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कोरोना इफेक्ट : पड़ोसियों के व्यवहार से दुखी, लगाया बोर्ड - ‘‘घर बिकाऊ है’’
मध्यप्रदेश के शिवपुरी में कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर लौटे व्यक्ति के साथ पड़ोसियों का व्यवहार इतना खराब है कि वह अपना घर बेचकर शहर छोड़ना चाहता है।
राजु कुमार
14 Apr 2020
कोरोना इफेक्ट

कोरोना से जंग जीत लेने के बाद भी व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाए, ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। कोरोना को मात देने के लिए रात-दिन काम कर रहे डॉक्टर्स और अन्य लोगों के साथ भेदभाव की घटनाएं लगातार आ रही हैं, लेकिन अब कोरोना को मात देकर घर लौटे व्यक्ति के साथ भी बहिष्कार का मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश के शिवपुरी निवासी दीपक शर्मा कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर घर लौट आए, लेकिन पड़ोसियों ने उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया, जिससे आहत होकर उन्होंने घर बेचकर दूसरे शहर में बसने का इरादा कर लिया। उन्होंने बकायदा घर के आगे बोर्ड लगा दिया है - ‘‘यह घर बिकाऊ है’’

शिवपुरी के दीपक शर्मा पेट्रोलियम इंजीनियर हैं। वे 18 मार्च को दुबई से शिवपुरी लौटे थे। कोरोना के लक्षण दिखने के बाद उन्हें शिवपुरी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद वे कोरोना पॉजिटिव निकले। इसके बाद 24 से 31 मार्च तक शिवपुरी में कर्फ्यू लगा दिया गया था। कोरोना पॉजिटिव का पता चलते ही इनके परिवार के साथ पड़ोसियों का बर्ताव बदल गया और वे ख़ौफ़ के कारण इनके परिवार से दूरी बनाने लगे। इलाज के बाद युवक की दूसरी और तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद इन्हें स्वस्थ बताकर 4 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और घर पर ही 14 अप्रैल तक क्वारंटाइन में रहने के कहा गया। जब वे ठीक होकर घर लौट आए, तो पड़ोसियों ने उनके साथ सौहार्दपूर्ण बर्ताव करने के बजाय दूरी बना ली।

दीपक शर्मा का कहना है कि उन्होंने कोरोना पर विजय पा ली, लेकिन पड़ोसियों के व्यवहार ने उनके मनोबल को तोड़ दिया। उसके परिवार को देखते ही पड़ोसी दरवाजा बंद कर लेते हैं। मोहल्ले के लोग परेशान कर रहे हैं। पड़ोसी को शुभचिंतक होना चाहिए, लेकिन कई लोगों का व्यवहार खराब है। एक पड़ोसी ने तो दूध वाले और सब्जी वाले को घर में समान देने से मना किया और उन लोगों से कहा कि दीपक के घर समान देने से वायरस पकड़ लेगा। जिस रास्ते से मां जाती है, उस रास्ते पर दूसरे को जाने से मना करते हैं, और कहते हैं कि उनके जहां कदम पड़े, वहां से वायरस पकड़ लेगा। दीपक के बुजुर्ग पिता कहते हैं कि पड़ोसी रात को दरवाजा पीटते हैं, जिससे कि वे परेशान होकर परिवार सहित कहीं और चले जाएं।

आत्मग्लानि से घिरे परिवार का कहना है कि कोरोना किसी को भी हो सकता है, इसलिए किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए। उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। लेकिन कई लोग अछूतों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। दीपक शर्मा का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर वह फिर काम पर दुबई लौट जाएंगे, लेकिन पड़ोसियों के इस व्यवहार के बीच उसके बुजुर्ग माता-पिता कैसे रह पाएंगे? इसलिए उनकी इच्छा है कि वे घर बेचकर दूसरी जगह शिफ्ट हो जाएं।

शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक जाहिद खान का कहना है, ‘‘यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि ऐसी घटनाएं सामने आ रही है। आम व्यक्ति इससे सुरक्षित रहने के बजाय डर में जीने लगा है। यदि क्वारंटाइन का बोर्ड किसी के घर में लग जाए, तो उसके प्रति पड़ोसियों का व्यवहार बदल जा रहा है। बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों के साथ दोषियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। जब एक मरीज ठीक हो गया, तो उसके साथ और उसके परिवार के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए, लेकिन लोग उसे समस्या की जड़ मानने लगे हैं। यह अकल्पनीय है कि यदि अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति ठीक होकर वापस घर लौटेगा, तो उसके साथ समाज कैसा व्यवहार करेगा।’’

आज लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा करते हुए जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना वक्तव्य दिया, उससे कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध व्यक्ति या उसके परिवार के साथ भेदभाव एवं बहिष्कार की घटनाएं बढ़ने की संभावनाएं ज्यादा हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यदि एक भी मरीज बढ़े, तो सख्ती और ज़्यादा की जाएगी। पहले से ही भेदभाव के शिकार ऐसे लोग ज्यादा डरेंगे, क्योंकि उस इलाके की सख्ती और लॉकडाउन के लिए लोग कोरोना वायरस के बजाय उससे संक्रमित व्यक्ति को जिम्मेदार मानेंगे। बहिष्कार के साथ-साथ ऐसे संदिग्धों, संक्रमितों एवं उनके परिवार के साथ हिंसा होने की संभावनाएं भी हैं।

अपडेट : दीपक शर्मा ने जब खुले तौर पर अपनी बात रखी, तो प्रशासन ने उन्हें कहा कि वे ऐसा न करें और उनके पड़ोसियों को समझाया कि वे इस तरह से भेदभाव नहीं करें। दीपक शर्मा ने बताया कि प्रशासन के कहने पर उन्होंने घर के बाहर लगाए बोर्ड को हटा दिया है। यद्यपि उनका परिवार पड़ोसियों के व्यवहार से आहत है और बहुत परेशान होने के बाद ही उन्होंने घर बेचने का निर्णय लिया। बोर्ड उन्होंने इसलिए लगाया था कि घर जल्दी बिक जाए, ताकि काम पर वापस लौटने से पहले वे अपने परिवार को अन्य जगह शिफ्ट कर दें। प्रशासन के समझाने के बाद वे उम्मीद करते हैं कि शायद आगे पड़ोसियों के व्यवहार में बदलाव आए।

(राजु कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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