NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ईआईए का मसौदा 22 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित नहीं करने पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा
याचिका में पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) की अधिसूचना 2020 का मसौदा 30 जून से 10 दिन के भीतर संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी 22 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करने के न्यायिक आदेश की कथित तौर पर “जानबूझकर की गई अवज्ञा” के लिए उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
भाषा
11 Aug 2020
कोर्ट

नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर मंगलवार को केंद्र से जवाब मांगा।

याचिका में पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) की अधिसूचना 2020 का मसौदा 30 जून से 10 दिन के भीतर संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी 22 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करने के न्यायिक आदेश की कथित तौर पर “जानबूझकर की गई अवज्ञा” के लिए उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किया जिसे उच्च न्यायालय ने 30 जून को निर्देश दिया था कि वह 10 दिन के भीतर ईआईए 2020 का मसौदा सभी 22 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करना सुनिश्चित करे। साथ ही उन्होंने मंत्रालय से अवमानना की याचिका पर 17 अगस्त तक जवाब मांगा है।

यह आदेश पर्यावरण संरक्षणविद् विक्रांत तोंगड़ की याचिका पर आया है जिन्होंने मंत्रालय पर ‘‘जानबूझ कर अवज्ञा एवं उल्लंघन” करने का आरोप लगाया क्योंकि इसने न तो ईआईए मसौदे का अनुदित संस्करण प्रकाशित किया है न ही ऐसा करने के लिए अदालत से और समय मांगा है।

तोंगड़ की ओर से पेश हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने 30 जून के आदेश में, मसौदा ईआईए के प्रति आपत्ति जताने या टिप्पणी करने के लिए 11 अगस्त तक यह तिथि बढ़ा दी थी और इस मकसद के लिए उसने मंत्रालय से अनुदित संस्करण प्रकाशित करने को कहा था ताकि जनता इसपर प्रतिक्रिया दे सके।

उच्च न्यायालय की खंड पीठ ने 20 जून के आदेश में कहा था कि सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया जिसके लिए मसौदा अधिसूचना प्रकाशित की गई उसके दूरगामी परिणामों को देखते हुए, “हमारा यह मत है कि यह प्रस्तावित अधिसूचना के प्रभावी प्रसार में मददगार साबित होगा अगर इसकी अन्य भाषाओं में अनुवाद की व्यवस्था की जाए कम से कम संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लेखित भाषाओं में।’’

इसने कहा था कि अनुवाद का कार्य केंद्र खुद या जहां संभव हो वहां राज्य सरकारों के सहयोग से करवा सकता है।

अदालत ने कहा था, “ऐसा अनुवाद आज से 10 दिन के भीतर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट के साथ-साथ सभी राज्यों के पर्यावरण मंत्रालयों की वेबसाइट तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट के माध्यम से प्रकाशित होना चाहिए।”

EIA
Environmental impact assessment
Delhi High court
indian Indian languages

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

कॉर्पोरेट के फ़ायदे के लिए पर्यावरण को बर्बाद कर रही है सरकार

दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत

मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं

मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?

ख़बर भी, नज़र भी: भाजपा के अपने ही बाग़ी हुए जा रहे हैं


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License