NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
डीयू के छात्रों का केरल के अंडरग्रेजुएट के ख़िलाफ़ प्रोफ़ेसर की टिप्पणी पर विरोध
एसएफ़आई का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दरवाज़े सभी छात्रों के लिए खुले हैं।
रौनक छाबड़ा
09 Oct 2021
DU Students

किरोड़ीमल कॉलेज के एक भौतिकी के प्रोफ़ेसर की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में केरल के छात्रों के लिए "घुसपैठ" जैसे अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करने के कुछ दिनों बाद सैकड़ों छात्रों ने शुक्रवार को कला संकाय भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के "दरवाज़े सभी छात्रों के खुले" हैं।

डीयू में अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए चल रही प्रवेश प्रक्रिया के बीच प्रोफ़ेसर राकेश पांडे ने इस हफ़्ते की शुरुआत में अपने एक फ़ेसबुक पोस्ट में केरल राज्य बोर्ड की ओर से रची जा रही एक साज़िश की बात की, उन्होंने इसे "मार्क्स जिहाद" कहा था।

आरएसएस समर्थित नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ़्रंट (NDTF) के सदस्य पांडे ने पोस्ट किया था, “एक कॉलेज को 20 सीटों वाले कोर्स में 26 छात्रों को सिर्फ़ इसलिए दाखिला देना पड़ा, क्योंकि केरल बोर्ड से पास होने वाले उन सभी छात्रों के 100 फ़ीसदी अंक थे। पिछले कुछ सालों से केरल बोर्ड #MarksJihad चला रहा है।”

स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) की अगुवाई में डीयू के छात्रों ने इस विवादास्पद टिप्पणी की निंदा की और मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन को दाखिला पाने वाले दूसरे राज्य बोर्डों के छात्रों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।

एसएफ़आई ने गुरुवार को आरोप लगाया था कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेज बेवजह केरल राज्य बोर्ड से शीर्ष अंक पाने वालों के "आवेदन खारिज" कर रहे हैं।

इस साल दिल्ली यूवनिवर्सिटी में दाखिला प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद उन ख़बरों के बाद शुरू हो गया था, जिसमें कहा गया था कि यूनिवर्सिटी उन कोर्सों में छात्रों के प्रतिनिधित्व के मुक़ाबले एक क्षेत्रीय विषमता पर नज़र रख रही है, जिसके लिए 12 वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 100% अंक ज़रूरी हैं।

पिछले साल कोविड-19 के साये में आयोजित की गयी इंटरमीडिएट परीक्षा में अभूतपूर्व 70,000 से ज़्यादा सीबीएसई छात्र ऐसे थे, जिन्हें 95% से ज़्यादा अंक मिले थे। छात्रों की यह संख्या दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट सीटों की कुल संख्या के बराबर है।

इसी तरह, केरल राज्य बोर्ड ने भी छात्रों को महामारी की पृष्ठभूमि को देखते हुए अच्छे अंक पाने में सहायता करने के लिहाज़ से परीक्षा के स्वरूप को बदलने का फ़ैसला किया था।

इसे देखते हुए द इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को ख़बर दी कि इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में 100% कट-ऑफ़ अंकों वाले 10 कोर्सों में से कम से कम तीन कोर्सों में 95% सीटें केरल राज्य बोर्ड से पास हुए छात्रों से भरी जा रही हैं।

इस रुझान ने कुछ लोगों को यह दावा करने को प्रेरित किया कि यह एक "साज़िश" है। पांडे ने पहले कहा था कि "केरल के छात्रों की डीयू में घुसपैठ हुई है"। हालांकि, एसएफ़आई ने उनके इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि यह केरल राज्य बोर्ड के प्रति "शत्रुता" की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है।

एसएफ़आई-डीयू के संयोजक अखिल केएम ने न्यूज़क्लिक को फ़ोन पर बताया, "हम डीयू के प्रोफ़ेसर की तरफ़ से की गयी इस सामुदायिक टिप्पणी की निंदा करते हैं और उनके ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं। इस तरह की टिप्पणियां अक्सर छात्रों का ध्यान असली मुद्दों से हटाने के लिए की जाती हैं।"

अखिल ने कहा, "बहुत ज़्यादा शुल्क का भुगतान करने के बावजूद छात्रावास की पर्याप्त कमी से 90% से ज़्यादा छात्र परिसर के बाहर रहने के लिए मजबूर हैं, इस पर ध्यान देने के बजाय इन छात्रों को बताया जा रहा है कि इन्होंने सीटें 'हड़प' ली हैं। राज्य के बोर्डों से हो रही उनकी समस्याओं का असली कारण यही है।”

लेडी श्रीराम कॉलेज के एसएफ़आई की महासचिव उन्नीमाया ने न्यूज़क्लिक को बताया कि राज्य के बोर्डों से आने वाले छात्रों को पहले भी इसी तरह के "भेदभाव" का सामना करना पड़ता रहा है। जब छात्र समुदाय ने विरोध किया और प्रशासन ने हस्तक्षेप किया, तभी जाकर डीयू ने कार्रवाई की।

उन्नीमया ने कहा, "हम इस समय केरल बोर्ड के छात्रों के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण टिप्पणी के रूप में जो कुछ देख रहे हैं, उनमें ऐसा कुछ भी नहीं है। यह निंदनीय है। डीयू एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है और इसके दरवाज़े देश भर के सभी छात्रों के लिए खुले हैं, चाहे उनके परीक्षा बोर्ड कुछ भी हों और इसे ऐसा ही रहना भी चाहिए।

गुरुवार को जारी एक बयान में डीयू प्रशासन ने नयी रिपोर्टों के बाद कुछ चुने हुए बोर्डों के उम्मीदवारों का “पक्षपात” करने की कोशिश का खंडन किया। डीयू रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर वाले उसी बयान में निंदा करते हुए कहा गया है: “एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी होने के नाते दिल्ली यूनिवर्सिटी राज्यों और स्कूलों के अलग-अलग बोर्डों के बावजूद सभी उम्मीदवारों की शैक्षणिक साख को बराबरी के साथ अहमियत देती है। इस साल भी योग्यता के आधार पर आवेदन मंज़ूर करते हुए इस बराबरी के मौक़े को बनाये रखा गया है।”

डीयू ने आगे बताया कि गुरुवार के आख़िर तक सीबीएसई बोर्ड के 31,172 उम्मीदवारों, केरल बोर्ड ऑफ़ हायर सेकेंडरी एजुकेशन से 2,365 और हरियाणा में स्कूल शिक्षा बोर्ड से 1,540 उम्मीदवारों को यूनिवर्सिटी में दाखिला दिया गया था। इस साल पहली कट-ऑफ़ सूची में 60,904 उम्मीदवारों ने कॉलेजों में आवेदन किया था, जिनमें से 46,054 छात्र सीबीएसई बोर्ड के थे।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

DU Students Protest Professor’s Remarks Against Kerala Undergraduates

Delhi University
jihad
Cut-off
du admission
SFI
Students Federation of India
CBSE
Kerala
RSS

Related Stories

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

केरल में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत लगभग सभी संस्थान बंद रहे

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!


बाकी खबरें

  • CISCE announces result
    भाषा
    सीआईएससीई ने 10वीं, 12वीं कक्षा के पहले टर्म की बोर्ड परीक्षा के परिणाम की घोषणा की
    07 Feb 2022
    परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित की गईं और कोविड-19 महामारी के मद्देनजर पिछले साल बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने के बाद शैक्षणिक सत्र को दो टर्म में विभाजित किया गया था और एक वैकल्पिक मूल्यांकन योजना का…
  • Shantisree Pandit
    भाषा
    शांतिश्री पंडित जेएनयू की पहली महिला कुलपति नियुक्त की गईं
    07 Feb 2022
    शांतिश्री अभी महाराष्ट्र के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय के राजनीति व लोक प्रशासन विभाग में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर हैं।
  • amit shah
    भाषा
    शाह ने ओवैसी से बुलेट प्रूफ गाड़ी और जेड श्रेणी की सुरक्षा स्वीकार करने का किया आग्रह
    07 Feb 2022
    राज्यसभा में एक बयान में शाह ने उत्तर प्रदेश में ओवैसी के काफिले पर हुए हमले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मामले में विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और इसकी विवेचना की जा रही…
  • up elections
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: धन-बल और सत्ता की ताक़त के शीर्ष पर बैठी भाजपा और विपक्ष का मुक़ाबला कितना? 
    07 Feb 2022
    संसाधनों के मामले में और विशेष रूप से बेनामी संसाधनों के मामले में भारतीय जनता पार्टी का मुक़ाबला करने की हैसियत अभी दूर दूर तक किसी भी दल में नहीं है, लेकिन इस बार तस्वीर 2017 में हुए विधानसभा…
  • dharm sansad
    पुण्य उपाध्याय
    विचार: राजनीतिक हिंदुत्व के दौर में सच्चे साधुओं की चुप्पी हिंदू धर्म को पहुंचा रही है नुक़सान
    07 Feb 2022
    हम सभी ने नक़ली "साधुओं" की कहानियाँ सुनी हैं। लेकिन वर्तमान दौर में इनके ख़िलाफ़ असली महात्माओं की चुप्पी पूरी दुनिया में हिंदू धर्म की छवि को नुक़सान पहुँचा रही है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License