NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोरोना काल में बढ़ती गरीबी के बीच अब महंगी गैस की मार
तकरीबन 14 किलो वाला रसोई गैस सिलिंडर, जिसके सहारे घर का खाना बनता है, उसकी कीमत 1 महीने पहले ₹809 थी। वह कीमत अब ₹25 बढ़कर ₹834 हो गई है।
अजय कुमार
03 Jul 2021
कोरोना काल में बढ़ती गरीबी के बीच अब महंगी गैस की मार

भरपेट खाना खाने से जुड़े सभी साधन जब लगातार महंगे होने लगे तो इसका साफ मतलब होता है कि लोगों को संभालने के लिए बना सरकार नाम का जुगाड़ ढंग से काम नहीं कर रहा है। तकरीबन 14 किलो वाली रसोई गैस जिसके सहारे घर का खाना बनता है, उसकी कीमत 1 महीने पहले ₹809 थी। वह कीमत ₹25 बढ़कर ₹834 हो गई है।

यह केवल एक महीने की बात नहीं है। सरकार के पद पर बैठी मोदी सरकार के पिछले 7 साल के दौर में देखा जाए तो रसोई गैस की कीमत में दोगुने का इजाफा हुआ है।  1 मार्च 2014 को 14.2 किलो के घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 410.5 रुपए थी जो अब 834.50 रुपए है। कहने का मतलब यह है कि अगर इस निष्कर्ष पर पहुंचा जाए कि मोदी सरकार के पिछले 7 सालों में पेट भर खाना कयो को नसीब नहीं हुआ होगा तो इसमें कोई गलत बात नहीं।

अब जरा आप ही सोच कर बताइए कि जिस सरकार की नीतियों की वजह से लोगों को भरपेट खाना खाना नसीब ना हुआ हो, वह सरकार लोगों को गरीबी से निकालने, बेरोजगारों को रोजगार देने, लोगों की जिंदगी आसान करने के मामले में कितनी फिसड्डी साबित हुई होगी।

अब रसोई गैस को ही देख लीजिए। रसोई गैस की कीमत निर्धारण का फार्मूला बहुत जटिल है। साधारण शब्दों में इतना समझिए कि इस फार्मूले को इंपोर्ट पार्टी प्राइस कहते हैं। इस फार्मूले के आधार पर सऊदी अरब की अरामको कंपनी द्वारा तय किए गए एलपीजी के कीमत को बेंचमार्क के तौर पर अपनाया जाता है। इस कीमत में समुद्री भाड़ा, कस्टम ड्यूटी, पोर्ट ड्यूटी सहित वह सारे खर्च जोड़े जाते है, जो एलपीजी को दूसरे देश से मंगवाने के लिए खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी बहुत सारे लागतों को कीमत में जोड़ा जाता है जैसे सिलेंडर का खर्च, देश के कोने- कोने में पहुंचाने का भाड़ा, केंद्र सरकार द्वारा लगने वाली जीएसटी।

इन सभी खर्चों को जोड़कर सरकारी तेल कंपनियां एलपीजी गैस का भाव हर महीने तय करती हैं। क्योंकि एलपीजी की खरीददारी डॉलर में होती है इसलिए अगर डॉलर ऊपर नीचे घटता बढ़ता है तब एलपीजी की कीमतों पर भी असर पड़ता है। यानी ढेर सारे कारक मिलकर के एलपीजी के कीमत को प्रभावित करते हैं।

जब भी एलपीजी की कीमत बढ़ती है तो सरकार यह कहकर अपना बचाव करती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों की वजह से कीमतों में इजाफा हो रहा है। इसे कम और अधिक करना उसके बस की बात नहीं। लेकिन यह हिसाब भी समझ से परे बात है। विपक्ष का कहना है कि पिछले 6 महीने में रसोई गैस की कीमतों में ₹240 का इजाफा किया गया है। सऊदी अरामको की एलपीजी की मार्च में कीमत 587 यूएस डॉलर प्रति मीट्रिक टन थी। यह कीमत घटकर अब $527 प्रति मीट्रिक टन हो गई है। जब प्रति मेट्रिक टन कीमत $587 थी तब भारत में एलपीजी प्रति सिलेंडर कीमत ₹819 थी। लेकिन जब आरामको कि एलपीजी की कीमत घटकर डॉलर यूएस डॉलर 527 हो गई है तब यह ₹834 में बेची जा रही है। यह कीमत नहीं होना चाहिए। अगर रुपए और डॉलर की विनिमय दर को समायोजित करने के बाद एलपीजी की कीमत तय की जाए तो यह ₹552 प्रति सिलेंडर होनी चाहिए। रसोई गैस की यही कीमत तय होनी चाहिए। यानी सरकार एलपीजी गैस की कीमत के नाम पर मुनाफाखोरी कर रही है।

प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण में कहा था कि जब एक गरीब घर की औरत चूल्हा जलाकर अपने घर का खाना बनाती है तो 400 सिगरेट के बराबर धुआं अपने अंदर खींच लेती है। मैंने अपने बचपन में यह सब देखा है। कभी-कभी तो ऐसा होता था कि मां खाना बनाती थी और धुंए से उसका चेहरा नहीं दिखता था। यह प्रधानमंत्री के भाषण के वक्तव्य हैं। जो उन्होंने उज्जवला योजना के महत्व को बताते हुए दिया था। प्रधानमंत्री से ही पूछना चाहिए कि ₹834 प्रति सिलेंडर रसोई गैस आखिरकर कौन गरीब खरीदने के लिए आसानी से तैयार हो पाएगा। इतनी बड़ी कीमत क्या कोई गरीब मां दे पाएगी?

इस सवाल को सुनते हो सकता है कि सरकार के कामकाज के समर्थक लोग सब्सिडी की याद दिलाएं। रसोई गैस में सब्सिडी का मतलब यह कि अगर कीमतें बढ़ेंगी तो उसका बोझ आम लोगों पर पड़ने नहीं दिया जाएगा। सरकार खुद खाते में पैसा भेज देगी।

यही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना थी। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले महिलाओं को फ्री में गैस सिलेंडर दिया जाएगा और सब्सिडी रेट पर सिलेंडर में गैस भरने की सहूलियत दी जाएगी। सरकार ने दावा किया था कि इस योजना की वजह से भारत के 95% लोगों तक गैस सिलेंडर पहुंच पा रहा है। भारत की बहुत बड़ी आबादी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की मजबूरी से मुक्त हुई है।

लेकिन जरा सोचिए अगर पिछले 7 साल में रसोई गैस की कीमतें बढ़कर दोगुना हो गई है तो इस योजना से कितनी औरतों और परिवारों को लाभ पहुंचा  होगा। साल 2018 के रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ कंपैशनेट इकोनॉमिक्स के सर्वे के मुताबिक उत्तर भारत में इस योजना के लाभ लेने वाले 85 फ़ीसदी परिवारों की औरतों ने इस योजना को छोड़ दिया। साल 2019 की कैग रिपोर्ट कहती है उज्ज्वला योजना से लाभान्वित होने वाले परिवार साल भर में मुश्किल से तीन या चार सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। इन सभी आंकड़ों का इशारा इसी तरफ है कि रसोई गैस की बढ़ती कीमतों की वजह से भारत का गरीब समाज इस योजना का फायदा नहीं उठा सकता है। कोरोना जैसी महामारी के वक्त तो बिल्कुल भी नहीं।

जहां तक सब्सिडी की बात है तो टेक्निकली देखा जाए तो सब्सिडी खत्म नहीं हुई है। लेकिन वास्तविक तौर पर देखा जाए तो सब्सिडी खत्म हो गई है। नियम के मुताबिक 10 लाख से ऊपर की आमदनी वाले और जो स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ना चाहते हैं उनके सिवाय सभी एलपीजी पर सब्सिडी के हकदार होंगे। यह नियम है।

लेकिन हकीकत यह है कि पिछले साल से सब्सिडी मिलना बंद हो चुकी है। साल 2019-20 में सरकार ने एलपीजी पर सब्सिडी के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का बजट में प्रावधान किया था। साल 2020-21 में या घटकर महज 14 हजार करोड रुपए रह गया। सरकार के कामकाज पर नजर रखने वाले लोग का कहना है कि धीरे-धीरे सरकार इस सब्सिडी को बंद कर देगी। जानकारों की यह बात सही भी लगती है क्योंकि सरकार जो मर्जी सो करती रहे सूचनाओं का प्रचार प्रसार हमारे समाज में इस तरह से हो रहा है कि लोग सरकार के खिलाफ कुछ भी नहीं कहने वाले।

रसोई गैस पर जीएसटी लगता है। पेट्रोल और डीजल की तरह टैक्स बढ़ाने को लेकर जीएसटी में हदबंदी है। इसमें सरकार यहां पर सब्सिडी ना देने वाली नीति अपना रही है कि किसी भी तरह से उस पर बोझ ना पड़े।

सबसे जरूरी बात कि महंगाई की मार लोगों पर कब पड़ रही है? उस समय पड़ रही है जब तकरीबन 23 करोड लोगों की आय इतनी कम हो चुकी है कि वह गरीबी रेखा की दहलीज पर खड़े हैं, जब तकरीबन एक ही साल में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में 17 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है और इनकी संख्या 39 फ़ीसदी पहुंच गई है, जब करोड़ों लोग बेरोजगार बने घूम रहे हैं। ऐसे समय में कमरतोड़ महंगाई का मतलब यही हुआ कि सरकार आम लोगों की नहीं है।

Coronavirus
COVID-19
poverty
Inflation
gas prices
LPG price hike
Narendra modi
Modi government

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया


बाकी खबरें

  • श्रुति एमडी
    ‘तमिलनाडु सरकार मंदिर की ज़मीन पर रहने वाले लोगों पर हमले बंद करे’
    05 Apr 2022
    द्रमुक के दक्षिणपंथी हमले का प्रतिरोध करने और स्वयं को हिंदू की दोस्त पार्टी साबित करने की कोशिशों के बीच, मंदिरों की भूमि पर रहने वाले लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
  • भाषा
    श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई
    05 Apr 2022
    "सरकारी बजट पर मतदान के दौरान गठबंधन के पास 225 सांसदों में से 157 का समर्थन था, लेकिन अब 50 से 60 सदस्य इससे अलग होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार न सिर्फ दो-तिहाई बहुमत खो देगी, बल्कि सामान्य…
  • विजय विनीत
    एमएलसी चुनाव: बनारस में बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी के आगे दीन-हीन क्यों बन गई है भाजपा?
    05 Apr 2022
    पीएम नरेंद्र मोदी का दुर्ग समझे जाने वाले बनारस में भाजपा के एमएलसी प्रत्याशी डॉ. सुदामा पटेल ऐलानिया तौर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप जड़ रहे हैं कि वो…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: आज दूसरे दिन भी एक हज़ार से कम नए मामले 
    05 Apr 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 96 हज़ार 369 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है। और एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 54 रह गयी है।
  • मुकुल सरल
    नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
    05 Apr 2022
    नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License