NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
डीयू प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद से पूछताछ, मोबाइल फ़ोन ज़ब्त : लोगों ने कहा- असहमति की आवाज़ कुचलने की साज़िश
अपूर्वानंद ने कहा है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ आंदोलनकारियों का समर्थन करने वालों को हिंसा का स्रोत बताना बहुत चिंताजनक है। उन्होंने मांग की है कि पुलिस सही तरीके से जांच करे और किसी बेगुनाह को न फंसाया जाए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Aug 2020
डीयू प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद

दिल्ली हिंसा की जांच कर रही दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद से पांच घंटे तक पूछताछ की और फिर उनका मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिया। इससे पहले स्पेशल सेल ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से बीते सप्ताह शुक्रवार को 3 घंटे तक पूछताछ की थी। अपूर्वानंद से स्पेशल सेल की पूछ्ताछ को लेकर प्रबुद्ध लोगों ने गंभीर सवाल किये हैं और कहा है कि यह विरोध और असहमति की आवाज़ को कुचलने की साज़िश है।

अपूर्वानंद पर कार्रवाई विरोध की आवाज़ों को दबाने की साज़िश !

प्रो. अपूर्वानंद डीयू में हिंदी पढ़ाने के साथ ही कई अखबारों और डिजिटल वेब पोर्टल के लिए लिखते भी हैं। इसके साथ ही वो टीवी पर राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर भी जाते हैं। अपूर्वानंद, मोदी सरकार की कई नीतियों का खुलकर विरोध करते रहे हैं ,चाहे वो कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने का मामला हो या फिर देश में एनसीआर जैसे प्रवधानों को लागू करने का। कई लोगों का यह भी कहना है कि यही वजह हैं कि उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश की जा रही है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए हैरानी जताई कि सरकार कैसे देश के बुद्धिजीवियों और अपने आलोचकों की आवाज़ को दबाने के लिए पुलिसया दमन का सहारा ले रही है।

कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने भी ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह चौंकाने वाला है लेकिन इसमें आश्चर्य की बात नहीं है। मैं अपूर्वानंद के साथ खड़ा हूं।

shocking but not entirely surprising. i stand in FULL solidarity with you Apoorvanand. https://t.co/CQo2D2NtES

— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 4, 2020

पत्रकार कृष्णकांत ने लिखा कि "ये शर्मनाक है। दंगाइयों को अभयदान देकर, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अध्यापकों और छात्रों का दमन किया जा रहा है।"

ये शर्मनाक है. दंगाइयों को अभयदान देकर, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अध्यापकों और छात्रों का दमन किया जा रहा है. https://t.co/BHtOVwdPA2

— Krishna kant (@krishnakant24) August 4, 2020

इसके साथ योगेंद्र यादव ,लेखक और राजनीतिक विश्लेषक पुरुषोत्तम अग्रवाल, प्रो. हिलाल अहमद जैसे कई अन्य लोगों ने प्रो. अपूर्वानदं के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की और पुलिस के इस कदम की आलोचना की है।

अपूर्वानंद ने क्या कहा?

अपूर्वानंद ने खुद से पूछताछ की पुष्टि करते हुए आज यानी मंगलवार को अपना एक बयान जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि स्पेशल सेल ने कल (सोमवार) उनसे पांच घंटे तक पूछताछ की और उसके बाद जांच के नाम पर उनके मोबाइल फ़ोन को ज़ब्त कर लिया गया। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ आंदोलनकारियों का समर्थन करने वालों को हिंसा का स्रोत बताना बहुत चिंताजनक है।

pic.twitter.com/yBMefa9UU8

— Apoorvanand अपूर्वानंद (@Apoorvanand__) August 4, 2020

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों के साथ जांच में सहयोग से यह उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस एक पूर्ण, निष्पक्ष जांच करेगी। उन्होंने मांग की है कि पुलिस सही तरीके से जांच करे और किसी बेगुनाह को न फंसाया जाए।

उनसे यह पूछताछ उत्तर पूर्व दिल्ली में फरवरी के आखरी सप्ताह में हुई हिंसा के मामले में दर्ज एफआईआर संख्या 59/20 के सिलसिले में हुई।

इससे पहले इसी एफआईआर के तहत जामिया के छात्र मीरान हैदर, सफ़ूरा ज़रगर, पूर्व छात्र शिफाउर्रह्मान खान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की दो छात्रा देवांगना कलिता, नताशा नरवाल को गिरफ्तार किया गया था जिनमें से सफूरा को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानवीय आधार पर जमानत दी है।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में 23 से 26 फरवरी के बीच हिंसा हुई थी, जिसमें 50 से अधिक लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में बीजेपी के कई नेताओं पर भी गंभीर सवाल उठे लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पूरे मामले में एकतरफ़ा कार्रवाई को लेकर पुलिस की भूमिका लगातार सवालों के घेरे में रही है।

Apoorvanand
Delhi riots
Delhi Violence
Anti CAA
Citizenship Amendment Act
DU professor
delhi police

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला

उमर खालिद पर क्यों आग बबूला हो रही है अदालत?


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License