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न्यायालय ने मोदी सरकार को गलती सुधारने का मौका दिया: कांग्रेस
कांग्रेस ने कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को आर्थिक मदद देने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश को लेकर बुधवार को दावा किया कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने नरेंद्र मोदी सरकार को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है और अब उसे हर पीड़ित परिवार की 10 लाख रुपये की मदद करनी चाहिए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Jul 2021
न्यायालय

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने कोरोना  से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को आर्थिक मदद देने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश को लेकर बुधवार को दावा किया कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने नरेंद्र मोदी सरकार को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है और अब उसे हर पीड़ित परिवार की 10 लाख रुपये की मदद करनी चाहिए।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने मोदी सरकार को ग़लती सुधारने का मौक़ा दिया है। कम से कम अब सरकार को मुआवज़े की सही राशि तय करके पीड़ितों को राहत देनी चाहिए। ये सही दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।’’

SC ने मोदी सरकार को ग़लती सुधारने का मौक़ा दिया है। कम से कम अब सरकार को मुआवज़े की सही राशि तय करके पीड़ितों को राहत देनी चाहिए।

ये सही दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है। pic.twitter.com/AmUjyaU9k2

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 30, 2021

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड प्रभावित परिवारों के साथ खड़े नहीं होकर एक बार फिर से देश को निराश किया है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अब कोविड मुआवजा कोष की स्थापना की जाए और कोरोना वायरस के कारण जान गंवाने वाले हर व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये की मदद दी जाए।

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री और मोदी सरकार उदासीनता की नींद से जागें और कोविड मुआवजा कोष की स्थापना करें।’’

उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार लोगों की मदद करने से पीछे हट गई और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद वह पूरी तरह बेनकाब हो गई है।

सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री राजधर्म का पालन करें और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकारण के मुखिया के तौर पर उनकी जिम्मेदारी है कि वह महामारी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति सहानुभूति दिखाएं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कोविड से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सहायता राशि देने में असमर्थता जतारही थी , लेकिन उच्चतम नय्यालय ने आख़िरकार सीधा आदेश दे ही दिया। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को निर्देश दिया कि कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजन को दी जाने वाली आर्थिक मदद के न्यूनतम मानदंड के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

जबकि न्यायालय ने केंद्र की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि आपदा पीड़ितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 में अंग्रेजी के शब्द ‘शैल’ (जाएगा) की जगह ‘मे’ (सकता है) पढ़ा जाए।

डीएमए, 2005 की धारा 12 राहत के न्यूनतम मानकों के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करती है और एक भाग कहता है कि राष्ट्रीय प्राधिकरण आपदा से प्रभावित व्यक्तियों को राहत के न्यूनतम मानकों के लिए दिशा-निर्देशों की सिफारिश करेगा, ‘‘जिसमें जीवन के नुकसान के लिए अनुग्रह राशि शामिल होगी और घरों को नुकसान के लिए तथा आजीविका के साधनों की बहाली के लिए सहायता शामिल होगी और अन्य आवश्यक राहत भी हो सकती है।’’

केन्द्र ने दलील दी थी कि आपदा पीड़ितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 में अंग्रेजी के शब्द ‘शैल’ (जाएगा) की जगह ‘मे’ (सकता है) पढ़ा जाए और इसे ‘‘विवेकाधीन’’ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए और इसे ‘‘अनिवार्य’’ के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए और प्रावधान की शाब्दिक व्याख्या नहीं होनी चाहिए क्योंकि कानून के इरादे को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने अधिनियम के प्रावधानों का विश्लेषण किया और कहा कि इसे ‘‘आपदाओं की रोकथाम और शमन प्रभावों के लिए और किसी भी आपदा की स्थिति के लिए समग्र, समन्वित और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए अधिनियमित किया गया है।’’

उच्चतम न्यायालय का फैसला वकील रीपक कंसल और गौरव कुमार बंसल द्वारा दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं पर आया है, जिसमें केंद्र और राज्यों को अधिनियम के तहत प्रावधान के अनुसार कोरोना वायरस पीड़ितों के परिवारों को चार लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एम आर शाह की विशेष पीठ ने कहा कि अदालत आर्थिक मदद की एक निश्चित राशि तय करने का निर्देश केंद्र को नहीं दे सकती लेकिन सरकार कोविड-19 से मारे गए लोगों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक मदद की राशि का न्यूनतम मानदंड, हर पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्धारित कर सकती है।

पीठ ने कहा कि सरकार देश में उपलब्ध संसाधनों तथा धन को ध्यान में रखते हुए एक उचित राशि तय कर सकती है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Supreme Court
Narendra modi
Modi government
Rahul Gandhi
Congress
COVID-19

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