NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
डीयू में परीक्षाओं को लेकर छात्र और प्रशासन आमने-सामने, ओपन बुक एग्जाम टले
दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक बार फिर फाइनल इयर/सेमेस्टर के ओपन बुक एग्जाम को आगे खिसका दिया गया है। अब यह परीक्षा 15 अगस्त के करीब हो सकती है। वहीं दूसरी ओर स्टूडेंट्स की मांग है कि एग्जाम कैंसल कर, उन्हें पुरानी परफॉर्मेंस के आधार पर प्रमोट किया जाए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Jul 2020
DU

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने एकबार फिर फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा को 15 अगस्त तक आगे बढ़ाया है। यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दिया। छात्रों द्वारा दायर याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डीयू ने कहा है कि फ़िलहाल 10 जुलाई को होने वाले ओपन बुक एग्जाम को स्थगित करने का फैसला लिया है। वो 15 अगस्त के बाद परीक्षा करा सकता है। वहीं, दूसरी ओर पहले से ही ऑनलाइन परीक्षाओं का विरोध कर रहे छात्र डीयू प्रशासन के इस फैसले के बाद और गुस्से में दिख रहे हैं। उन्होंने साफ कहाकि परीक्षाओं का स्थगन नहीं बल्कि इस वर्ष की परीक्षाओं को समाप्त किया जाए और सभी छात्रों को प्रमोट किया जाए।

कोर्ट ने भी डीयू प्रशासन को लगाई फटकार

कोर्ट ने डीयू प्रशासन को इस बात को लेकर फटकार लगाई कि वो बार बार बिना तैयारी के परीक्षाओं को स्थगित कर आगे बढ़ा रहा है। कोर्ट ने सवाल किया कि बिना तैयारी के उन्होंने 10 जुलाई को परीक्षाएं करने का फैसला क्यों लिया। कोर्ट ने छात्रों की मानसिक स्थिति और प्रशासन के इस रैवये को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि छात्रों को लगातार अधर में डालकर उनके मेंटल ट्रॉमा को डीयू ने बढ़ाया है लेकिन क्यों?

हालांकि प्रशासन इसका ज़बाब नहीं दे सका। अब इस मामले में अगली सुनवाई गुरुवार को होनी है। डीयू की तरफ से कोर्ट में कहा गया है कि वह अब इन परीक्षाओं को 15 अगस्त के बाद कराना चाहती है। परन्तु छात्रों ने इसका भी विरोध किया। डीयू के इस निर्णय को अतार्किक और छात्र विरोधी बताया। विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षाएं 15 अगस्त के बाद हुई तो उनके नतीजे बहुत देरी से आएंगे और कम से कम रिजल्ट अक्टूबर या नवंबर तक आ पाएंगे। ऐसे में छात्र कही और खासतौर पर किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में एडमिशन नहीं ले पाएंगे, क्योंकि बाहर की सभी यूनिवर्सिटीज में सितंबर तक ही रिजल्ट जमा कराना होता है।

देशभर में विरोध ,फिर भी परीक्षा लेने की तैयारी

आपको बता दें कि दिल्ली और देश में इस ऑनलाइन परीक्षाओं को लेकर भारी विरोध हो रहा है। छात्र और शिक्षक इस फैसले का खुलकर विरोध कर रहे हैं। खासतौर पर लगभग सभी छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सहित आधे दर्जन से अधिक राज्यों ने फ़ाइनल ईयर के छात्रों की भी परीक्षा न कराने का निर्णय किया कर लिया है। लेकिन दूसरी ओर अब ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा कराने का मन बना बैठी है। इसको लेकर 6 जुलाई को गृह मंत्रालय ने यूजीसी को हरी झंडी दी जिसके कुछ घंटे बाद ही यूजीसी ने एक नया गाइडलाइन्स जारी किया। जिसमे फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा को कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार के इस नए फरमान का आइसा, एसएफआई, एनएसयूआई सहित देश के तमाम छात्र संगठनों ने विरोध किया और इसे छात्र और शिक्षा विरोधी बताया। इसे लेकर दिल्ली में 7 जुलाई को यूजीसी मुख्यालय पर छात्रों ने संयुक्त रूप से विरोध किया और एक संयुक्त ज्ञापन भी सौंपा ,जिसमे इस नए सर्कुलर को वापस लेने की मांग की गई। दूसरी तरफ ट्वीटर पर भी इसे रद्द करने की मांग जोर शोर से उठाई गई। #StudentsLivesMatters के साथ ही अन्य हैशटैग काफी समय तक ट्रेंड करते रहे है।

sfi (1).PNG

हालांकि संघ से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इसका समर्थन किया है। उनका तर्क है कि छात्रों के बेहतर मूल्यांकन के लिए अंतिम वर्ष का एग्जाम जरूरी है। परन्तु छात्र संगठन पछास ने एबीवीपी द्वारा इस नए सर्कुलर का समर्थन करने पर सवाल उठाए और कहा कि डीयू द्वारा आयोजित करवाए जा रहे OBE से छात्रों का सही मूल्यांकन कैसे होगा? इसका जवाब तो प्रशासन के पास भी नहीं है। कई शिक्षाविदों और खुद डीयू के शिक्षकों द्वारा ओपन बुक एग्जाम (OBE) की उपयोगिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फिर एबीवीपी को इतनी सी बात क्यों समझ नहीं आ रही। डीयू में छात्रों का सिलेबस तक नहीं करवाया गया। अपने घर वापस गए हजारों छात्रों के पास ओपन बुक एग्जाम देने के लिए किताबें नहीं हैं। ऐसे में उनका एग्जाम लेना उन छात्रों के साथ अन्याय है।

छात्र संगठन क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा समय में अंतिम वर्ष के छात्र कोविड-19 महामारी के कारण भारी मानसिक तनाव में हैं, जिस कारण से अधिकतर छात्रों के लिए परीक्षाएँ देना संभव नहीं है। यह भी ध्यान देने की बात है कि परीक्षाओं को लेकर जारी की गयी पूर्व गाइडलाइंस ने भी छात्रों के बीच घबराहट का माहौल पैदा किया था, लेकिन यूजीसी पैनल की अनुसंशा ने परीक्षाओं को पूर्णता रद्द करने का सुझाव था, जिससे छात्रों को बड़ी राहत मिलने की आशा थी। ऐसे में यूजीसी की नयी गाइडलाइंस, जिसके अनुसार छात्रों को सितम्बर माह के अंत में परीक्षाएँ देनी होंगी ने छात्रों की उम्मीदों और आशाओं पर पानी फेर दिया है।

छात्र संगठन एसएफआई ने भी इसका विरोध जताया। इसको लेकर पूरे देश में छात्र संयुक्त छात्र अंदोलन करने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के इस नए निर्णय को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए। उनका पूरा बयान इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं।

एनएसयूआई से जुड़ीं रुचि गुप्ता ने ट्वीट कर कहा कि अगर आईआईटी बॉम्बे फाइनल इयर की परीक्षाएं कैंसिल कर सकता है तो बाकी विश्वविद्यालय ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं। शिक्षा किसी भी परीक्षा से ज्यादा अहम होती है। केंद्र का यह फैसला संकीर्ण नजरिए का है और इससे छात्रों की सेहत खतरे में पड़ सकती है।

tweet.png

एसएफआई दिल्ली के अध्यक्ष सुमित कटारिया ने कुछ गंभीर प्रश्न सरकार से पूछे और कहा कि शासन और प्रशासन आपने छात्रों के साथ विश्वासघात कर रहा है। देश भर के तमाम गरीब छात्र कोरोनावायरस के दौर में कैसे तैयारी करेंगे और 3-4 महीने बाद परीक्षा देने के लिए वापस दिल्ली आएंगे तो उनका खर्च कौन वहन करेगा? एससी/एसटी/ओबीसी, शारीरिक रूप से अक्षम विद्यार्थियों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। उनके पास संसाधन नहीं है।

आगे उन्होंने कहा प्रशासन बिना किसी तर्क के परीक्षा कराने पर अड़ा हुआ है। छात्रों की मानसिक स्थिति के विषय में तो कोई सोच भी नहीं रहा है कि वह किस स्थिति से गुजर रहे है। आगे उन्होंने कहा कि डूटा के सर्वे, तमाम छात्र संगठनों के द्वारा किए गए सर्वे, ज्ञापन, विरोध प्रदर्शन के बावजूद अगर दिल्ली विश्वविद्यालय और यूजीसी ने यह कदम उठाया है और एबीवीपी उसका स्वागत करता है यह निहायत ही निंदनीय है।

Delhi University
DU Exam Cancel
UGC
Delhi High court
SFI
NSUI
Exam Postponed

Related Stories

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

JNU: मांस परोसने को लेकर बवाल, ABVP कठघरे में !

नेट परीक्षा: सरकार ने दिसंबर-20 और जून-21 चक्र की परीक्षा कराई एक साथ, फ़ेलोशिप दीं सिर्फ़ एक के बराबर 

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License