NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
डीयू : छात्र-शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस और एग्ज़ाम के ख़िलाफ़
विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए ऑनलाइन एग्ज़ाम फ़ॉर्मूले के ख़िलाफ़ आज, 20 मई को डूटा के आह्वान पर विरोध किया जा रहा है। डूटा ने अपील की है कि सभी अपनी तस्वीर एक पोस्टर के साथ खींचकर और #DUAgainstOnlineExamination हैशटैग के साथ ट्विटर पर पोस्ट करें। इससे पहले छात्रों ने भी ऑनलाइन एग्ज़ाम के विरोध में #DUAgainstOnlineExams हैशटैग को ट्विटर पर ट्रेंड कराया था।
सूरज सिंह बघेल
20 May 2020
du
image courtesy: twitter

जम्मू-कश्मीर में रह रहीं लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा नजमा वर्तमान में कठिन परिस्थतियों का सामना कर रही हैं। विश्वविद्यालय बंद होने के कारण ऑनलाइन एजुकेशन आ जाने से नजमा को पढ़ाई में काफ़ी दिक़्क़तें आ रहीं हैं। नजमा कहती हैं कि “मैं मिड सेम की छुट्टियों में घर आ गयी थी, तब से मैं यहीं हूँ।” मौजूदा हालात में जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा केवल 2जी नेटवर्क पर चल रही है। इंटरनेट और ऑनलाइन क्लास के जवाब में वह कहती हैं, “जिन लोगों के पास ब्रॉडबैंड कनेक्शन है, उनके लिए इंटरनेट सेवा थोड़ी बेहतर है लेकिन यहाँ ब्रॉडबैंड कनेक्शन मिलना बहुत मुश्किल है, और जैसे हम लोग 2जी चला रहे हैं, उसकी सर्विस बहुत ख़राब है और मेरे लिए इस 2जी नेटवर्क में क्लास कर पाना संभव नहीं है।”

नजमा की इन परेशानियों की वजह महामारी कोविड-19 वैश्विक आपदा के बीच शिक्षा जगत का वर्चुअल दुनिया की तरफ़ चले जाना है। कोविड-19 की वजह से देश भर में लॉकडाउन लागू कर दिया है। ऐसी स्थिति में देश के स्कूल और विश्वविद्यालय ऑनलाइन एजुकेशन की तरफ़ बढ़ रहे हैं। उच्च शिक्षा को जारी रखने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) लगातार सुझाव दे रहा है।

उन्हीं सुझावों में से एक सुझाव ऑनलाइन ओपेन बुक एग्ज़ाम का है। जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने स्थितियों के सामान्य न होने पर आयोजित करने के लिए नोटिस जारी किया है। इसको लेकर 14 मई को नोटिस जारी किया गया था। जिसमें परीक्षा की तारीख़ें जुलाई में तय की गयी थीं। इसके बाद से ही दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएँ काफ़ी परेशान हैं। छात्रों ने अपनी बात ऊपर तक पहुंचाने के लिए #DUAgainstOnlineExams को ट्विटर पर ट्रेंड कराया था।

EYcGEllXkAAs3JP.jpg

आज यानी 20 मई को डूटा ने विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए ऑनलाइन एग्ज़ाम फ़ॉर्मूले के ख़िलाफ़ एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया। इसमें शिक्षकों के इस आह्वान को कई छात्र संगठन जैसे आइसा, एसएफ़आई और केवाईएस सहित कई अन्य संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है। डूटा ने अपील की है कि इस व्यवस्था के ख़िलाफ़ अपनी तस्वीर एक पोस्टर के साथ खींचकर और #DUAgainstOnlineExamination हैशटैग के साथ ट्विटर पर पोस्ट करें।

इसी विषय पर हमने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से बात की, जो फ़िलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में फँसे हुए हैं।

अनमोल प्रीतम दिल्ली विश्वविद्यालय में अंबेडकर कॉलेज के छात्र हैं। वह भी कई छात्रों की तरह मार्च में मिडसेम ब्रेक (दो सेमस्टर के बिच होने वाली छुट्टियाँ) में अपने घर गए थे, जो यूपी के गोरखपुर ज़िले में पड़ता है। वो अभी भी वहाँ फंसे हुए हैं। अनमोल ऑनलाइन क्लासेस ले पाने में असमर्थ हैं। क्योंकि उनके यहाँ नेटवर्क बहुत ख़राब है। अनमोल बताते हैं, "स्थति इतनी ख़राब है कि मैं रात 12 बजे के बाद अपना फ़ोन इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए खोलता हूँ। क्योंकि रात में ही गाँव में स्पीड थोड़ी ठीक रहती है। रात में ही मैं दिनभर कॉलेज ग्रुप में भेजे स्टडी मटेरियल्स को डाउनलोड कर पाता हूँ।

ये समस्या सिर्फ़ अनमोल या नजमा की नहीं है बल्कि इसी तरह की समस्या से डीयू के हज़ारों छात्र-छात्राएँ जूझ रहे हैं। छात्र संगठन आइसा ने दवा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के लगभग 72.2% छात्र कमज़ोर नेटवर्क की वजह से ऑनलाइन क्लासेस नहीं ले पाए हैं।

शिक्षकों ने कहा, 'अभी डीयू ऑनलाइन क्लासेस के लिए तैयार नहीं'

हिन्दी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद ऑनलाइन क्लासेस को महज़ खानापूर्ति बताते हैं। वह कहते हैं, “यह ख़ुद को तसल्ली देने का उपाय है और यूनिवर्सिटी को ऐसा नहीं करना चाहिए।" वह समस्या पर रौशनी डालते हुए कहते हैं कि “जो छात्र अपने गाँव-घर चले गए हैं, वह तो अपने पढ़ने की सामग्री भी लेकर नहीं गए हैं। फिर आप (यूनिवर्सिटी) उनसे यह उम्मीद करें कि वह वहाँ सारी पढ़ाई कर लेंगे, यह अपने आप में फ़िज़ूल बातें हैं।"

मिरांडा हाउस कॉलेज में प्रोफ़ेसर नंदिनी दत्ता ऑनलाइन क्लासेस पर कहती हैं कि “ई-क्लासेस कुछ गिने-चुने बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। कुछ बच्चों के पास वह संसाधन नहीं हैं, कुछ बच्चों के पास ज़रूरी गैजेट्स जैसे लैपटाप या स्मार्टफ़ोन नहीं हैं। और ज़्यादातर बच्चे जो गाँव, रिमोट क्षेत्र या जम्मू-कश्मीर में हैं, उनको नेटवर्क की समस्या है। ऐसे में उनके लिए क्लास कर पाना संभव नहीं है।"

श्यामलाल कॉलेज में इतिहास के प्राध्यापक और दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के कार्यकारी परिषद के सदस्य जितेंद्र कुमार मीणा डीयू के संदर्भ में ऑनलाइन क्लास के आंतरिक पहलुओं बात कहते हैं। वह ऑनलाइन क्लास के बारे में कहते हैं कि “जब से ऑनलाइन क्लास लेने की बात शुरू हुई तो पहली समस्या खड़ी हुई कि शिक्षक और सिलेबस दोनों ही इसके लिए तैयार नहीं हैं तो फिर ऑनलाइन क्लास कैसे लें। हमारा सिलेबस ऐसे तैयार नहीं किया गया है कि उसे ऑनलाइन पढ़ाया जा सके। दूसरी समस्या में संसाधनों का भी अभाव है।"

आगे वो कहते हैं कि “एक शिक्षक के तौर पर ऑनलाइन क्लास लेने के कुछ उपकरण होते हैं, एक स्पेस होता है। इनके अभाव में पढ़ाना सिर्फ़ भाषण देने जैसे हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ़ छात्र और शिक्षक दोनों के घरों में संभव है कि कोई स्कूली छात्र या अन्य छात्र भी हों, ऐसे में उनके पास उस मात्रा में डिवाइसेस उपलब्ध नहीं है कि वह दोनों साथ में क्लास कर सकें। ऐसे में कई बच्चे क्लास नहीं कर पाते हैं।"

जितेंद्र एक छात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहते हैं, "विशेष तौर पर लड़कियों के साथ अलग समस्या है, अगर घर में एक डिवाइस है और घर में पढ़ने वाला एक लड़का व एक लड़की है तो लड़की को डिवाइस नहीं मिलता है। जेंडर पर आधारित भेदभाव यहाँ भी देखने को मिल रहा है। लड़कियों से पूछने पर कि वह कल क्लास में क्यों नहीं आई थीं, वह बताती हैं कि भैया के पास फ़ोन था, या पिताजी कुछ काम कर रहे थे फ़ोन पर।"

इसी तरह की राय नंदिनी दत्ता भी रखती हैं। वह कहती हैं कि “वर्चुअल क्लास लेना इतना आसान नहीं हैं।"

ऑनलाइन एग्ज़ाम को लेकर भी कई गंभीर सवाल!

वहीं ऑनलाइन एग्ज़ाम की बात आते ही छात्र थोड़ा शंकाशील हो जाते हैं। ऑनलाइन एग्ज़ाम को लेकर भी उनके विचार ज़्यादा अलग नहीं हैं। अनमोल से जब हमने पूछा कि क्या वह ऑनलाइन एग्ज़ाम दे पाएंगे तो उन्होंने कहा कि जिस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट ऑनलाइन फ़ॉर्म भरने और रिजल्ट बताने में ही ठप्प पड़ जाती है, वह ऑनलाइन एग्ज़ाम के बारे में सोच भी कैसी सकती है? उन्होंने कहा, "क्या विश्वविद्यालय ने हम जैसे बच्चों के बारे में नहीं सोचा जो सुदूर फँसे हुए हैं।"

अनमोल ने एक विशेष बात पर ज़ोर देते हुए कहा, "नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के जो छात्र दंगे और लॉकडाउन की मार एक साथ झेल रहे हैं, क्या यूनिवर्सिटी को उनकी मानसिक स्थिति का अंदाज़ा है?"

आपको बता दें नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के कॉलेज तो फ़रवरी के आख़िरी हफ़्ते से ही बंद हैं।

नजमा बताती हैं कि वह व्यक्तिगत तौर पर ऑनलाइन एग्ज़ाम को बहुत ही भेदभावपूर्ण मानती हैं। उन्होंने सवाल किया कि "प्रशासन ऐसी आशा कैसे कर सकता है कि हर किसी के पास सही से इंटरनेट सेवा और घर में अच्छा माहौल होगा, जिसमें वह परीक्षा दे सके।"

हालंकि अपूर्वानन्द ऑनलाइन एग्ज़ाम पर अभी कोई राय नहीं रखते हैं। उनका मानना है कि “ऑनलाइन एग्ज़ाम एक बिल्कुल ही नई चीज़ है। कुछ विश्वविद्यालय ने इसका प्रयोग किया है। उन प्रयोगों का अध्ययन होना चाहिए। कुछ छोटी यूनिवर्सिटीज़ ने ऑनलाइन मीडियम का इस्तेमाल कर एग्ज़ाम लिया है लेकिन वह ख़ुद अभी इस प्रक्रिया को समझ रहे हैं।"

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय(एचसीयू) ने एक अनोखा प्रस्ताव अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट के फ़ाइनल ईयर के विद्यार्थियों के लिए दिया है। विश्वविद्यालय ने आख़िरी वर्ष के सभी छात्र-छात्राओं को पास करने की बात कही है। यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि अगर पास करने के लिए दिये गए ग्रेड्स से किसी बच्चे को दिक़्क़त है तो वह बाद में दोबारा एग्ज़ाम दे सकता है।

इसी कड़ी में एक विरोधाभास ये देखने को मिला है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय, हरियाणा के वाइस चांसलर आर. सी. कुहड़ ने अपने विश्वविद्यालय में ऑनलाइन ओपेन बुक परीक्षाएँ आयोजित करने से मना करना दिया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय इसके लिए न तो प्रशिक्षित है और न ही संसाधन से पूर्ण है। हालंकि आर सी कुहड़ ख़ुद परीक्षा और अकादमिक कैलेंडर के लिए गठित यूजीसी पैनल के मुखिया थे।

इन सभी चुनौतियों के बावजूद ऑनलाइन एग्ज़ाम के विकल्पों को खोजने की प्रक्रिया जारी है। अलग-अलग संस्थान अपने विकल्प प्रस्तुत कर रहे हैं। यूजीसी ने स्वयं ऑनलाइन एग्ज़ाम न करा पाने की स्थिति में विद्यार्थी के पूर्व परीक्षाओं के अंकों का औसत अंक देकर उनको अगली कक्षाओं में भेजने का सुझाव दिया है। इसके लिए उसने कुछ नियम तय किए हैं। लेकिन यह सुझाव विश्वविद्यालय अपने अनुरूप अपना रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने भी कुछ ऐसा ही प्रपोज़ल समाजशास्त्र विभाग के लिए दिया है। उसने यह भी कहा है कि यह सुझाव समाजशास्त्र विभाग के अलावा अन्य विभाग के छात्रों के लिए भी अपनाया जा सकता है।

इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ भी बैठक कर अपना प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जिसकी जानकारी मिलने पर स्टोरी अपडेट की जाएगी।

(सूरज सिंह बघेल स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

DUTA
DUAgainstOnlineExamination
Delhi University
Student Protests
teachers protest

Related Stories

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

उत्तराखंड : हिमालयन इंस्टीट्यूट के सैकड़ों मेडिकल छात्रों का भविष्य संकट में

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई


बाकी खबरें

  • इंदौर में "नाम पूछकर" चूड़ी वाले को पीटा, भारी बवाल के बाद मामला दर्ज 
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    इंदौर में "नाम पूछकर" चूड़ी वाले को पीटा, भारी बवाल के बाद मामला दर्ज 
    23 Aug 2021
    इंदौर में कुछ लोगों ने कथित तौर पर फेरी लगाकर चूड़ी बेच रहे 25 वर्षीय व्यक्ति से नाम पूछने के बाद पिटाई कर दी। राज्य के ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस मामले पर कहा, “युवक अपना धर्म छिपा कर और नाम…
  • दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी
    पीपल्स डिस्पैच
    दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी
    23 Aug 2021
    मालीबोंग्वे मडाजो जिन्होंने पांच खनन कंपनियों के 7,000 कर्मचारियों के हड़ताल का नेतृत्व किया था उनकी श्रम विवाद के बीच कमीशन फॉर कॉन्सिलिएशन, मेडिएशन एंड अर्बिट्रेशन (सीसीएमए) के दरवाज़े पर सरेआम…
  • कोरोना
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देश में 25,072 नए मामले, 389 मरीज़ों की मौत
    23 Aug 2021
    करीब 160 दिन बाद उपचाराधीन मरीजों की संख्या सबसे कम दर्ज की गई है।
  • सुंदरवती महिला महाविद्यालय
    सोनिया यादव
    बिहार: चोटी के जरिये पितृसत्ता की बेड़ियों में नहीं बंधना चाहतीं भागलपुर कॉलेज की लड़कियां
    23 Aug 2021
    नए ड्रेस कोड के हर नियम पर छात्राओं की पूरी सहमति है लेकिन बालों में चोटी बांधने वाले फरमान पर उनमें भारी नाराजगी है। उनका मानना है कि यहां मामला मानसिकता का है, जो अब धीरे-धीरे मनुवाद की ओर ले जाने…
  • गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य को PASA के तहत डिटेंशन आदेश पारित करने से रोका
    सबरंग इंडिया
    गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य को PASA के तहत डिटेंशन आदेश पारित करने से रोका
    23 Aug 2021
    अदालत ने कहा कि नागरिकों को इस तरह से अधर में नहीं छोड़ा जा सकता। जीएसटी अपराधों के ऐसे मामलों में, समान स्थिति वाले व्यापारियों के खिलाफ PASA नहीं लगाया जा सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License