NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
कोराना संक्रमण: तीन दिन में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी और लॉकडाउन की मियाद
भारत में लॉकडाउन की आधी मियाद ख़त्म हो चुकी है। कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 2800 के पार पहुंच रही है। अब तक कोरोना वायरस से 68 मौतें भी हो चुकी हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Apr 2020
coronavirus
Image courtesy: IndiaToday

दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के ही मुताबिक चार अप्रैल को इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 2800 के पार पहुंच गई है। इनमें 2650 एक्टिव केस हैं, जबकि कुल 183 ठीक हुए हैं। अब तक कोरोना वायरस से 68  मौतें भी हो चुकी हैं। ज्यादा चिंता की बात यह है कि बीते तीन दिनों में संक्रमित लोगों का आंकड़ा लगभग दोगुना हो गया है।

गौरतलब है कि भारत इस बीमारी से अपने तरीके से लड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हमारी कोशिशों की तारीफ की है। कोविड-19 को लेकर उसके विशेष प्रतिनिधि डॉ. डेविड नवारो ने यहां लॉकडाउन को सही समय पर उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि अमेरिका और ज्यादातर यूरोपीय देशों की सरकारें काफी समय तक टालमटोल करती रहीं लेकिन भारत में इस पर तेजी से काम हुआ।

IMG-20200404-WA0021.jpg

बहरहाल, सिर्फ इस तारीफ से हमारा भला नहीं होने वाला है। इस लॉकडाउन के साइड इफेक्ट भी हमारे सामने हैं। बिना प्लानिंग के किए गए इस लॉकडाउन के चलते लाखों मजदूरों का पलायन भी हमने देखा है। इसी तरह, छोटे-मझोले कारोबार और निजी क्षेत्र के अन्य उपक्रमों में कार्यरत छोटे कर्मियों-मजदूरों पर देशव्यापी लॉकडाउन के द्वारा पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का भी पूर्व आकलन नहीं किया गया।

साथ ही पूरे देश में हमारे डॉक्टरों, नर्सों और बाकी मेडिकल स्टाफ के पास सुरक्षा के जरूरी उपकरण नहीं हैं। उन्हें अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। अस्पतालों में आईसीयू बेड, वेंटिलेटर, मास्क और पीपीई की अन्य जरूरी चीजों की भारी कमी है।

IMG-20200404-WA0020.jpg

कहीं मकान मालिक उन्हें घर से निकाल रहे हैं तो कहीं जांच को लेकर उन पर हमले हो रहे हैं। यही नहीं, जब वे अपने लिए सुरक्षा उपकरणों और अन्य सुविधाओं की मांग करते हैं तो प्रशासन की ओर से उन्हें कार्रवाई की धमकी भी मिल रही है।

हमें यह याद रखना होगा कि ये स्वास्थ्यकर्मी ही कोरोना से लड़ने वाले असली योद्धा हैं। इस महामारी से हमारी लड़ाई का अंतिम नतीजा उनके मनोबल और कौशल से ही निकलेगा। हालात इसलिए भी चिंताजनक हैं कि देश में सामान्य परिस्थितियों में भी काम करने के लिए डॉक्टरों और नर्सों की कमी हैं। महामारी के इस दौर में स्वाभाविक रूप से हमें उनकी ज्यादा जरूरत है।

IMG-20200404-WA0022.jpg

आपको बता दें कि पिछले दिनों अमेरिका के ‘सेंटर फॉर डिजीज डाइनामिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी’ द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में लगभग छह लाख डॉक्टरों और 20 लाख नर्सों की कमी है। भारत में 10,189 लोगों पर एक सरकारी डॉक्टर है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर की सिफारिश की है। इसी तरह हमारे देश में 483 लोगों पर एक नर्स है।

असल में हम सिर्फ लॉकडाउन से ही इस बीमारी से नहीं लड़ सकते हैं। लॉकडाउन से हमने बीमारी फैलने की रफ्तार घटा दी है लेकिन बात सिर्फ इसी से नहीं बनने वाली। हमें और तरीके भी अपनाने होंगे। पिछले तीन दिनों से जिस तेजी से वायरस का प्रसार हुआ है। वह एक गंभीर चेतावनी दे रहा है।

ऐसे में इस वायरस से निपटने की जिम्मेदारी अब हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर है। सरकार को इस लॉकडाउन के दौर में अपनी स्वास्थ्य सेवा-संरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर ठीक करने की जरूरत है। इसमें किसी को संदेह नहीं है कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हालात में है।

गौरतलब है कि इस देश में गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए अस्पतालों में स्ट्रेचर जैसी मूलभूत सुविधाएं न मिल पाने और गरीब मरीज के शव को घर पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं करा पाने की खबरें सुर्खियां बन चुकी हैं। ऐसी स्थिति में यदि देश में कोरोना वायरस का संक्रमण बेलगाम होता है तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। चीन, ब्राजील और श्रीलंका जैसे देश भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमसे ज्यादा खर्च करते हैं। इसी कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। इसी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का खामियाजा पूरे देश को उठाना पड़ रहा है।

हालांकि यह भी संभव है कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में हमारे नेताओं और योजनाकारों की मंशा अच्छी होगी लेकिन जमीनी स्तर के कामों, नीतियों और फैसलों में वह नजर नहीं आ रही है। सरकार ने देश में जन-स्वास्थ्य संरचना की भारी किल्लत के मद्देनजर स्वास्थ्य-संरचना निर्माण आदि के लिए 15 हजार करोड़ की घोषणा की है लेकिन जानकार बताते हैं कि यह नाकाफी है।

अंत में लॉकडाउन की आधी मियाद के खत्म होने के बाद यही समझ आ रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश के अनुरूप टेस्टिंग ही इस बीमारी से निपटने का विकल्प हो सकता है। दुनिया के कई देशों ने यही रास्ता अख्तियार किया है और कोरोना से निपटने में सफलता हासिल की है।

दक्षिण कोरिया ने देश में ज्यादा से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग की है। जर्मनी में तो हर व्यक्ति का कोरोना टेस्ट हो रहा है। हमें भी देर सबेर यही रास्ता पकड़ना होगा। भारत में टेस्ट की स्पीड बढ़ी है लेकिन अब भी जो हाल है वह संतोषजनक भी नहीं है। ऐसे में डर इस बात का है कि हमारी 130 करोड़ आबादी में कुछ हजार लोग लॉकडाउन में रहते हुए भी अनजाने में वायरस न फैला रहे हों।

फिलहाल यह संक्रमण कोई सीमा नहीं जानता, न देशों की, न प्रदेशों की। यह लड़ाई पूरे मानव समुदाय को मिलकर लड़नी है। फिलहाल बड़ी जरूरत यह है कि हम अपने देश के स्तर पर तो मिलकर इसका मुकाबला करें और इसे सांप्रदायिक रंग देने से बचे रहें। 

Coronavirus
novel coronavirus
Corona Crisis
Corona cases
India Lockdown
Coronavirus lockdown
health care facilities

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • ganguli and kohli
    लेस्ली ज़ेवियर
    कोहली बनाम गांगुली: दक्षिण अफ्रीका के जोख़िम भरे दौरे के पहले बीसीसीआई के लिए अनुकूल भटकाव
    19 Dec 2021
    दक्षिण अफ्रीका जाने के ठीक पहले सौरव गांगुली बनाम विराट कोहली की टसल हमारी टीवी पर तैर रही है। यह टसल जितनी वास्तविक है, यह इस तथ्य पर पर्दा डालने के लिए भी मुफ़ीद है कि भारतीय टीम ऐसे देश का दौरा कर…
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License