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डीयू के छात्रों का केरल के अंडरग्रेजुएट के ख़िलाफ़ प्रोफ़ेसर की टिप्पणी पर विरोध
एसएफ़आई का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दरवाज़े सभी छात्रों के लिए खुले हैं।
रौनक छाबड़ा
09 Oct 2021
DU Students

किरोड़ीमल कॉलेज के एक भौतिकी के प्रोफ़ेसर की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में केरल के छात्रों के लिए "घुसपैठ" जैसे अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करने के कुछ दिनों बाद सैकड़ों छात्रों ने शुक्रवार को कला संकाय भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के "दरवाज़े सभी छात्रों के खुले" हैं।

डीयू में अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए चल रही प्रवेश प्रक्रिया के बीच प्रोफ़ेसर राकेश पांडे ने इस हफ़्ते की शुरुआत में अपने एक फ़ेसबुक पोस्ट में केरल राज्य बोर्ड की ओर से रची जा रही एक साज़िश की बात की, उन्होंने इसे "मार्क्स जिहाद" कहा था।

आरएसएस समर्थित नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ़्रंट (NDTF) के सदस्य पांडे ने पोस्ट किया था, “एक कॉलेज को 20 सीटों वाले कोर्स में 26 छात्रों को सिर्फ़ इसलिए दाखिला देना पड़ा, क्योंकि केरल बोर्ड से पास होने वाले उन सभी छात्रों के 100 फ़ीसदी अंक थे। पिछले कुछ सालों से केरल बोर्ड #MarksJihad चला रहा है।”

स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) की अगुवाई में डीयू के छात्रों ने इस विवादास्पद टिप्पणी की निंदा की और मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन को दाखिला पाने वाले दूसरे राज्य बोर्डों के छात्रों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।

एसएफ़आई ने गुरुवार को आरोप लगाया था कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेज बेवजह केरल राज्य बोर्ड से शीर्ष अंक पाने वालों के "आवेदन खारिज" कर रहे हैं।

इस साल दिल्ली यूवनिवर्सिटी में दाखिला प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद उन ख़बरों के बाद शुरू हो गया था, जिसमें कहा गया था कि यूनिवर्सिटी उन कोर्सों में छात्रों के प्रतिनिधित्व के मुक़ाबले एक क्षेत्रीय विषमता पर नज़र रख रही है, जिसके लिए 12 वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100% अंक ज़रूरी हैं।

पिछले साल कोविड-19 के साये में आयोजित की गयी इंटरमीडिएट परीक्षा में अभूतपूर्व 70,000 से ज़्यादा सीबीएसई छात्र ऐसे थे, जिन्हें 95% से ज़्यादा अंक मिले थे। छात्रों की यह संख्या दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट सीटों की कुल संख्या के बराबर है।

इसी तरह, केरल राज्य बोर्ड ने भी छात्रों को महामारी की पृष्ठभूमि को देखते हुए अच्छे अंक पाने में सहायता करने के लिहाज़ से परीक्षा के स्वरूप को बदलने का फ़ैसला किया था।

इसे देखते हुए द इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को ख़बर दी कि इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में 100% कट-ऑफ़ अंकों वाले 10 कोर्सों में से कम से कम तीन कोर्सों में 95% सीटें केरल राज्य बोर्ड से पास हुए छात्रों से भरी जा रही हैं।

इस रुझान ने कुछ लोगों को यह दावा करने को प्रेरित किया कि यह एक "साज़िश" है। पांडे ने पहले कहा था कि "केरल के छात्रों की डीयू में घुसपैठ हुई है"। हालांकि, एसएफ़आई ने उनके इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि यह केरल राज्य बोर्ड के प्रति "शत्रुता" की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है।

एसएफ़आई-डीयू के संयोजक अखिल केएम ने न्यूज़क्लिक को फ़ोन पर बताया, "हम डीयू के प्रोफ़ेसर की तरफ़ से की गयी इस सामुदायिक टिप्पणी की निंदा करते हैं और उनके ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं। इस तरह की टिप्पणियां अक्सर छात्रों का ध्यान असली मुद्दों से हटाने के लिए की जाती हैं।"

अखिल ने कहा, "बहुत ज़्यादा शुल्क का भुगतान करने के बावजूद छात्रावास की पर्याप्त कमी से 90% से ज़्यादा छात्र परिसर के बाहर रहने के लिए मजबूर हैं, इस पर ध्यान देने के बजाय इन छात्रों को बताया जा रहा है कि इन्होंने सीटें 'हड़प' ली हैं। राज्य के बोर्डों से हो रही उनकी समस्याओं का असली कारण यही है।”

लेडी श्रीराम कॉलेज के एसएफ़आई की महासचिव उन्नीमाया ने न्यूज़क्लिक को बताया कि राज्य के बोर्डों से आने वाले छात्रों को पहले भी इसी तरह के "भेदभाव" का सामना करना पड़ता रहा है। जब छात्र समुदाय ने विरोध किया और प्रशासन ने हस्तक्षेप किया, तभी जाकर डीयू ने कार्रवाई की।

उन्नीमया ने कहा, "हम इस समय केरल बोर्ड के छात्रों के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण टिप्पणी के रूप में जो कुछ देख रहे हैं, उनमें ऐसा कुछ भी नहीं है। यह निंदनीय है। डीयू एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है और इसके दरवाज़े देश भर के सभी छात्रों के लिए खुले हैं, चाहे उनके परीक्षा बोर्ड कुछ भी हों और इसे ऐसा ही रहना भी चाहिए।

गुरुवार को जारी एक बयान में डीयू प्रशासन ने नयी रिपोर्टों के बाद कुछ चुने हुए बोर्डों के उम्मीदवारों का “पक्षपात” करने की कोशिश का खंडन किया। डीयू रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर वाले उसी बयान में निंदा करते हुए कहा गया है: “एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी होने के नाते दिल्ली यूनिवर्सिटी राज्यों और स्कूलों के अलग-अलग बोर्डों के बावजूद सभी उम्मीदवारों की शैक्षणिक साख को बराबरी के साथ अहमियत देती है। इस साल भी योग्यता के आधार पर आवेदन मंज़ूर करते हुए इस बराबरी के मौक़े को बनाये रखा गया है।”

डीयू ने आगे बताया कि गुरुवार के आख़िर तक सीबीएसई बोर्ड के 31,172 उम्मीदवारों, केरल बोर्ड ऑफ़ हायर सेकेंडरी एजुकेशन से 2,365 और हरियाणा में स्कूल शिक्षा बोर्ड से 1,540 उम्मीदवारों को यूनिवर्सिटी में दाखिला दिया गया था। इस साल पहली कट-ऑफ़ सूची में 60,904 उम्मीदवारों ने कॉलेजों में आवेदन किया था, जिनमें से 46,054 छात्र सीबीएसई बोर्ड के थे।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

DU Students Protest Professor’s Remarks Against Kerala Undergraduates

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Students Federation of India
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