NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
न्यायालय ने एससी-एसटी संशोधन कानून, 2018 को वैध ठहराया
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करने या वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Feb 2020
SC

दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अनुसूचित जाति-जनजाति संशोधन कानून, 2018 को संवैधानिक रूप से वैध करार देते हुए कहा कि अदालत सिर्फ़ उन मामलों में अग्रिम जमानत दे सकती है जहां पहली नजर में मामला नहीं बनता हो।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अनुसूचित जाति-जनजाति संशोधन कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपने फैसले में कहा कि इस कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करने या वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। 

इस पीठ के एक अन्य सदस्य न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट ने अपने अलग लेकिन सहमति वाले फैसले में कहा कि प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने साथी नागरिक के साथ समता का व्यवहार करने और भाईचारे की अवधारणा को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति भट ने कहा कि इस कानून के तहत यदि पहली नजर में मामला नहीं बनता होगा तो अदालत प्राथिमकी निरस्त कर सकती है और उदारता के साथ अग्रिम जमानत का इस्तेमाल संसद की मंशा को निष्फल कर सकती है।

शीर्ष अदालत ने अनुसूचित जाति और जनजाति संशोधन कानून, 2018 की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत की 2018 की एक व्यवस्था को निष्प्रभावी बनाने के लिए कानून में यह संशोधन किया गया था। इस फैसले में एससी-एसटी कानून के कठोर प्रावधानों को हल्का कर दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने पिछले साल जनवरी में 2018 के संशोधित कानून पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। इस संशोधन के माध्यम से इस प्रावधान को बहाल किया गया था कि इस कानून के तहत दर्ज मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

शीर्ष अदालत ने अपने 2018 के फैसले में सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ इस कानून के कठोर प्रावधानों के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का जिक्र करते हुए कहा था कि इस कानून के तहत दायर शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी।

शीर्ष अदालत की इस व्यवस्था के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे जिनमें कई व्यक्तियों की जान चली गयी थी और अनेक जख्मी हो गए थे।

संसद ने न्यायालय की इस व्यवस्था को निष्प्रभावी करने के लिए नौ अगस्त, 2018 को कानून में संशोधन करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी थी।

बाद में केन्द्र सरकार ने भी मार्च, 2018 के शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की थी।

न्यायालय ने एक अक्टूबर, 2009 को शीर्ष अदालत के मार्च 2018 के फैसले में दिए गए दो निर्देशों को वापस लेते हुए पहले की स्थिति बहाल कर दी थी।

इस कानून में 2018 में संशोधन कर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ अत्याचार के किसी आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत की संभावना खत्म कर दी गई थी और यह भी प्रावधान किया था कि आपराधिक मामला दर्ज करने से पहले किसी प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं होगी और न ही गिरफ्तारी के लिए किसी से अनुमति लेनी होगी।
मायावती ने किया स्वागत

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संशोधन अधिनियम 2018 की संवैधानिक वैधता बरकरार रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। 

मायावती ने ट्वीट किया, ''अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के संघर्ष के कारण ही केन्द्र सरकार ने 2018 में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कानून में बदलाव को रद्द करके उसके प्रावधानों को पूर्ववत बनाए रखने का नया कानून बनाया था, जिसे आज उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया है। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कानून को बधाई एवं उनके संघर्ष को सलाम। न्यायालय के फैसले का स्वागत।''

SC/ST के संघर्ष के कारण ही केन्द्र सरकार द्वारा सन् 2018 में SC/ST Act में बदलाव को रद्द करके उसके प्रावधानों को पूर्ववत बनाए रखने का नया कानून बनाया गया था, जिसे आज मा. सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है SC/ST Act को बधाई व उनके संघर्ष को सलाम कोर्ट के फैसले का स्वागत।

— Mayawati (@Mayawati) February 10, 2020

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Supreme Court
SC/ST Act
SC/ST
SC/ST Prevention of Atrocities Act
Constitutional right
MAYAWATI
BSP

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • Red Volunteers
    संदीप चक्रवर्ती
    बंगाल ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने के लिए आगे आये ‘रेड वालंटियर्स’
    15 Jan 2022
    जलपाईगुड़ी जिला अस्पताल में दुर्घटना में घायल यात्रियों को यथासंभव मदद पहुंचाने के लिए आपातकालीन स्थिति में रक्तदान करने के लिए करीब चालीस रेड वालंटियर्स फौरन पहुंचे।  
  • yogi
    एम.ओबैद
    दलितों के ख़िलाफ़ हमले रोकने में नाकाम रही योगी सरकार
    15 Jan 2022
    पिछले साल जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में उत्तर प्रदेश में साल 2020 में दलितों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यहां 12,714 मामले (25.2 प्रतिशत) दर्ज किए गए थे।
  • tubnisia
    काथरिन स्काएर, तारक गुईज़ानी
    ट्यूनीशिया: पहली डिजिटल राजनीतिक सुझाव प्रक्रिया पर लोगों में मत-विभाजन
    15 Jan 2022
    नए संविधान पर लोगों से डिजिटल तरीके से राजनीतिक सुझाव बुलवाए गए हैं। यह ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति काएस सईद का राजनीतिक संकट से निकलने का रास्ता हो सकता है। लेकिन सईद की मंशा की तरह, इस ऑनलाइन सुझाव…
  • Turkey
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या अमेरिका और यूरोप के करीब आ रहा है तुर्की?
    15 Jan 2022
    लेकिन, हक़ीक़त यह है कि पश्चिम तुर्की को तो स्वीकार कर सकता है, लेकिन क्या वे एर्दोगन को स्वीकार करेगा?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,68,833 नए मामले, 402 मरीज़ों की मौत
    15 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 3.85 फ़ीसदी यानी 14 लाख 17 हज़ार 820 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License