NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
तो क्या अब पूरा समाज खुली जेलों में बदल डाला जाएगा?
ख़बर है कि छतरपुर डीएम ने कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए ज़रूरी उपाय मसलन, मास्क न पहनने वालों को क़रीब 10 घंटे की खुली जेल में रखे जाने का प्रावधान किया है।
सत्यम श्रीवास्तव
23 Nov 2020
MP Police
फोटो साभार: शिवेंद्र शुक्ला

बीते रोज़ यानी 22 नवंबर 2020 को एक खबर और एक आदेश सोशल मीडिया पर शाया हुआ। यह खबर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से आयी। ख़बर ये है कि छतरपुर ज़िले के जिला दंडाधिकारी (District Magistrate) की हैसियत से श्री शीलेन्द्र सिंह ने कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए ज़रूरी उपाय मसलन, मास्क न पहनने वालों को क़रीब 10 घंटे की खुली जेल में रखे जाने का प्रावधान किया है।

जिला मुख्यालय और छतरपुर शहर में स्थित बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम जो कभी राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल टूर्नामेंट के लिए विख्यात रहा है और अन्य महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों का गवाह रहा है अब खुली जेल में तब्दील किया जा रहा है।

जिला कलेक्टर ने यह आदेश महामारी अधिनियम, 2005 यथा संशोधित 2020 में निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया है। इस आदेश के माध्यम से उन्होंने शहर के बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम का अधिग्रहण करते हुए कोरोना प्रोटोकाल का इस्तेमाल न करने वाले नागरिकों को विधिसम्मत दंड देने व उनकी गतिविधियों को निरुद्ध करने के उद्देश्य से अस्थायी कारागार में बादल दिया है।

इस अस्थायी कारागार में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अन्य संबंधित विभागों को भी ज़िम्मेदारी दी गयी है जिसमें, शौचालय, साफ सफाई, बिजली आदि का ज़िक्र है लेकिन जो नागरिक इस अस्थायी कारावास में रहेंगे उनके लिए भोजन आदि की व्यवस्था किए जाने का ज़िक्र नहीं है। इसके अलावा इस अस्थायी कारवास में नागरिकों को कितने समय रखा जाएगा? इसका भी ज़िक्र आदेश में नहीं है। बहरहाल। शहर में इस अस्थायी जेल और अचानक से कोरोना के खिलाफ सक्रिय हो चुकी प्रशासनिक इच्छा शक्ति और सख्ती को लेकर शहर के नागरिकों में दहशत देखी जा रही है।

कल से ही सड़कों पर पुलिस की सक्रियता देखी जा रही है जो राह चलते लोगों पर फाजिल हो रही है। बंसल न्यूज़ से जुड़े पत्रकार शिवेंद्र शुक्ला कहते हैं कि- ‘देर शाम की बैठक में तुगलकी निर्णय लिया जाता है कि कल से बिना मास्क वालों को खुली जेल में 10 घंटे रखा जाएगा। अगले दिन से चौराहों पर पुलिस बल और राजस्व के अधिकारी तैनात हो जाते हैं और फिर नागरिकों को अपराधी बनाए जाने की मुहिम शुरू हो जाती है। इसके साथ ही वैध अवैध जुर्माना वसूली की मुहिम भी शुरू हो जाती है।’

शिवेंद्र आगे जोड़ते हैं - शहर के लोग गिड़गिड़ाने और खुशामद करते हुए देखे जाने लगे। इस मुहिम में पुलिस ने किसी को नहीं छोड़ा- कुछ मामलों में आकस्मिक चिकित्सा के लिए जाते परिजनों को भी पकड़ा। खुली जेल के नाम पर शहर के लोगों में डर बैठाया जा रहा है। जिला प्रशासन के इस कदम पर लोगों का कहना है कि ‘नेताओं पर कोई नियम नहीं चलता सिर्फ जनता ही निशाना बनाई जाती है। राजस्व वसूलने के लिए भी ये अच्छा माध्यम आपदा में अवसर बन गया है।’

यह महज़ एक बानगी है कि कैसे महामारी अधिनियम और आपदा प्रबंधन के बहाने नागरिक अधिकारों व नागरिक स्वतन्त्रता के तमाम सांवैधानिक प्रावधानों का मखौल बनाया जा रहा है। प्रशासन की मुस्तैदी इसलिए भी लोगों को पसंद नहीं आ रही है क्योंकि हाल ही में इसी जिले की बड़ामलहरा निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा के उपचुनाव के दौरान खुद मध्य प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने कोरोना को लेकर गंभीर लापरवाहियाँ दिखलायीं। हजारों की संख्या में लोग चुनावी सभाओं में शामिल हुए और यही जिला दंडाधिकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका में बिना मास्क लगाए उस भीड़ को देखते रहे।

ठीक ऐसी ही खबरें मध्य प्रदेश के उज्जैन, विदिशा, इंदौर, भोपाल से भी आ रही हैं जहां नागरिकों को मास्क न पहनने के लिए सख्ती से दंडित किया जा रहा है।

सत्ता में पुनर्वापसी के बाद भाजपा नीत प्रदेश सरकार अपने नागरिकों के खिलाफ इस कदर सख्त होती जा रही है और पूरा नियंत्रण नौकरशाही के अधीन किया जा चुका है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि मध्य प्रदेश में सत्ता के अपहरण और बलात एक चुनी हुई सरकार को पदच्युत करने के कारण ही देश में कोरोना संक्रमण इस अनियंत्रित दिशा में पहुँच गया है। जब केंद्र सरकार को कोरोना को देखते हुए सख्त कदम उठाने और आवश्यक तैयारियां करने की ज़रूरत थी उस समय वो मध्य प्रदेश के कांग्रेसी विधायकों को पर्यटन करा रही थी और शिवराज सिंह की ताजपोशी के बाद कोरोना पर ध्यान केन्द्रित किया गया। इसमें भी तैयारियों से ज़्यादा ज़ोर नागरिकों की सामान्य आवाजाही और कार्य-गतिविधियों को बलात नियंत्रित करने की ही कोशिशें हुईं।

देशव्यापी लॉकडाउन में पुलिस और पैरा फोर्सेस को जिस तरह से असीमित शक्तियाँ दी गईं उसकी परिणति इसी तरह के तानाशाही पूर्ण फैसलों में होना तय थी। लॉकडाउन में पुलिस की निर्ममता पूर्ण कार्यवाहियों के दृश्य लंबे समय तक सामाजिक जीवन में देखे जाते रहे हैं। अब जब सरकार ने पूरी तरह से लॉकडाउन खोल दिया है और नागरिकों का जीवन पटरी पर लौट रहा है ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर के बहाने उन्हें फिर से उत्पीड़ित करने मुहिम छेड़ी जा रही है।

माना जा रहा है कि देश के लोग कोरोना को लेकर गंभीर नहीं हैं और उससे बचाव के उपायों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। यह तर्क आम तौर पर सरकारों व नौकरशाहों की तरफ से आ रहे हैं। ऐसे में छतरपुर जिले के लोगों की बात में देश के तमाम नागरिकों की बात भी निहित है कि -खुद सरकार इसे लेकर कितना गंभीर है? और वो नौकरशाह भी कितना गंभीर हैं? हाल ही में बिहार चुनावों के दौरान सरेआम बड़े पैमाने पर कोरोना प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ाई गईं। मध्य प्रदेश उपचुनावों को लेकर भी सरकार द्वारा ऐसा संदेश दिया गया कि कोरोना जैसे खत्म हो गया है और चुनावी सभाओं में भी इन सुरक्षा उपायों का न्यूनतम पालन नहीं किया गया। ऐसे में हर समय केवल जनता को दोष देना कितना उचित है?

सवाल मध्य प्रदेश की पुनर्नवा भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर भी हैं। अगर कोरोना की दूसरी लहर प्रदेश में आ चुकी है और इसे पहले से ज़्यादा खतरनाक बताया जा रहा है तब क्या राज्य सरकार की प्राथमिकता में गौ-केबिनेट की बैठक होगी, लव-जिहाद जैसे वायवीय मुद्दे को लेकर कानून का मसौदा बनाने की होगी? लेकिन यही सच है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी तरह की पहली गौ-केबिनेट बनाकर गौ-वंश के अधिकारों और उनकी सुरक्षा, पोषण आदि को लेकर नागरिकों पर गाय-सेस लगाने का प्रस्ताव दे रहे हैं। विधि व गृह मंत्री की प्राथमिकताओं में आज ‘अ सूटेबल ब्याय’ पर आधारित सीरीज के कुछ दृश्य भी आए गए हैं जिन पर कठोरतम कार्रवाई को लेकर वे अपनी मंशाएं ट्वीट के ज़रिए ज़ाहिर कर रहे हैं। इससे पहले इन्हीं विधि व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक तौर पर मास्क न लगाने की बात कही थी। बाद में प्रधानमंत्री का (न कि कोरोना का) हवाला देते  हुए उन्होंने अपने उस बयान पर माफी मांगी थी।

सवाल ये भी है कि केवल नागरिकों के व्यवहार पर पाबंदी लगाकर कोरोना जैसी महामारी से निपटा जा सकता है और नागरिक व्यवहार पर पाबन्दियाँ ही एकमात्र उपाय रह गया है और इसे केवल कानून-व्यवस्था के मामले के तौर पर देखा जाना चाहिए? इन पाबंदियों के शोर में सरकारें व नौकरशाह यह भूल रहे हैं कि कोरोना अनिवार्यता एक स्वास्थ्य संबंधी मामला है जिसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने और नागरिकों को कोरोना से बचाव के उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किए जाने की ज़रूरत है। क्या वाकई कोरोना ने सत्ता व नागरिकों के बीच की संवाद की शैली हमेशा हमेशा के लिए बदल दी है और अब नागरिकों से संवाद केवल दंडात्मक होगा। बिना दंड दिये या दंड कि बात किए नागरिकों से सरकार और प्रशासन का कोई संबंध नहीं बचा है?

(सत्यम श्रीवास्तव स्वतंत्र लेखक-पत्रकार हैं।)

Madhya Pradesh
Chatarpur
DM Shilendra Singh
COVID-19
Coronavirus
Pandemic Coronavirus
Lockdown
MP police
Social Media

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • beedi worker
    सतीश भारतीय
    बीड़ी कारोबार शरीर को बर्बाद कर देता है, मगर सवाल यह है बीड़ी मजदूर जाएं तो जाएं कहां?
    05 Feb 2022
    मध्यप्रदेश का सागर जिला जिसे बीड़ी उद्योग का घर कहा जाता है, वहां बीड़ी कारोबार नशा से बढ़कर गरीब आवाम की रोजी-रोटी का सहारा है। उन्हें बीड़ी कारोबार से बाहर निकालकर गरिमा पूर्ण जीवन मुहैया करवाने के…
  • handloom
    मोहम्मद ताहिर
    ग्राउंड रिपोर्ट : जिस ‘हैंडलूम और टेक्सटाइल इंडस्ट्री' को PM ने कहा- प्राइड, वो है बंद होने की कगार पर
    05 Feb 2022
    देश के प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिन पहले हैंडलूम सेक्टर को मेरठ का ’प्राइड’ कहा था। न्यूज़क्लिक ने जब इस सेक्टर की पड़ताल की तो पता चला कि ये सेक्टर अपने सबसे ख़राब दिनों से गुजर रहा है। जिसकी…
  • up elections
    एस एन साहू 
    यूपी चुनाव: क्या पश्चिमी यूपी कर सकता है भाजपा का गणित ख़राब?
    05 Feb 2022
    पश्चिमी यूपी में 10 फरवरी, 2022 को होने वाला पहले चरण का चुनाव, शेष चरणों के लिए भी काफी महत्व रखता है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से, पश्चिमी यूपी में अधिकांश विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने वाला राजनीतिक…
  • up chunav
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: कांस्य युग में फंसा एक द्वीपनुमा गांव
    05 Feb 2022
    उत्तरप्रदेश में चुनाव प्रचार चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों को अभी तक उनके क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बारे में पता तक नहीं चल पाया है। इसके पीछे की वजह है-बुनियादी सुविधाओं का अभाव। 21वीं…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1.28 लाख नए मामले, 1,059 मरीज़ों की मौत
    05 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,27,952 नए मामले सामने आए हैं | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 20 लाख 80 हज़ार 664 हो गयी है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License