपी गयी है, जिसका रिकॉर्ड ख़राब हो।

इस बारे में कई सिविल सोसाइटी संगठनों के एक संगठन, MIRA के समन्वयक, सस्वती स्वेतलाना ने न्यूज़क्लिक से बताया, “पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए फ़िट पर्सन टेस्ट अहम है। इन कंपनियों की जवाबदेही वहन करने की क्षमता का आकलन करने और यह देखने के लिए कि क्या वे हमारे संसाधनों का इतना बड़ा हिस्सा सौंपे जाने के लायक हैं भी या नहीं, हमने अपने विश्लेषण में कई चीज़ों को शामिल करते हुए उनका वर्गीकरण किया है। इनमें उनका वित्तीय रिकॉर्ड, पर्यावरण के उल्लंघन पर उनका रुख़ और दूसरों के बीच प्रभावित समुदायों को लेकर ज़िम्मेदारी शामिल थी।”

हालांकि,उनका कहना है कि एक भी कंपनी इन मानकों पर खरा नहीं उतरी,अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा,“इस साल छह कंपनियों को शामिल किया गया था, जिनमें से पांच ने बोली लगाने की तारीख़ से तीन महीने से भी कम समय पहले ही अपना पंजीकरण करवाया था। (नीचे दी गयी तालिका देखें)। इसके अलावा, बोली लगाने वाली कुछ कंपनियों को अपने खनन के अनुभव को लेकर तक़रीबन कोई जानकारी नहीं है, जिससे ख़ास तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी पात्रता पर सवाल उठता है। आख़िर इन कंपनियों को किस आधार पर अनुमति दी जा सकती है ?”

उन कंपनियों की सूची जो खनन अनुभव के बारे में जानकारी प्रदान नहीं करती हैं:

पहले जब इन फ़र्मों की पात्रता के बारे में सवाल उठाये गये थे, तो उस समय केंद्र सरकार ने दावा किया था कि वह पूल के दायरे को व्यापक करने के लिहाज़ से कई तरह की कंपनियों को इसलिए शामिल कर रही है, ताकि कई लोगों को मौक़े दिये जा सके।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “आवंटन को लेकर हुए भारी घोटाले के बाद देश में नीलामी व्यवस्था लायी गयी थी। अदालत को लगा था कि नीलामी ज़्यादा से ज़्यादा क़ीमत पाने की सबसे अच्छी प्रक्रिया है। हालांकि, नीलामी की 10 किश्तें और प्रस्तावों को लेकर निरंतर चलते खींचतान और प्रतिभागियों,ख़ासकर जिनके पास खराब ट्रैक रिकॉर्ड है,उनकी सीमित संख्या सही मायने में किसी भी संस्था को नीलामी में भाग लेने की अनुमति देने से पहले एक विस्तृत फ़िट एंड प्रोपर पर्सन परीक्षण करने की ज़रूरत को दिखाती है।”

इतना ही नहीं,इस रिपोर्ट में आगे बताया गया है, “इसके अलावा, वे नीलामियां,जिनकी इस क्षेत्र के समुदायों के साथ सहमति नहीं बन पायी है, वे प्रशासनिक तीन-पांच के ज़रिये तीसरे पक्ष की ज़मीन में निहित स्वार्थ पैदा करते हुए संविधान के साथ समझौता कर रहे हैं। यह शुरुआती मूल्यांकन साफ़ तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार की तरफ़ से अगर कोई गंभीर विश्लेषण किया जाये,तो बोली लगाने वाले सही अर्थों में पात्रता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पायेंगे,और सरकार नागरिकों की इस संपत्ति के संरक्षक के रूप में ऐसा करने के लिए अपने कर्तव्यों से बंधी हुई भी है।”

शोधकर्ताओं ने इस बात की मांग की है कि खनन गतिविधि के लिए कंपनियों की क्षमता का आकलन करने की विधि में फ़िट एंड प्रोपर पर्सन परीक्षण को शामिल होना चाहिए, या फिर केंद्र या राज्य सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए इस प्रक्रिया को सतत विकास ढांचे (Sustainable Development Framework) के भीतर अंजाम दे सकती है, भले ही इसकी अपनी परिकल्पना की कुछ सीमायें ही क्यों न हों।

केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट सतत विकास ढांचा आठ प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है। इन सिद्धांतों में शामिल हैं-पट्टों पर किये जाने वाले फ़ैसलों में पर्यावरण और सामाजिक संवेदनशीलता को शामिल करना, प्रमुख खनन क्षेत्रों में आकलन और मज़बूत प्रबंधन प्रणालियों के ज़रिये खदान स्तर पर प्रबंधन प्रभावों का आकलन।। इसके अलावा, नैतिक कार्य-पद्धति और ज़िम्मेदाराना कामकाज, क्योंकि बोली लगाने वाली ज़्यादतर कंपनियों को इन मानदंडों का उल्लंघन करते पाया गया था।

इससे पहले भारत ने 2015 में कोयला खदानों के लिए प्रतिस्पर्धी नीलामी शुरू की थी। सरकार ने इस साल इन प्रतिबंधों को हटाने और वाणिज्यिक कोयला खनन की अनुमति देने के लिए इस क़ानून में संशोधन कर दिया,यानी कि नीलामी हासिल करने वाले फ़र्म अब घरेलू और वैश्विक स्तर पर कोयले का खनन बिना किसी प्रतिबंध के कर सकेंगे और बेच सकेंगे।

शुरुआत में केंद्र ने इस विषय पर चर्चा करने के लिए 80 कोयला ब्लॉकों की सूची के साथ एक दस्तावेज़ जारी किया था और संभावित बोली लगाने वालों से सुझाव मांगे थे कि किस ब्लॉक को प्राथमिकता दी जानी चाहिये। अंततः, बोली 41 ब्लॉकों से शुरू हुई, लेकिन राज्य सरकारों के विरोध और हस्तक्षेप के चलते कुछ ब्लॉकों को हटा दिया गया और कुछ नये ब्लॉक को शामिल कर लिया गया, इसके बाद नीलामी के लिए कुल 38 ब्लॉक रह गये हैं। अबतक जो नीलामी प्रक्रिया चली है, उसमें सिर्फ़ 21 ब्लॉक के लिए एक से ज़्यादा बोली लगायी जा सकी है। इन कंपनियों में से एक तो अपर्याप्त तकनीकी पात्रता की वजह से बाहर हो गयी है।

इस आलेख में जिस रिपोर्ट की चर्चा की गयी है,उसे यहां पढ़ा जा सकता है

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Coal Auction: Independent Analysis Reveals All 42 Companies Violate Norms, Suggests Proper Test

Coal Auction
Coal mining
coal reserves
Environment India
Narendra modi
Coal Blocks
Privatisation of Coal Mining
Modi government
disinvestment

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    सीएम योगी अपने कार्यकाल में हुई हिंसा की घटनाओं को भूल गए!
    05 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में एक बार फिर कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य में दंगा और पलायन कराया है। लेकिन वे अपने कार्यकाल में हुए हिंसा को भूल जाते हैं।
  • Goa election
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनाव: राज्य में क्या है खनन का मुद्दा और ये क्यों महत्वपूर्ण है?
    05 Feb 2022
    गोवा में खनन एक प्रमुख मुद्दा है। सभी पार्टियां कह रही हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो माइनिंग शुरु कराएंगे। लेकिन कैसे कराएंगे, इसका ब्लू प्रिंट किसी के पास नहीं है। क्योंकि, खनन सुप्रीम कोर्ट के…
  • ajay mishra teni
    भाषा
    लखीमपुर घटना में मारे गए किसान के बेटे ने टेनी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा जताया
    05 Feb 2022
    जगदीप सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर खीरी की धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे 2024 के लोकसभा…
  • up elections
    भाषा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहला चरण: 15 निरक्षर, 125 उम्मीदवार आठवीं तक पढ़े
    05 Feb 2022
    239 उम्मीदवारों (39 प्रतिशत) ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा पांच और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 304 उम्मीदवारों (49 प्रतिशत) ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    "चुनाव से पहले की अंदरूनी लड़ाई से कांग्रेस को नुकसान" - राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह
    05 Feb 2022
    पंजाब में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करना राहुल गाँधी का गलत राजनीतिक निर्णय था। न्यूज़क्लिक के साथ एक खास बातचीत में राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह ने कहा कि अब तक जो मुकाबला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License