NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोरोना संकट : क्या ‘आरोग्य सेतु ऐप’ आपको सुरक्षित करता है?
इस महामारी से बचने के लिए दुनिया के कई देश साइबर तकनीक का सहारा ले रहे हैं। लेकिन दुनियाभर के साइबर एक्सपर्ट इसे लोगों की निजता के लिए ख़तरा और डिजिटल स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं।
सोनिया यादव
04 Apr 2020
आरोग्य सेतु ऐप

कोरोना का कहर देश में दिन- प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अब सरकार सख्त से सख्त कदम उठाने की बातें कर रही है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत सरकार ने कोरोना से बचने के लिए एक नया ऐप 'आरोग्य सेतु' लॉन्च किया है। इस ऐप के जरिए सरकार कोरोना संक्रमित लोगों के मूवमेंट पर नज़र रखेगी, साथ ही इसकी मदद से कोई भी आसपास कोरोना के मरीज़ों की जानकारी भी हासिल कर सकता है। ऐप को लेकर सरकार का दावा है कि इसे यूजर्स की निजता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। लेकिन साइबर जानकार इसे बिना किसी कानून के दायरे में लाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं, डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

क्या है इस ऐप में?

आरोग्य सेतु ऐप को गुरुवार, 2 अप्रैल को लॉन्च किया गया। इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाना है। जिस व्यक्ति के फ़ोन में ये ऐप होगा वो दूसरों के संपर्क में कितना रहे हैं, यह पता लगाने के लिए ब्लूटूथ तकनीक, एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस ऐप को कोई भी एंड्रॉयड गूगल प्ले स्टोर और आईओएस स्टोर से डाउनलोड कर सकता है। अगर आपके फ़ोन में ये ऐप इंस्टॉल है तो ये अपने आस-पास के उन लोगों को भी खोज लेगा जो आपके आसपास रहते हैं और उनके फ़ोन में भी ये ऐप है। ये ऐप बताएगा कि आपके आसपास रहने वाला कोई भी व्यक्ति अगर कोरोना वायरस से संक्रमित है तो आपको कितना ख़तरा है और जीपीएस लोकेशन की मदद से वो यह भी पता लगाएगा कि आप कब उनके संपर्क में आए हैं।

ऐप की मदद से सरकार आइसोलेशन और वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए ज़रूरी कदम भी वक़्त रहते उठा पाएगी। ये ऐप हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 11 भाषाओं में उपलब्ध है। सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि ऐप में नाम, मोबाइल नंबर, जेंडर, पेशा, ट्रैवेल हिस्ट्री और आप धूम्रपान करते हैं या नहीं, ये ब्योरा पूछा जाएगा। ऐप में मौजूद आपकी निजी जानकारी और डेटा का इस्तेमाल भारत सरकार करेगी ताकि कोरोना से संबंधित डेटाबेस तैयार किया जा सके और वायरस संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

सभी जानकारी क्लाउड में अपलोड की जाएगी और इसके जरिए आपको लगातार कोरोना वायरस से संबंधित सूचनाएं भी दी जाएंगी। मोबाइल नंबर पर सरकार की ओर से मैसेज और दूसरे माध्यमों से जानकारी दी जाती रहेगी।

किसी भी तरह की जानकारी का इस्तेमाल कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के अलावा किसी अन्य वजह से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अगर आप ऐप डिलीट करते हैं तो 30 दिनों के भीतर आपका डेटा क्लाउड से हटा दिया जाएगा।

राज्य सरकारों की पहल

राज्य सरकारें टेलिकॉम कंपनियों की मदद से कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की लोकेशन और कॉल हिस्ट्री के जरिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का काम कर रही हैं। इसके अलावा पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक और गोवा की सरकारों ने ऐसे मोबाइल ऐप शुरू किए हैं तो वहीं आंध्र प्रदेश सरकार कोरोना एलर्ट ट्रेसिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर संक्रमित लोगों के मोबाइल नंबरों के आधार पर डेटाबेस निकाल कर इनके संपर्क में आने वालों की तलाश कर रही है।

हिमाचल सरकार कोरोना मुक्त हिमाचल ऐप लॉन्च करने की तैयारी में है। राज्य प्रशासन तकनीक के सहारे कोरोना संक्रमित लोगों और होम क्वारंटीन पर रखे गए लोगों पर नज़र भी रख रहा है।

साइबर जानकारों की चिंता

सरकार इस ऐप के डेटा को लेकर भले ही दावा कर रही हो कि ये किसी थर्ड पार्टी के हाथ में नहीं जाएगा। लेकिन विशेषज्ञों की चिंता है कि इस कदम से लोगों के निजता के अधिकार का हनन होगा। साथ ही लोगों की जानकारी कब तक और कैसे इस्तेमाल होगी इसकी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।  

साइबर क़ानून एक्सपर्ट अमित श्रीवास्तव ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, “कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे को रोकने के लिए सरकार फिलहाल इसे एक जरूरी कदम बता सकती है लेकिन क्या सरकार ऐसी कोई गारंटी भी दे सकती है कि हालात सुधरने के बाद इस डेटा को नष्ट कर दिया जाएगा, इसका ग़लत इस्तेमाल नहीं होगा। पूरी दुनिया में इस महामारी के आधार पर सरकारें लोगों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहीं हैं और लोग ये नहीं समझ रहे हैं कि ये महामारी सिर्फ़ इंसानों को ख़त्म नहीं करेगी, बल्कि उनकी निजता को भी खत्म कर देगी। जब हालात सामान्य होंगे तो लोगों को पता चलेगा कि उनकी जानकारियों का दुरुपयोग हो रहा है।"

इंटरनेट फ्रीडम फ़ाउंडेशन के आलोक गुप्ता बताते हैं, “सरकार जो डेटा ले रही है वो बिना किसी क़ानूनी दायरे के ले रही है ऐसे में इसका इस्तेमाल वो कैसे करती है और कब तक करती है किसी को नहीं पता। हमारे सामने आधार कार्ड का उदाहरण है जिसमें डेटा लीक का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। जिस तरह आधार नंबर एक सर्विलांस सिस्टम बन गया है और उसे हर चीज़ से जोड़ा जा रहा है वैसे ही कोरोना वायरस से जुड़े एप्लिकेशन में लोगों का डेटा लिया जा रहा है, उनका हेल्थ डेटा और निजी जानकारियां भी शामिल हैं वो सरकार किस तरह और कब तक इस्तेमाल करती है इसकी कोई गारंटी नहीं है।”

सामाजिक कार्यकर्ता ऋचा सिंह के अनुसार इस तरह इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के ज़रिए इकट्ठा किया जा रहा डेटा निजता के अधिकार का हनन है साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन भी है जिसमें निजता के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बताया गया है। अभी इस महामारी को देखते हुए सरकार कह सकती है कि ट्रेसिंग जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जा रहा है लेकिन क्या सरकार इसके डेटा का भी ध्यान रख रही है? आगे चलकर अगर किसी भी तरह से इसका गलत इस्तेमाल हुआ, तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा?"

गौरतलब है कि इस महामारी से बचने के लिए दुनिया के कई देश साइबर तकनीक का सहारा ले रहे हैं। इजराइल सरकार ने रातोंरात डेटा ट्रेसिंग के लिए अस्थाई कानून पास कर दिया तो वहीं चीन, दक्षिण कोरिया, अमरीका, सिंगापुर, हाँगकाँग की सरकारें भी इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं लेकिन दुनियाभर के साइबर एक्सपर्ट इसे लोगों की निजता का हनन बता रहे हैं, डिजिटल स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं।

Coronavirus
novel coronavirus
Corona Crisis
Coronavirus Epidemic
Aarogya Setu App
Ministry of Electronics and Information Technology
Public-private partnership

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • srilanka
    न्यूज़क्लिक टीम
    श्रीलंका: निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बर्बादी और तानाशाही से निजात पाने का संघर्ष
    10 May 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने श्रीलंका में तानाशाह राजपक्षे सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन पर बात की श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. शिवाप्रगासम और न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया
    10 May 2022
    गाँव के बाहरी हिस्से में रहने वाले इसी मुस्लिम परिवार के घर हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा में आगज़नी हुई थी। परिवार का कहना है कि हिन्दू पक्ष के लोग घर से सामने से निकलते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते…
  • असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
    10 May 2022
    एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और…
  • अजय कुमार
    मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर
    10 May 2022
    साल 2013 में डॉलर के मुक़ाबले रूपये गिरकर 68 रूपये प्रति डॉलर हो गया था। भाजपा की तरफ से बयान आया कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया तभी मज़बूत होगा जब देश में मज़बूत नेता आएगा।
  • अनीस ज़रगर
    श्रीनगर के बाहरी इलाक़ों में शराब की दुकान खुलने का व्यापक विरोध
    10 May 2022
    राजनीतिक पार्टियों ने इस क़दम को “पर्यटन की आड़ में" और "नुकसान पहुँचाने वाला" क़दम बताया है। इसे बंद करने की मांग की जा रही है क्योंकि दुकान ऐसे इलाक़े में जहाँ पर्यटन की कोई जगह नहीं है बल्कि एक स्कूल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License