NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
कोरोना वायरस दुनिया की सबसे बड़ी परेशानी नहीं है - नोआम चोम्स्की
कोरोना वायरस की एक ख़ासियत यह होगी कि यह हमें सोचने पर मजबूर करे कि हम किस तरह की दुनिया में रहना चाहते हैं। कोरोना वायरस का संकट इस समय क्यों है?  क्या यह बाज़ार आधारित बन रही दुनिया की नाकामयाबी की गाथा है?
अजय कुमार
03 Apr 2020
नोआम चोम्स्की
Image courtesy: truthout.org

91 साल के मशहूर अमेरिकी भाषाविद् और राजनीतिक विश्लेषक नोआम चॉम्स्की के ने आज के संकट पर अमेरिका के एरिजोना के  DiEM25 टीवी से बातचीत की है। इसकी बातचीत का संक्षिप्त संपादित अंश।

नोआम चोम्स्की (Noam Chomsky) की पैदाइश साल 1928 की है। दस साल की उम्र में नोआम चोम्स्की ने अपना पहला निबंध स्पेनिश सिविल वॉर पर लिखा था। नोआम चोम्स्की ने दूसरे विश्व युद्ध से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ गठन पर, बर्लिन की दीवार गिरने से लेकर शीत युद्ध पर, वियतमान वार से लेकर तेल संकट पर यानी सब पर लिखा। 1938 से लेकर 2020 तक दुनिया में उन तमाम महत्वपूर्ण घटनाओं पर जिसने दुनिया का रुख बदल दिया। इस इतिहास को समेटना बहुत मुश्किल है। लेकिन इससे यह अंदाज़ लगाया जा सकता है कि नोआम चोम्स्की के चिंतन का परिदृश्य कितना बड़ा है।

नोआम चोम्स्की कहते हैं कि मैं भी इस समय सेल्फ आइसोलेशन में हूँ। मैं अपने बचपन में रेडियो पर हिटलर के भाषण सुना करता था। मुझे शब्द नहीं समझ में आते थे फिर भी उस मूड और डर को महसूस कर लेता था जो हिटलर के भाषणों में मौजूद था। ठीक इस तरह से मौजूदा दौर में डोनाल्ड ट्रंप के भाषण होते हैं। इनसे भी ठीक वही प्रतिध्वनि महसूस होती है। इसका मतलब यह नहीं डोनाल्ड ट्रंप फासिस्ट हैं। डोनाल्ड ट्रंप फासिस्ट विचारधारा में धंसे हुए शख्स नहीं है। लेकिन सामाजिक तौर पर विकृत इंसान हैं। समझिये एक तरह के सोसिओपैथ जिसे केवल अपनी फिक्र होती है। इस महत्वपूर्ण समय में यही डराने वाली बात है कि डोनाल्ड ट्रंप अगुवाई की भूमिका में है।  

कोरोनो वायरस काफी गंभीर है, भयानक है। इसके भयानक परिणाम हो सकते हैं। लेकिन आगे जाकर हम इससे बच निकलेंगे। न्यूक्लियर वार का बढ़ता खतरा, ग्लोबल वार्मिंग और जर्जर होता लोकतंत्र मानव इतिहास के यह तीन ऐसे बड़े खतरे हैं जिनसे निपटा नहीं गया तो यह हमें बर्बाद कर देंगे। ख़तरनाक यह नहीं है कि अमेरिका की बागडोर डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है। ख़तरनाक यह है कि अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की बागडोर डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है। यह देश दूसरे देशों पर प्रतिबन्ध लगाता है, लोगों को मरवाता है लेकिन दुनिया का कोई लोकतंत्र इसका खुलकर विरोध नहीं करता। यूरोप ईरान पर लगे प्रतिबन्ध को सही नहीं मानता है, लेकिन अमेरिका की ही बात मानता है। यूरोप को डर है कि अगर वह अमेरिका का विरोध करेगा तो उसे इंटरनेशनल फाइनेंसियल सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।

ईरान की आंतरिक परेशनियां है लेकिन इस पर कड़े प्रतिबन्ध लगाए गए हैं। ऐसे प्रतिबन्ध लगाए हैं कि वह कोरोनावायरस के दौर में बहुत अधिक दर्द सह रहा है। वह क्यूबा जो अपनी आजादी के बाद से लेकर अब तक जूझ रहा है। इस दौर में  क्यूबा यूरोप की मदद कर रहा है। यह अचरज भरी बात है। इस दौर में क्यूबा  जैसा देश यूरोप के देशों की मदद कर रहा है। लेकिन यूरोप के देश ग्रीस की मदद नहीं कर रहे हैं। पता नहीं इसे क्या कहा जाना चाहिए?

दुनिया के सारे देशों के राजनेता वायरस से लड़ने को भी युद्ध कह रहे हैं। दुनिया के नेताओं की तरफ से यह एक तरह का रहेटोरिक (Rhetoric) है, जिसे बचाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इसका महत्व है। इस वायरस से लड़ने के लिए उस तरह की मोबलाइजेशन की ज़रूरत है जो युद्धों के समय की जाती है। समाज तक पहुंचने के लिए ऐसे शब्दों की जरूरत पड़ती है।  

भारत के बहुतेरे लोगों की जिंदगी ऐसी है जैसे रोज कुआं खोदकर रोज पानी पीने का काम किया जाता हो। अगर यह आइसोलेशन में जाएंगे तो भूख इन्हें मार देगी। तब आखिकरकार क्या होना चाहिए। एक सभ्य समाज में अमीर देशों को गरीब देशों की मदद करनी चाहिए। अगर दुनिया की परेशनियां ऐसी ही चलती रहीं तो आने वाले दशकों में दक्षिण एशिया में रहना मुश्किल हो जाएगा। इस गर्मी में राजस्थान का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। आगे यह और अधिक बढ़ेगा। पानी खराब होता जा रही है। पीने लायक नहीं बचा है।

दक्षिण एशिया में दो न्यूक्लिअर पावर वाले देश हैं। यह दोनों हर वक्त लड़ते रहते हैं। मेरे कहने का मतलब है कि कोरोना वायरस की परेशानी बहुत खतरनाक है। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े संकटों का बहुत छोटा सा हिस्सा है। इन संकटों से हम ज्यादा दिनों तक बच नहीं सकते हैं। हो सकता है कि दुनिया की कई सबसे बड़ी परेशनियां हमारी जिंदगी में उस तरह से छेड़छाड़ महसूस न करवाए जितनी कोरोना वायरस की वजह से हम अपनी जिंदगी में छेड़छाड़ महसूस कर रहे हैं। लेकिन दुनिया की यह सबसे बड़ी परेशनियां हमारी जिंदगी को इस तरह से बदलकर रख देंगी कि इस दुनिया में खुद को बचाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे दिन ज्यादा दूर नहीं है, ये आने वाले ही हैं।

कोरोना वायरस की एक ख़ासियत यह होगी कि यह हमें सोचने पर मजबूर करे कि हम किस तरह की दुनिया में रहना चाहते हैं। कोरोना वायरस का संकट इस समय क्यों है?  क्या यह बाज़ार आधारित बन रही दुनिया की नाकामयाबी की गाथा है? जब हम इस संकट से उबरेंगे तो हमारे पास कई विकल्प होंगे कि क्या एक तानाशाही सरकार की स्थापना की जाए जिसके पास सारा कंट्रोल हो या एक ऐसे समाज की जो मानवीय मदद पर आधारित हो।

Noam Chomsky
Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Corona virus epidemic
Lockdown in World
Donand Trump

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • पीपल्स डिस्पैच
    नेपाल ने अमेरिका के MCC अनुदान समझौते को विरोध प्रदर्शनों के बीच दी मान्यता, अब आगे क्या?
    04 Mar 2022
    नेपाली संसद में कई हफ़्तों तक चली उठापटक नतीजा आख़िरकार अमेरिका की एमसीसी के साथ 500 मिलियन डॉलर का समझौता रहा। इस समझौते के पहले सरकार के समझौते का विरोध कर रही राजनीतिक पार्टियों ने बड़े विरोध…
  • mamta banerjee
    विजय विनीत
    यूपी चुनावः बनारस के सियासी अखाड़े में दिग्गजों पर भारी पड़ीं ममता, भाजपा को दे गईं गहरी चोट
    04 Mar 2022
    बंगाली समाज के लोग बनारस में पीढ़ियों से बंग संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। पिछले कई चुनावों से वह बीजेपी को वोट देते आए हैं। इस बार ममता बनर्जी का अपमान और उनको यह कहना कि वो हिन्दू नहीं हैं, अंदर…
  • पीपल्स डिस्पैच
    यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और युद्ध-विरोधी आंदोलन के परिपेक्ष्य
    04 Mar 2022
    शांति के लिए काम करने वाले एबी मार्टिन और ब्रायन बेकर रूस-यूक्रेन संघर्ष के सिलसिले में युद्ध विरोधी आंदोलन की दिशा में चर्चा करने के लिए आपस में मिले
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,396 नए मामले, 201 मरीज़ों की मौत
    04 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.16 फ़ीसदी यानी 69 हज़ार 897 हो गयी है।
  • mbbs
    रवि कौशल
    सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की बजाय मंदिरों को प्राथमिकता दी,  इसी का ख़ामियाज़ा यूक्रेन में भुगत रहे हैं छात्र : मेडिकल विशेषज्ञ
    04 Mar 2022
    विशेषज्ञों का कहना है कि रूस, चीन और पूर्वी यूरोपीय देशों में मेडिकल की डिग्री हासिल करने के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की बड़ी तादाद की मुख्य वजह देश के निजी चिकित्सा संस्थानों की मोटी फीस है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License