NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोरोना से ख़तरनाक जाति वायरस: दिल्ली में सड़क पर गेट लगाकर दलितों का रास्ता रोका
भेदभाव का नया मामला देश की राजधानी दिल्ली के वसंत विहार में सामने आया है। जहाँ एक सरकारी आवसीय परिसर के लोगों ने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले दलितों का रास्ता रोक दिया। इसके लिए सड़क पे एक गेट लगा दिया गया और जो छोटा रास्ता था वहाँ भी दीवार खड़ी कर दी गई है।
मुकुंद झा
11 Jul 2020
कोरोना से ख़तरनाक जाति वायरस

देश कोरोना माहमारी से गुजर रहा है। इस समय पूरे देश को एकजुटता के साथ इससे लड़ने की ज़रूरत थी। परन्तु इस माहमारी में भी लोगों का सामाजिक शोषण और भेदभाव उसी तरह जारी है।

कोरोना की शुरुआत में हमने देखा कैसे मुसलमानों के खिलाफ पूरे देश में अभियान चलाया गया। इसके बाद हमने देखा कि प्रवासी मज़दूरों को कोरोना कैरियर यानी कोरोना फैलाने वाला बताया जाने लगा। इसी दौरान हमने ये भी देखा कि कई जगह क्वारंटीन सेंटरों में कुछ लोगों ने इसलिए खाना नहीं खाया कि वो किसी दलित ने बनाया था।

अभी भेदभाव का नया मामला देश की राजधानी दिल्ली के वसंत विहार में सामने आया है। जहाँ एक सरकारी आवसीय परिसर के लोगों ने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले दलितों का रास्ता रोक दिया। इसके लिए सड़क पे एक गेट लगा दिया गया और जो छोटा रास्ता था वहाँ भी दीवार खड़ी कर दी गई है।

ये  सब वसंत विहार में चिन्मय पब्लिक स्कूल की ओर बुध बाजार रोड पर किया गया है। यह सड़क सीबीआई कॉलोनी, प्रियंका गांधी कैंप और कुसुमपुर पहाड़ी के पास की झुग्गियों को वसंत विहार में मुख्य सड़क से जोड़ती है।

इस सबके पीछे परिसर के लोगो का कहना है कि उन्होंने ये सब कोरोना को रोकने के लिए किया है। इसको लेकर झुग्गी बस्ती के लोगों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को लिखित में शिकायत की परन्तु कुछ हल नहीं निकला, जिसके बाद 10 जुलाई को उन्होंने इस जातीय और वर्ग आधरित भेदभावों के लिए अनुसूचित जाति आयोग को एक पत्र लिखा है।

आपको बता दें कि जून के अंतिम सप्ताह में केंद्र सरकार के कर्मचारी आवास परिसर के निवासियों की देखरेख में दीवार का निर्माण किया गया था। इसके बाद से ही झुग्गी में रहने वाले लोगो ने इसको लेकर विरोध कर रहे है। इसके बाद ही 27 जून को प्रियंका गाँधी कैंप के लोगों ने साउथ वेस्ट के जिला अधिकारी, वसंत विहार पुलिस स्टेशन और आरके पुरम के स्थानीय विधायक से लिखित शिकायत की थी। लेकिन स्थानीय निवसियों के मुतबिक अभीतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रियंका गाँधी कैंप के प्रधान बृजेश ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि हमने सभी जगह शिकायत की परन्तु किसी ने भी हमारी सुनवाई नहीं की। रोड बंद होने से अब हमें काम पर जाने के लिए काफी दूर घूमकर जाना पड़ता है। वो लोग हमें ऐसे देखतें हैं जैसे हमारे पास कोरोना माहमारी है और हम उनको दे देंगे।

बृजेश ने बताया कि पुलिस ने तो उनके शिकायत पत्र तक को नहीं देखा और कहा बाहर एक पेटी है उसमें पत्र डाल दो, आपको मैसज भेज देंगे। परन्तु आज 14 दिन बीत जाने पर भी कोई ज़वाब नहीं मिला है।

हमने भी वसंत विहार थाने में फोन से संपर्क कर इस शिकायत के बारे में जानने की कोशिश की। इस पर पुलिस वाले ने जवाब दिया कि ये पुलिस स्टेशन है यहां तो शिकायत ही आती है। हमने इस शिकायत को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कोई पुख्ता जवाब नहीं दिया और कहा रीडर ऑफिस के अधिकारी नहीं है। इसके बारे में वही जानकारी देंगे। पूरी बातचीत में एक बात साफ दिख रही थी कि पुलिस इस मामले को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। 

बसंती देवी जो कुसुमपुर पहाड़ी की निवासी हैं और सफाई कर्मचारी हैं, उन्होंने बताया कि जब यह गेट लगा तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। वो आम दिनों की तरह ही आपने काम पर जाने के लिए निकलीं लेकिन रास्ते में उन्होंने गेट देखा जो बंद था, परन्तु उन्हें काम पर जाने के लिए देरी हो रही थी इसलिए उन्होंने इसमें दिलचस्पी नहीं ली की ये गेट क्यों लगा हैं? वह जैसे तैसे गेट के नीचे से घुसकर निकल गईं जिसके बाद वहां मौजूद गार्ड ने उनके साथ बदतमीज़ी की और इसमें उसका साथ वहां मौजूद एक अन्य महिला ने भी दिया। उसके बाद गार्ड ने उनकी फोटो खींची और उन्हें दोबारा इस  रास्ते  से नहीं आने के लिए कहा।

एक तरफ देश में जहाँ सफाई कर्मचारियों को कोरोना योद्धा कहा जा रहा है, वहीं देश की राजधानी में उनका रास्ता यह कहकर रोक जा रहा है की वो संक्रमण फैला रहे हैं।

'रास्ता रोकने का काम कुछ लोगो द्वार जातिवादी आवासीय विभाजन लग रहा है' 

कुसुमपुर पहाड़ी की निवासी, मज़दूर संगठन एक्टू की नेता और जेएनयू में सफाई कर्मचारी यूनियन की नेता उर्मिला ने बताया कि पहले ये रास्ता शुरू से खुला हुआ था परन्तु पिछले कुछ समय में कुछ लोगों ने ग़ैरकानूनी तरीके से सरकारी रास्ते को रोका जोकि पूरी तरह से गलत है।

उन्होंने कहा कि रास्ता रोकने का अधिकार हमारा संविधान किसी को नहीं देता है। परन्तु इन्होंने हम गरीब मज़दूरों का रास्ता रोका है। हम लोग पहले ही कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं ऐसे में अगर हमारा रास्ता रोक दिया जायेगा तो हम काम पर कैसे जाएंगे। इसी भेदभावों को देखते हुए हमने अनुसूचित जाति आयोग में पत्र दिया है।

आयोग को लिखे गये इस पत्र में कहा गया है कि कुसुमपुर पहाड़ी में अधिकतर अनुसूचित  जाति   और पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं और यह रास्ता रोकने का काम कुछ लोगों द्वार जातिवादी आवासीय विभाजन लग रहा है। इसके साथ ही कहा गया है कि कोरोना वायरस का इस्तेमाल हमे परेशान करने और जातिवादी प्रताड़ना के लिए किया जा रहा है।

आगे यह भी लिखा गया है कि हाउसिंग काम्प्लेक्स के आवासियों को ये हक नहीं है कि वो हम बस्तीवालों पर जातिवादी आवासीय विभाजन थोप दें। यह सड़क हमारे वसंत विहार में रोड जाने की अत्यधिक जरूरी सड़क है। दीवार के तहत गेट के निर्माण और हाउसिंग कॉप्लेक्स के उसके गैरकानूनी नियंत्रण के बाद हमे रोजमर्रा के काम में कठिनाइयों का समाना करना पड़ रहा है।

अंत में इस पत्र में यह भी बताया गया है कि उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला इसलिए आयोग उनकी मांग पर जल्द से जल्द कार्रवाई करे तथा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को सुनिश्चित करे।

भाकपा-माले ने दीवार को अवैध बताया और इसे तुरंत हटाने की मांग की

भाकपा-माले ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उसके सदस्यों ने क्षेत्र का दौरा किया और खुद इस निर्माण को देखा। वो जब वहां पहुंचे तो गेट पहले से मौजूद था, जिसे अब केंद्र सरकार के कर्मचारी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के निवासियों द्वारा अवैध रूप से नियंत्रित किया जा रहा है। जब भाकपा-माले के सदस्यों ने पूछताछ की कि दीवार क्यों बनाई जा रही है, तो हमें बताया गया कि कुसुमपुर पहाड़ी में लोगों के पास कोरोना है और इसीलिए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स को अपना रास्ता बंद करने की आवश्यकता पड़ी है।

आगे उन्होंने कहा की एक सार्वजनिक सड़क पर एक आवासीय परिसर के निवासियों द्वारा दीवार का निर्माण और निगरानी पूरी तरह से अवैध है। इस पूरे प्रकरण में लोगों के एक वर्ग द्वारा जातिगत आवासीय अलगाव का आरोप लगाया गया है। जिन झुग्गियों में रहने वालों को सड़क से गुजरने से रोका जा रहा है, वे मुख्यतः एससी / एसटी / ओबीसी समुदाय के हैं। इस प्रकार कोरोना वायरस के बहाने झुग्गीवासियों को अपमानित और परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। CPI-ML मांग करता है कि दीवार को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए और गेट सभी के लिए खुला होना चाहिए। आवास परिसर और झुग्गी के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

Coronavirus
COVID-19
Caste
Dalits
Religious discrimination
caste discrimination
AICCTU
JNU
CPIML

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License