NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
डीयू : एडहॉक टीचरों को हटाने के ख़िलाफ़ हड़ताल, वीसी दफ़्तर का घेराव
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजीव रे ने कहा कि हज़ारों एडहॉक शिक्षकों को नौकरी से बेदख़ल करना अमानवीय है और शिक्षक इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Dec 2019
हड़ताल पर शिक्षक

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शिक्षकों ने स्थायी पदों पर अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में जारी परिपत्र के विरोध में बुधवार को कुलपति कार्यालय का घेराव किया।

वाइसरीगल लॉज इस्टेट में डीयू कुलपति का कार्यालय है। दिल्ली विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (डूटा) के नेतृत्व में शिक्षकों का हुजूम आर्ट्स फ़ैकल्टी से शुरू होकर साइंस फ़ैकल्टी से होता हुआ वीसी कार्यालय पहुँचा जहाँ शिक्षकों ने काफ़ी देर तक प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की।

IMG_9802 (1).jpg

आपको बता दें कि ये पूरा मामला दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों एडहॉक शिक्षकों से जुड़ा है। इन सभी एडहॉक का वेतन रोक दिया गया है और अब इन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है।

इसे भी पढ़ें : छात्रों के बाद अब शिक्षकों पर हमला, डीयू के हज़ारों एडहॉक निकाले गए

शिक्षकों को संबोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजीव रे ने कहा कि हज़ारों एडहॉक शिक्षकों को नौकरी से बेदख़ल करना अमानवीय है और शिक्षक इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए रे ने कहा, “इस पूरी परिस्थिति का ज़िम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन है। शिक्षक संघ की साथ हुई कई बैठकों के बाद भी वीसी अपनी मनमानी पर अड़े हुए है। ऐसी परिस्थिति में जब तक प्रशासन अब्ज़ॉर्प्शन यानी शिक्षकों को बहाल नहीं करते, यह हड़ताल ऐसे ही जारी रहेगी।”

IMG_9782 (1)_0.jpg

दरअसल, शिक्षकों के इस ग़ुस्से के पीछे कई कारण रहे है। धरना देने वाली शिक्षकों में सिमरप्रीत भी है जो दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु गोबिंद कॉलेज ऑफ़ कामर्स में पढ़ाती है। वे बताती हैं, “ प्रशासन ने एक झटके में हज़ारों शिक्षकों को नौकरी से बाहर निकल दिया। ये शिक्षक कई सालों से कॉलेजों को अपनी सेवाएँ देते रहे है। इनकी सेवा शर्तें इतनी ख़राब हैं कि किसी को सामाजिक सुरक्षा नसीब नहीं है। महिला शिक्षकों को डिलीवरी के एक हफ़्ते के बाद ही नौकरी जॉइन करनी पड़ती है। फिर भी शिक्षक काम करते रहे। ऐसे में हमारी जीविका पर ख़ासा असर पड़ेगा। किसी को घर की ईएमआई देनी है तो किसी को बच्चों की फ़ीस देनी है। ऐसी परिस्थिति में बिना बहाली के आदेश के हम वापस नहीं जाएँगे।"

दयाल सिंह कॉलेज के शिक्षक राजीव कुँवर बताते है कि वर्तमान परिस्थिति की जड़ें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निहित हैं। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए उन्होंने कहा, “नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति हर कॉलेज को स्वायत्त बनाने की वकालत करती है। साथ ही, कॉलेजों को अपने संसाधन अब ख़ुद जुटाने होंगे। ऐसी परिस्थिति में यह स्वाभाविक है कि बच्चों को अब काफ़ी ज़्यादा फ़ीस देनी होगी। यह ऐसा ही है जिसके पास पैसा है वो शिक्षा ख़रीद पाएगा जिसके पास नहीं है वो अशिक्षित ही रहेंगे। यह मौजूदा संविधान के प्रावधानों के ख़िलाफ़ है।”

शिक्षकों के बीच व्याप्त रोष की दूसरी वजह आरक्षण से जुड़ी हुई है। दरअसल, गेस्ट टीचरो की नियुक्ति में किसी भी आरक्षण संबंधी नियमों का कोई पालन नहीं होता। दौलतराम कॉलेज की शिक्षिका रितु बताती हैं कि नई व्यवस्था से दलित और आदिवासी विश्वविद्यालयों से बाहर हो जाएँगे। उन्होंने कहा,”आरक्षण पर पहला हमला 13 सूत्री रोस्टर के रूप में हुआ। बड़े विरोध के बाद हम पुरानी व्यवस्था पर लौटे। नई व्यवस्था संविधान द्वारा दी गयी सुरक्षा को ख़त्म कर देगी। आप इस बात से समझिए कि निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू नहीं होता। अब ये यही व्यवस्था विश्वविद्यालयों पर थोपना चाहते हैं।”

ख़बर लिखे जाने तक शिक्षकों और प्रशासन का गतिरोध जारी है और हड़ताली शिक्षक वीसी लॉज में जमे हुए हैं।

आपको बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (डूटा) ने हड़ताल पर जाने का फैसला डीयू के 28 अगस्त को जारी परिपत्र के आधार पर किया, जिसमें कहा गया है कि मौजूदा शैक्षाणिक सत्र में स्थायी नियुक्तियों के पद पर केवल अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है। शिक्षक परिपत्र को वापस लिए जाने और एडहॉक यानी तदर्थ शिक्षकों को शामिल करने के लिए नियमन की मांग कर रहे हैं ।

 

DUTA
DUTA protest
DUTA strikes
Delhi University
Ad hoc teacher
guest teacher

Related Stories

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

डीयू के छात्रों का केरल के अंडरग्रेजुएट के ख़िलाफ़ प्रोफ़ेसर की टिप्पणी पर विरोध

डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध

प्रत्यक्ष कक्षाओं की बहाली को लेकर छात्र संगठनों का रोष प्रदर्शन, जेएनयू, डीयू और जामिया करेंगे  बैठक में जल्द निर्णय

डूटा ने ‘पैटर्न ऑफ असिस्टेंस’ दस्तावेज़ के ख़िलाफ़ कुलपति कार्यालय पर किया प्रदर्शन

दिल्ली: डीयू के शिक्षकों का हल्ला बोल, मुख्यमंत्री आवास तक मार्च

दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने वेतन नहीं मिलने के विरोध में की हड़ताल

डीयू खोलने की मांग को लेकर छात्रों की 48 घंटे की भूख हड़ताल, पुलिस ने हिरासत में लिया

डीयू के दो और प्रोफ़ेसर को भीमा कोरेगांव मामले में समन, छात्र-शिक्षकों ने किया विरोध

दिल्ली विश्वविद्यालय: आर्ट्स फैकल्टी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर एफआईआर


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    बच्चों में डिप्रेशन की बात हलके में मत लीजिए!
    06 Oct 2021
    कोरोना महामारी वर्षों तक बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित कर सकती है। यूनिसेफ के मुताबिक भारत में 14 फीसदी बच्चें हताश-निराश जीवन यापन कर रहे हैं।
  • pand
    अजय कुमार
    पैंडोरा पेपर्स: अमीरों की नियम-कानून को धता बताने और टैक्स चोरी की कहानी
    06 Oct 2021
    ICIJ का अनुमान है कि टैक्स हेवेन देशों के जरिए दुनिया भर के देशों का तकरीबन 6 ट्रिलियन से लेकर 32 ट्रिलियन डॉलर तक चुरा लिया जा रहा है।
  • water
    मो. इमरान खान
    बिहार: आर्सेनिक के बाद अब भूजल में यूरेनियम संदूषण मिलने से सेहत को लेकर चिंता बढ़ी
    06 Oct 2021
    एक अध्ययन में कहा गया है कि गंगा नदी के दक्षिणी एवं उत्तरी जिले में भौगोलिक रूप से गहरी विषमता है। गंगा के उत्तर के जिलों के बनिस्बत इसके दक्षिणी जिलों में आमतौर पर यूरेनियम की उच्च और आर्सेनिक की कम…
  • menstruation
    प्रार्थना सेन
    महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए नीतिगत सुरक्षा उपायों की बढ़ती ज़रूरत
    06 Oct 2021
    भारत में लोगों के बीच मासिक धर्म से जुड़े किसी भी तरह की चर्चा और महिलाओं पर उनके मासिक धर्म से जुड़ी चिंताओं के सामने नहीं आने के नुक़सानदेह असर की ओर ध्यान दिलाना बेहद ज़रूरी है।
  • चित्र साभारः दैनिक भास्कर
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः खनन विभाग के अधिकारी बालू माफियाओं से सांठगांठ कर अवैध कमाई पर देते हैं ज़ोर
    06 Oct 2021
    पटना, भोजपुर और सारण जिले के 138 घाटों पर बालू के खनन का टेंडर बिहार सरकार ने ब्रॉडसन कंपनी को दिया था। इसके बदले वह हर दिन 3.38 करोड़ रुपए का चालान कटवाकर सरकार को राजस्व देती थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License