NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
कोरोनोवायरस को लेकर दोषारोपण बंद हो : साइंस पत्रिका ने संपादकीय में माफ़ी मांगते हुए अपील की
'नेचर' पत्रिका ने माफ़ी मांगते हुए अपने संपादकीय में लिखा “यह दुखद होगा अगर कोरोनो वायरस को लेकर दोषारोपण किया जाता है, एशिया के नौजवानों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ जाएगा, उनको अपनी शिक्षा को रोकना पड़ेगा, ख़ुद के और दूसरों के अवसरों को त्यागना पड़ेगा और अनुसंधान बंद करने होंगे। कोरोना वायरस का दोषारोपण अब बंद होने चाहिए।"
संदीपन तालुकदार
09 Apr 2020
कोरोनोवायरस
प्रतीकात्मक तस्वीर

मानव इतिहास में महामारी की घटना कोई नई बात नहीं है। किसी भी महामारी के बाद राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव आए हैं। इसी तरह सामुदायिक दोषारोपण भी महामारी से जुड़े हुए हैं। COVID-19 महामारी भी रहस्यपूर्ण नस्लवाद और सांप्रदायिक निहितार्थ के साथ पूरी तरह दोषारोपण से मुक्त नहीं है। एक तरफ तो वैज्ञानिक, शोधकर्ता, अर्थशास्त्री और सामाजिक वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं कि महामारी को कैसे कम किया जाए और इसके बाद इसके असर से कैसे निपटा जाए वहीं दूसरी तरफ दोष मढ़ने का घृणित कार्य जारी है

यहां तक कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सूचनाओं के बारे में जानकारी देने वाले दुनिया के कई प्रमुख संगठन भी खुद को इससे नहीं बचा पाए हैं। इनमें प्रतिष्ठित पत्रिका 'नेचर' भी शामिल है। डब्ल्यूएचओ ने फ़रवरी महीने में नोवेल कोरोना वायरस के कारण होने वाली इस बीमारी को आधिकारिक रूप से COVID नाम दिया था और अब इसे पूरी दुनिया में स्वीकार कर लिया गया है। लेकिन इससे पहले कई संगठनों ने ग़लत तरीक़े से इस वायरस का नाम वुहान और चीन के साथ जोड़ दिया था।

हालांकि, 'नेचर' ने संपादकीय में अपनी ग़लती को स्वीकार करते हुए माफी मांग ली है और साथ ही सभी को इस तरह का आरोप लगाने से दूर रहने की अपील की है जिससे किसी भी तरह कलंकित कर सकता है। 7 अप्रैल को प्रकाशित 'नेचर' के संपादकीय में, पत्रिका ने अपने पहले के प्रकाशन में चीन के साथ इस वायरस को जोड़ने को लेकर माफी मांगी है। संपादकीय में लिखा गया है: "ऐसा करना हमारी तरफ से की गई एक ग़लती थी, जिसके लिए हम ज़िम्मेदारी लेते हैं और माफी मांगते हैं।" संपादकीय में आगे कहा गया है- “यह दुखद होगा अगर कोरोनोवायरस को लेकर दोषारोपण किया जाता है, एशिया के नौजवानों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ जाएगा, उनको अपनी शिक्षा को रोकना पड़ेगा, अपने खुद के और दूसरों के अवसरों को कम करने पड़ेंगे और अनुसंधान बंद करने होंगे– वह भी तब जब पूरी दुनिया रास्ता खोजने के लिए इस पर निर्भर है। कोरोना वायरस का दोषारोपण अब बंद होने चाहिए।"

वर्षों से वायरस से होने वाली बीमारियों को उस स्थानों, भू-भागों या क्षेत्रों से जोड़ा जाना आम बात है जहां यह पहली बार सामने आया है। हमारे सामने MERS जैसे कई उदाहरण हैं। MERS को मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कहा जाता है जो पहली बार मिडिल ईस्ट में प्रकट हुआ था। इसी तरह Zika वायरस का नाम युगांडा के वन से पड़ा। डब्ल्यूएचओ ने इस चलन को रोकने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में दिशा-निर्देश जारी किया था ताकि इस क्षेत्र और यहां के लोगों पर दोषारोपण और परिणामी नकारात्मक प्रभाव को रोका जा सके। दिशानिर्देश में शामिल संदेश यह है कि कोई भी महामारी हर किसी को जोखिम में डालता है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कौन हैं और उनका संबंध कहां से है।

लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार इस वायरस को चीन के साथ जोड़ा है, जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे एडुआर्डो बोल्सनारो ने इसे चीन की गलती बताया। यूके सहित अन्य देशों के नेताओं ने भी इसी तरह की टिप्पणी की।

किसी देश की आलोचना करना या इस मामले के लिए, किसी भी सरकार की कोई भी नीति कुछ और होती है, लेकिन किसी भी वायरस या प्रकोप को किसी स्थान या किसी विशेष आबादी से जोड़ने के लिए जातिवादी एजेंडा को रेखांकित किया जाता है। संक्रमक रोग के विशेषज्ञ एडम कुचर्स्की ने अपनी पुस्तक 'द रूल्स ऑफ़ कॉन्टैजन' में लिखा है कि "महामारी समुदायों को कलंकित करती है, जिसके कारण हम सभी को अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है। यदि संदेह है तो सलाह लें और हमेशा सबूतों को आधार बनाएं।”

किसी भी प्रकार के नस्लीय या सांप्रदायिक भेदभाव के खिलाफ सतर्कता बरतने में असफल होने के अपने परिणाम हैं। कई एशियाई मूल के छात्र और शोधकर्ता जिनमें चीन के छात्र भी शामिल हैं और जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं वे इस महामारी के बीच अपने वतन लौट आए हैं और कई छात्र तो जहां हैं वहीं रह गए हैं। ऐसा कहा जाता है कि इनमें से कई छात्र नस्लवाद के डर से अपने देश से वापस नहीं जा सकते हैं। कई प्रमुख विश्वविद्यालय जहां अंतरराष्ट्रीय और बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं उसे शैक्षणिक सक्रियता को बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है। नस्लीय भेदभाव भविष्य में इसमें बाधा बन सकता है।

इस महामारी ने इसे समझने, नियंत्रण करने और इसके बाद की घटना को कम करने में दुनिया भर के वैज्ञानिकों और अनुसंधान की सत्यनिष्ठता को प्रभावी बना दिया है। इसके विपरीत नस्लवाद, यदि जारी रहता है तो इस प्रयास को विफल कर देगा।

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

Stigma with Coronavirus Has to Be Ended: Science Journal Issues Editorial Apology and Appeal

COVID-19
Racism amidst COVID-19
Racism and Science
WHO Guidelines on Naming Diseases

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License