NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
यह स्मृति को बचाने का वक़्त है
हमसे कहा जा रहा हैः हम सब-कुछ भूल जायें। हम पॉलिटिक्स न करें। जिसने देश को मुर्दाघर बना दिया—उसके साथ बैठकर विकास की बात करें। यही वो वक़्त हैः जब स्मृति को बचाने के लिए हमें हमलावर होना चाहिए।
अजय सिंह
18 May 2021
यह स्मृति को बचाने का वक़्त है

कई तरह की बीमारियां लायी गयी हैं: हमारी स्मृति को धुंधला कर देने, फिर उसे नष्ट कर देने के लिए।

बीमारियां आसमान से नहीं टपकतीं, न वे ख़ुद-ब-ख़ुद हवा में तैरती चली आती हैं। उन्हें सोच-समझकर लाया जाता है। और फिर तोप के गोले की तरह लोगों पर दाग दिया जाता है। और कहा जाता है लोगों सेः तुम सब-कुछ भूल जाओ, सिर्फ़ बीमारी और उसके ख़ौफ़ और अपनी मौत के बारे में सोचो, कारणों के बारे में बात तक न करो।

यह सवाल न करो कि बीमारियों से कौन फ़ायदा उठा रहा है। कौन अकूत मुनाफ़ा कमा रहा है। कौन प्रति घंटा 90 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है। कौन जानलेवा हथियारों, घातक क़ानूनों से लैस हो रहा है। कौन है वह जो सारे लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करता हुआ आपदा को अवसर की तरह भुना रहा है। कौन है वह जो देश को क़ब्रिस्तान, जलती चिता बना रहा है और देश को लगातार बेच भी रहा है।

इस पर बात न करो।

अगर ऐसा न हो तो ज़हरीले शासक वर्ग का काम कैसे चले। अगर ऐसा न हो तो लूटपाट करनेवाले अश्लील पूंजीपतियों का काम कैसे चले।

बीमारी दुनिया भर के सरमायेदारों और हरामज़ादे थैलीशाहों के लिए दुधारू भैंस है।

हमसे कहा जा रहा हैः हम सब-कुछ भूल जायें। हम पॉलिटिक्स न करें। जिसने देश को मुर्दाघर बना दिया—उसके साथ बैठकर विकास की बात करें।

यही वो वक़्त हैः जब स्मृति को बचाने के लिए हमें हमलावर होना चाहिए। हमें कहना चाहिएः हत्यारों, जनसंहार रचाने वालो, स्मृति का ध्वंस करनेवालो, भारत छोड़ो! सफ़ेद दाढ़ी की आड़ में रक़्त की नदी बहाने वालो, तुम सबको अरब सागर में फेंक दिया जाना चाहिए!

ऐसे में हमें अपने देश को नये सिरे से ढूंढ़ना चाहिए।

यही वो वक़्त है जब हम कश्मीर को याद करें। कश्मीर की जनता 5 अगस्त 2019 से लगातार कर्फ़्यू, लॉकडाउन, घेराबंदी, तलाशी, फ़र्ज़ी मुठभेड़, सेना की गोलीबारी के बीच रह रही है। किस तरह रह रही है। हम उसके साथ खड़े हों। उसके असह्य दुख और यातना को महसूस करें। और कश्मीर को कश्मीर की जनता को कभी अपने दिमाग़ी नक़्शे से गायब न होने दें।

यही वो वक़्त है जब हम भीमा कोरेगांव को याद करें। याद करें उन 16 आला दिमाग़ों को जो वर्षों से जेलों में बंद हैं। सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने ग़रीबों के लिए लड़ाई लड़ी। सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने न्याय का पक्ष लिया। सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने सत्ता से सवाल किया। और ज़ालिम तानाशाह का हुक़्म मानने से इनकार किया। भीमा कोरेगांव अब सिर्फ़ एक जगह का नाम नहीं।

यही वो वक़्त है जब हम शाहीन बाग़ को याद करें। यानी नये भारत की खोज की मुहिम। जिसने देश के संविधान की प्रस्तावना की ओर हमारा ध्यान दिलाया। जिसे 70 सालों से भुलाया जा चुका था। विस्मृति के ख़िलाफ़ सभी नागरिकों को एकजुट करने की कारगर लड़ाई का मैदान बना शाहीन बाग़। ब्राह्मणी पितृसत्ता के ख़िलाफ़ औरतों की तनी मुट्ठियां।

यही वो वक़्त है जब हम दिल्ली हिंसा फ़रवरी 2020 को न भूलें। यह सिर्फ़ और सिर्फ़ मुसलमानों का क़त्लेआम था। बड़ी सरकार की सरपरस्ती में। जब क़त्लेआम करा रही बड़ी सरकार तब छोटी सरकार हाथ बांधे खड़ी थी। वह इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही थी। उसका मौन इस भयानक अपराध में भागीदार था। जो इस हिंसा के शिकार हुए, जिन्होंने इस हिंसा को रोकने की कोशिश की, ऐसे कई नौजवान स्त्री-पुरुष साथियों को झूठा-बेबुनियाद आरोप लगाकर जेलों में डाल दिया गया। इनमें मुसलमानों की संख्या ज़्यादा। दिल्ली हिंसा ने एक बार फिर बतायाः हिंदुस्तान में मुसलमान होना किसी गुनाह से कम नहीं। हिंदुस्तान में इंसाफ़पसंद होना किसी गुनाह से कम नहीं।

यही वो वक़्त है जब हम दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन व जत्थेबंदी को याद करें। और उसके साथ जुड़ें। तीन किसान-विरोधी कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ 26 नवंबर 2020 से जारी यह किसान आंदोलन लोकतंत्र के विस्तार का सुनहरा संकेत है। इस आंदोलन ने शायद पहली बार बतायाः सिर्फ़ ‘किसान भाई’ ही नहीं होते, ‘किसान बहनें’ भी होती हैं। और उनकी अगुआ भूमिका होती है। कई तरह की दिक्कतें हैं जटिलताएं हैं। लेकिन यह किसान आंदोलन नयी इबारत लिख रहा है।

यही वो वक़्त है जब दिल्ली के रीगल बस स्टैंड को याद किया जाये। यहां दिल्ली परिवहन निगम की 9 नंबर की बस से एक नौजवान लड़की उतरती थी। एक नौजवान लड़का उसका इंतजार करता होता था। वे दोनों इंडियन कॉफ़ी हाउस में हॉट कॉफ़ी पीते। कभी जेब में कुछ ज़्यादा पैसे हुए एक प्लेट सांबर-वड़ा मंगा लिया जाता। उसी से उन दोनों का काम चल जाता। उन दिनों इंडियन कॉफ़ी हाउस प्रेम साहित्य कला राजनीति का नायाब अड्डा होता था। वह पवित्र आवारागर्दों का पता-ठिकाना होता था।

यही वो वक़्त है जब जिंदा रहने आगे लड़ने के लिए नये प्रेम की संभावना तलाशी जाये। और पुराने सभी प्रेमों को पुनर्जीवित किया जाये। प्रेम करने का सिलसिला बिना रुके जारी रहना चाहिए। यही चीज़ हमें बचायेगी। हमारी स्मृति को बचायेगी।

(लेखक वरिष्ठ कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

COVID-19
Coronavirus
farmers protest
Protest against CAA
BJP
Modi government
Narendra modi
Modi Govt Failure

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • भाषा
    कांग्रेस की ‘‘महंगाई मैराथन’’ : विजेताओं को पेट्रोल, सोयाबीन तेल और नींबू दिए गए
    30 Apr 2022
    “दौड़ के विजेताओं को ये अनूठे पुरस्कार इसलिए दिए गए ताकि कमरतोड़ महंगाई को लेकर जनता की पीड़ा सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं तक पहुंच सके”।
  • भाषा
    मप्र : बोर्ड परीक्षा में असफल होने के बाद दो छात्राओं ने ख़ुदकुशी की
    30 Apr 2022
    मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को घोषित किया गया था।
  • भाषा
    पटियाला में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं, तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला
    30 Apr 2022
    पटियाला में काली माता मंदिर के बाहर शुक्रवार को दो समूहों के बीच झड़प के दौरान एक-दूसरे पर पथराव किया गया और स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ी।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    बर्बादी बेहाली मे भी दंगा दमन का हथकंडा!
    30 Apr 2022
    महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन जैसे मसले अपने मुल्क की स्थायी समस्या हो गये हैं. ऐसे गहन संकट में अयोध्या जैसी नगरी को दंगा-फसाद में झोकने की साजिश खतरे का बड़ा संकेत है. बहुसंख्यक समुदाय के ऐसे…
  • राजा मुज़फ़्फ़र भट
    जम्मू-कश्मीर: बढ़ रहे हैं जबरन भूमि अधिग्रहण के मामले, नहीं मिल रहा उचित मुआवज़ा
    30 Apr 2022
    जम्मू कश्मीर में आम लोग नौकरशाहों के रहमोकरम पर जी रहे हैं। ग्राम स्तर तक के पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर जिला विकास परिषद सदस्य अपने अधिकारों का निर्वहन कर पाने में असमर्थ हैं क्योंकि उन्हें…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License