NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
...बाक़ी कुछ बचा तो महंगाई मार गई
यूं तो इस कोरोना काल में कुछ कहने लायक बचा नहीं और जो बचा था उसे भी महंगाई मार गई। दाल, साग-सब्ज़ी, फ़ल, अंडा, मांस, मछली, खाद्य तेल, डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस आदि सभी चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
पुलकित कुमार शर्मा
18 Jun 2021
...बाक़ी कुछ बचा तो महंगाई मार गई
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

कोरोना की दूसरी लहर के चलते देश बहुत ही गंभीर परिस्थिति से गुजर रहा है और हालात अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। सभी राज्य सरकारों ने कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े कदम उठाए है और कई राज्यों में अभी लॉकडाउन लगा हुआ है। कोरोना के संक्रमण ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की तो पोल खोली ही सरकार की आर्थिक नीतियों की सच्चाई भी सबके सामने उजागर कर दी। आज हाल ये है कि लोगों की आमदनी के सभी साधन चौपट हैं और उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

केवल दिहाड़ी मज़दूर ही नहीं बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारी भी मुश्किल में हैं। ठेला, रेहड़ी, खोखा, रिक्शा वाले, धोबी, मोची और हलवाई आदि सभी प्रकार के रोजगार से जुड़े लोग बुरे दौर से गुजर रहे हैं। आमदनी के सभी साधन बंद हो जाने से आम आदमी को परिवार चलने में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है । ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बीच महंगाई की मार ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है। दालें, साग-सब्ज़ी, फ़ल, अंडा, मांस, मछली, खाद्य तेल, डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस आदि सभी जरूरतमंद चीजों पर महंगाई इतनी तेजी से बढ़ी है की आम आदमी को रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा कर पाना भी मुश्किल हो गया है ।

सभी वस्तुओं में वार्षिक महंगाई दर दिसंबर 2020 में 1.95 फीसदी थी जो की मई 2021 में बढ़कर 12.94 फ़ीसदी हो गयी है। सभी वस्तुओं में प्राथमिक सामग्री, ईंधन और ऊर्जा और विनिर्मित उत्पादकों को शामिल किया जाता है । जिनमे सबसे ज़्यादा महंगाई दर ईंधन और ऊर्जा में बढ़ी है। ईंधन और ऊर्जा में महंगाई दर दिसंबर 2020 में -6.1 फीसदी थी जो की मई 2021 में बढ़कर 37.61 फ़ीसदी हो गयी है। प्राथमिक सामग्री में महंगाई दर दिसंबर 2020 में -0.6 फीसदी थी जो की मई 2021 में बढ़कर 9.61 फ़ीसदी हो गयी है। और विनिर्मित उत्पादकों में महंगाई दर दिसंबर 2020 में 4.49 फीसदी थी जो की मई 2021 में बढ़कर 10.83 फ़ीसदी हो गयी है । जैसा की नीचे ग्राफ में दिखाया गया है ।

प्राथमिक सामग्री में महंगाई दर

प्राथमिक सामग्री में महंगाई दर बहुत तेजी से बढ़ी है। फल, साग-सब्ज़ी, अण्डा, मांस, मछली और खाद्य तेल आदि सभी इतने महंगे हो गए है की इनको खरीदने में आम आदमी के पसीने छूट रहे हैं। प्राथमिक सामग्री में महंगाई दर बढ़कर 9.61 फ़ीसदी हो गयी है जोकि दिसंबर 2020 में -0.6  फीसदी थी । प्राथमिक सामग्री की वस्तुओं में महंगाई की वृद्धि दर को नीचे दिया गया है ।

  • अंडा, मांस और मछली में महंगाई दर बढ़कर 10.73 फ़ीसदी हुई ।
  • दालों में महंगाई दर बढ़कर 12.09 फीसदी हुई ।
  • फलों में महंगाई दर बढ़कर 20.17 फीसदी हुई ।
  • खनिज पदार्थ में महंगाई दर बढ़कर 22.13 फीसदी हुई ।
  • प्याज़ में महंगाई दर बढ़कर 23.24 फीसदी हुई ।
  • खाद्य तेल के दानों में महंगाई दर बढ़कर 35.94 फीसदी हुई ।
  • कच्चे पेट्रोलियम में महंगाई दर बढ़कर 102.51 फीसदी हुई ।

ईंधन और ऊर्जा में महंगाई दर

सबसे ज़्यादा महंगाई दर ईंधन और ऊर्जा में बढ़ी है । दिसंबर 2020 में ईंधन और ऊर्जा में महंगाई दर -6.1 फीसदी थी जो की मई 2021 में बढ़कर 37.61 फ़ीसदी हो गयी है। ईंधन और ऊर्जा के उत्पादकों में महंगाई की वृद्धि दर इस प्रकार है-

  • एलपीजी में महंगाई दर बढ़कर 60.95 फीसदी हुई ।
  • पेट्रोल में महंगाई दर बढ़कर 62.28 फीसदी हुई ।
  • डीजल में महंगाई दर बढ़कर 66.3 फीसदी हुई ।

इसे पढ़ें : पेट्रो डकैती: सार्वजनिक लूट का सरकारी ब्लूप्रिन्ट

विनिर्मित वस्तुओं में महंगाई दर

विनिर्मित उत्पादकों में कंपनियों द्वारा तैयार किये गए उत्पादकों को शामिल किया जाता है । विनिर्मित उत्पादकों में दिसंबर 2020 में महंगाई दर 4.49 फीसदी थी जो की मई 2021 में बढ़कर 10.83 फ़ीसदी हो गयी है । विनिर्मित उत्पादकों में महंगाई की वृद्धि दर कुछ इस तरह है-

  • मशीनरी और उपकरण को छोड़कर, गड़े धातु उत्पाद में महंगाई दर बढ़कर 10.55 फीसदी हुई ।
  • विनिर्मित रसायन और रसायन उत्पाद में महंगाई दर बढ़कर 10.65 फीसदी हुई ।
  • विनिर्मित पेपर और पेपर उत्पाद में महंगाई दर बढ़कर 10.68 फीसदी हुई ।
  • विनिर्मित कपड़े में महंगाई दर बढ़कर 11.37 फीसदी हुई ।
  • विनिर्मित रबर और प्लास्टिक उत्पाद में महंगाई दर बढ़कर 13.04 फीसदी हुई ।
  • विनिर्मित खाद्य उत्पाद में महंगाई दर बढ़कर 15.21 फीसदी हुई ।
  • माइल्ड स्टील - सेमी फिनिश्ड स्टील में महंगाई दर बढ़कर 24.02 फीसदी हुई ।
  • विनिर्मित मूल धातु में महंगाई दर बढ़कर 27.59 फीसदी हुई ।
  • वनस्पति और पशु तेल और वसा में महंगाई दर बढ़कर 51.71 फीसदी हुई ।

क्या है महंगाई ? महंगाई के कारण को समझिये

महंगाई (मुद्रास्फीति) को साधारण से शब्दो में समझने के लिए हम कह सकते हैं कि किसी वस्तु की कीमतों में होने वाले उतार-चढाव को महंगाई कहते है। अगर किसी वस्तु का दाम मई 2020 में 10 रुपये था और वही वस्तु मई 2021 में बढ़कर 20 रुपये की हो जाए तो हम कह सकते है की महंगाई 100 फीसदी बढ़ गयी है।

अर्थशास्त्र की भाषा में आमतौर पर महंगाई का कारण यह होता है की अगर लोगों के पास ज़्यादा पैसे आ जाए तो लोग ज़्यादा वस्तुओं की माँग करने लगेंगे। जिसको एक सीमित समय में पूरा कर पाना मुश्किल होता है। क्योंकि देश में संसाधन सीमित मात्रा में है। जिसके कारण वस्तुओं के दाम बढ़ने शुरू हो जाएंगे और महंगाई जैसे हालात उत्पन्न होने लगेंगे।

लेकिन हमारे देश में महंगाई का कारण अलग है। अभी जिस स्तर पर महंगाई बढ़ी है हो सकता है कोरोना के चलते आपूर्ति बाधित हुई हो जैसा की अप्रैल माह के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आकड़े बताते हैं कि अप्रैल माह में उत्पादन बहुत अधिक मात्रा में कम हुआ है । दूसरा कारण यह भी हो सकता है की कोरोना के चलते ट्रांसपोर्ट की सुविधा बाधित हुई हो । जिसके कारण इतनी तेजी से महंगाई बढ़ी है । लेकिन जब हम महंगाई के आंकड़ों को देखते हैं तो पता चलता है की महंगाई दिसंबर माह से बढ़ रही है । उस समय न तो उत्पादन बाधित हुआ था और न ही ट्रांसपोर्ट बाधित हुआ था। असल में यह महंगाई सरकार की गलत नीतियों के कारण उत्पन्न हुई है।

इसे पढ़ें : महंगाई की मार सरकारी नीतियों के कोड़े से निकलती है

देश के जाने माने अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक न्यूज़क्लिक में प्रकाशित अपने एक लेख में बताते हैं कि किसी मांग-बाधित अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का उछाल सिर्फ लागतों के बढ़ने से आ सकता है। और ठीक यही इस मामले में हुआ है। इस सिरे से उस सिरे तक, लागतों में जो बढ़ोतरी देखने में आ रही है, यह मूलतः केंद्र सरकार के कुछ प्रशासनिक कदमों का ही नतीजा है।

इस मुद्रास्फीति के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारक है, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का केंद्र सरकार का फैसला। शुरुआत में केंद्र सरकार इस नीति पर चल रही थी कि विश्व बाजार में तेल के दाम जब गिरावट पर थे, उनके हिसाब से देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें नहीं घटायी जाए जबकि विश्व बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने लगे तो इस बढ़ोतरी को उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाए। यह अपने आप में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को ऊपर धकेल रहा था।

दूसरा काम उसने यह किया कि सब्सिडियों में कटौती कर दी। पहले, जब घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों, जैसे उर्वरकों की उत्पादन लागत बढ़ा करती थी, केंद्र सरकार उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी कर के यह सुनिश्चित किया करती थी कि किसानों को इन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ नहीं उठाना पड़े। लेकिन, अब जब भी इन उत्पादों की उत्पादन लागत बढ़ती है और विश्व बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से ही नहीं, खुद सरकार के इनकी उत्पादन लागत बढ़ाने के फैसलों की वजह से भी यह कीमत बढ़ती है।

लेखक-पत्रकार और किसान नेता बादल सरोज का कहना है की हाल ही में सब्जियों और फलों की कीमतों में जो बढ़ोतरी हो रही है वह अस्थायी महंगाई है । जैसे जैसे लॉकडाउन में थोड़ी छूट मिलती जाएगी वैसे वैसे सब्जियों और फलों की कीमत भी कम होने लगेगी। हालांकि इन पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असर जरूर रहेगा। लेकिन सबसे ज्यादा महंगाई तैयार उत्पादकों में हुई है। जैसे खाद्य तेल, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दवाइयां आदि पर जो महंगाई हुई है, उसका कोई तर्क सांगत कारण नहीं है। सरकार ने पूंजीपतियो को मुनाफाखोरी के लिए खुली छूट दी हुई है।

साथ ही बादल सरोज कहते हैं कि जब ट्रेड यूनियन महंगाई भत्ते और वेतन बढ़ाने की मांग करती थी तब सरकार इस बात का हवाला दे कर उन्हें टाल देती थी कि महंगाई भत्ता और वेतन बढ़ाने से महंगाई बढ़ जाएगी। लेकिन अब जब लोगों का वेतन नहीं बढ़ रहा और करीब 15 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए हैं तब महंगाई बढ़ने का क्या कारण है। साथ ही कोरोना काल में लोग 4 साल से भी पहले के वेतन से नीचे काम कर रहे हैं तब महंगाई क्यों लगातार बढ़ती जा रही है। इसका मतलब साफ है कि महंगाई का लोगों की आय के साथ कोई लेना देना नहीं है। यह सीधे-सीधे पूंजीपतियों की कमाई का एक जरिया है।

Inflation
Rising inflation
Narendra modi
Modi government
Nirmala Sitharaman
RBI
Food Inflation
Consumer Price Index
CPI
economic crises
Economic Recession
unemployment
poverty
Hunger Crisis
Crude oil Price hike
Corruption

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • election
    मुकुल सरल
    जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा
    11 Mar 2022
    यूपी को लेकर अभी बहुत समीक्षा होगी कि जाट कहां गया, मुसलमान कहां गया, दलित कहां गया। महिलाओं का वोट किसे मिला आदि...आदि। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या ग्राउंड ज़ीरो से आ रहीं रिपोर्ट्स, लोगों की…
  • uttarakhand
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल
    11 Mar 2022
    "बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा था। पर्वतीय क्षेत्रों का विकास भी बड़ा मुद्दा था। भू-कानून, पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बड़ा मुद्दा था। पलायन बड़ा मुद्दा था। लेकिन नतीजे तो यही कहते हैं कि सभी…
  • पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    जगन्नाथ कुमार यादव
    पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    11 Mar 2022
    इस महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा बिहार तकनीकी सेवा आयोग समेत 20 से ज़्यादा विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।
  • ukraine
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस अपडेट: चीन ने की यूक्रेन को मदद की पेशकश, रूस पर प्रतिबंधों को भी बताया गलत
    11 Mar 2022
    चीन के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अनुकूल सभी प्रयासों का समर्थन करता है और इसमें वह सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
  • विजय प्रसाद
    एक महान मार्क्सवादी विचारक का जीवन: एजाज़ अहमद (1941-2022)
    11 Mar 2022
    एजाज़ अहमद (1941-2022) की जब 9 मार्च को मौत हुई तो वे अपनी किताबों, अपने बच्चों और दोस्तों की गर्मजोशी से घिरे हुए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License