NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना युद्ध है, आप सैनिक हैं तो सरकार से सवाल पूछना आपका फ़र्ज़ है
हेल्थ रिपोर्टरों द्वारा सरकार से पूछे गए कुछ ज़रूरी सवाल
अजय कुमार
07 Apr 2020
coronavirus
Image courtesy: AM News

सरकार कह रही है कि कोरोना से पूरे देश के लोगों को युद्ध लड़ना है। सरकार की बात सही है। कोरोना के खिलाफ हर व्यक्ति सैनिक की भूमिका में हैं। कोरोना की लड़ाई में एक सैनिक होने के नाते हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि वह कोरोना से लड़ाई में सही सरकारी सुझावों का पालन करे और सरकार से ज़रूरी सवाल पूछे। इस लिहाज़ से हेल्थ रिपोर्टरों द्वारा सरकार से पूछे गए कुछ ज़रूरी सवाल ऐसे हैं -

-  दुनिया के ज्यादातर देशों में कोरोना टेस्टिंग की मुफ्त व्यवस्था की गयी है। तो भारत में एक टेस्ट की कीमत 4500 रुपये क्यों तय की गयी है?  यह दुनिया के ज्यादातर देशों में तय किये टेस्ट की कीमत से अधिक है। ऐसे में एक गरीब व्यक्ति क्या टेस्ट करवा पाएगा? और जब टेस्ट के जरिये ही संक्रमण को रोकने की व्यवस्था की गयी है तो इसका मतलब यह भी है कि टेस्ट न करवा पाने की स्थिति में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। तो सरकार की तरफ से प्राइवेट लैब में 4500 रुपये प्रति टेस्ट की व्यवस्था की क्यों गयी है? अगर इतनी अधिक कीमत तय की गयी है तो निश्चित है कि कम लोग टेस्टिंग करवाने जाएंगे। जैसा कि आंकड़ें बता रहे हैं अभी भारत में दस लाख की आबादी पर केवल 93 टेस्ट हो पा रहे हैं। ड्रग कंट्रोलर ऑफ़ इण्डिया के द्वारा अभी इसकी जानकरी नहीं मिल रही है कि भारत में कितने टेस्टिंग किट उत्पादित किये जा रहे हैं? कितने टेस्टिंग किट भारत के बाहर से आयात किये जा रहे हैं?  

- आने वाले समय में स्वास्थ्यकर्मियों को मास्क। ग्लव्स से लेकर बॉडी कवर की बहुत अधिक जरूरत पड़ेगी। लेकिन अभी तक पता नहीं है कि कितने अधिक बॉडी कवर का उत्पादन किया जा रहा है? इन बॉडी कवर यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) से जुड़े मानक संबंधी  जाँच के लिए केवल एक केंद्रीय एजेंसी निर्धारित की गयी है। इसलिए बहुत सारे उत्पादकों की शिकायतों आ रही है कि उन्हें बॉडी कवर जल्द से बनाने की इजाजत नहीं मिल पा रही है। ऐसे में क्या होना चाहिए?  पीपीई की टेस्टिंग के लिए एक से अधिक टेस्टिंग सेंटर क्यों नहीं बनने चाहिए?

- कोरोना वायरस के फैलाव को मापने के लिए सरकार सेरिलोजिकल सर्वे के अलावा और किन तरीकों को अपना रही है? इंफ्लुंएजा जैसी बीमारियों का सामुदायिक निरीक्षण कैसे किया जा रहा है?  क्या इन्हें आइसोलेट करने की कोई व्यवस्था है ?

- अभी तो कोरोना से संक्रमित सारे मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर लिया जा रहा है। लेकिन आगे क्या होगा, जब मरीजों की संख्या बढ़ेगी? जब यह दबाव बनेगा कि कोरोना से संक्रमित मरीजों को ज्यादा संक्रमित मरीजों से अलग रखा जाए? तब क्या घर पर आइसोलेशन के लिए कहा जाएगा? या गाँव और शहर के स्तर पर आइसलेशन सेंटर की व्यवस्था की जायेगी ? ऐसी तैयारियों की जानकारियां साझा क्यों नहीं की जा रही है?

- कई जगहों पर देखा जा रहा है कि डर की वजह से मेडिकल स्टोर से लेकर आउटपेशंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) बंद रहे हैं? क्या सरकार ने इसे लेकर किसी तरह का निर्देश दिया है? क्या सरकार ने ऐसा कोई आदेश दिया है जो यह कहे कि प्राइमरी हेल्थ सेंटर बंद नहीं रहेंगे? कैंसर, डाइबिटीज, टीबी जैसी बीमारियों से परेशान लोग, जिनकी इम्युनिटी कमजोर हैं,  उन्हें आइसोलेट करने के लिए कैसे कदम उठाये जा रहे हैं?

- कई राज्यों में जरूरी टीकाकरण के काम रोक दिए गए हैं? क्या यह 21 दिनों के लॉकडाउन तक ही रुका रहेगा या आगे भी बढ़ेगा? क्या सरकार के पास कोई ऐसी योजना है जो टीकाकरण जैसी बेहद जरूरी काम के लिए विकल्प के तौर पर काम करें?

- हेल्थ वर्कर की सुरक्षा के लिए सरकार ने बीमा का एलान किया है। इस बीमा हेल्थ वर्कर को केवल मौत पर ही सुरक्षा मिल पाएगी। यह केवल तीन महीने के लिए ही है? इसलिए सवाल यह है कि तब क्या होगा जब 10 से 12 हजार रुपये महीने पर काम करनी वाली नर्स को इलाज करवाना पड़ेगा? क्या इलाज भी इस बीमा कवर में शामिल है? क्या तीन महीने के बाद कोई दुर्घटना होने पर इसका फायदा मिल पाएगा?  इस बीमा पर यह भी सवाल है कि सफाई कर्मचारी भी कोरोना से लड़ाई में सबसे आगे खड़े हैं, इनके लिए कोई सुरक्षित बीमा पॉलिसी की घोषणा क्यों नहीं की गयी?

- सबसे बड़ी बात कि वह लोग जो भूख से मरने के कगार पर पहुंच रहे हैं, जिनके पास राशन कार्ड भी नहीं है। उनके लिए केंद्र और सभी राज्य सरकारें क्या व्यवस्था कर रही हैं?

Coronavirus
Corona Crisis
Corona virus epidemic
COVID-19
Narendra modi
BJP
Corona Testing kit
health care facilities
health system
PPE

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • भाषा
    'आप’ से राज्यसभा सीट के लिए नामांकित राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा से दिया इस्तीफा
    24 Mar 2022
    चड्ढा ‘आप’ द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकित पांच प्रत्याशियों में से एक हैं । राज्यसभा चुनाव के लिए 31 मार्च को मतदान होगा। अगर चड्ढा निर्वाचित हो जाते हैं तो 33 साल की उम्र में वह संसद के उच्च सदन…
  • सोनिया यादव
    पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़
    24 Mar 2022
    कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है।
  • एजाज़ अशरफ़
    2024 में बढ़त हासिल करने के लिए अखिलेश यादव को खड़ा करना होगा ओबीसी आंदोलन
    24 Mar 2022
    बीजेपी की जीत प्रभावित करने वाली है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सामाजिक धुरी बदल रही है, जिससे चुनावी लाभ पहुंचाने में सक्षम राजनीतिक ऊर्जा का निर्माण हो रहा है।
  • forest
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद
    24 Mar 2022
    शोधकर्ताओं का तर्क है कि वनीकरण परियोजनाओं को शुरू करते समय नीति निर्माताओं को लकड़ी के उत्पादन और पर्यावरणीय लाभों के चुनाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • रवि कौशल
    नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 
    24 Mar 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि गरीब छात्र कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट पास करने के लिए कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाएंगे। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License