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कोरोना से ख़तरनाक जाति वायरस: दिल्ली में सड़क पर गेट लगाकर दलितों का रास्ता रोका
भेदभाव का नया मामला देश की राजधानी दिल्ली के वसंत विहार में सामने आया है। जहाँ एक सरकारी आवसीय परिसर के लोगों ने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले दलितों का रास्ता रोक दिया। इसके लिए सड़क पे एक गेट लगा दिया गया और जो छोटा रास्ता था वहाँ भी दीवार खड़ी कर दी गई है।
मुकुंद झा
11 Jul 2020
कोरोना से ख़तरनाक जाति वायरस

देश कोरोना माहमारी से गुजर रहा है। इस समय पूरे देश को एकजुटता के साथ इससे लड़ने की ज़रूरत थी। परन्तु इस माहमारी में भी लोगों का सामाजिक शोषण और भेदभाव उसी तरह जारी है।

कोरोना की शुरुआत में हमने देखा कैसे मुसलमानों के खिलाफ पूरे देश में अभियान चलाया गया। इसके बाद हमने देखा कि प्रवासी मज़दूरों को कोरोना कैरियर यानी कोरोना फैलाने वाला बताया जाने लगा। इसी दौरान हमने ये भी देखा कि कई जगह क्वारंटीन सेंटरों में कुछ लोगों ने इसलिए खाना नहीं खाया कि वो किसी दलित ने बनाया था।

अभी भेदभाव का नया मामला देश की राजधानी दिल्ली के वसंत विहार में सामने आया है। जहाँ एक सरकारी आवसीय परिसर के लोगों ने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले दलितों का रास्ता रोक दिया। इसके लिए सड़क पे एक गेट लगा दिया गया और जो छोटा रास्ता था वहाँ भी दीवार खड़ी कर दी गई है।

ये  सब वसंत विहार में चिन्मय पब्लिक स्कूल की ओर बुध बाजार रोड पर किया गया है। यह सड़क सीबीआई कॉलोनी, प्रियंका गांधी कैंप और कुसुमपुर पहाड़ी के पास की झुग्गियों को वसंत विहार में मुख्य सड़क से जोड़ती है।

इस सबके पीछे परिसर के लोगो का कहना है कि उन्होंने ये सब कोरोना को रोकने के लिए किया है। इसको लेकर झुग्गी बस्ती के लोगों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को लिखित में शिकायत की परन्तु कुछ हल नहीं निकला, जिसके बाद 10 जुलाई को उन्होंने इस जातीय और वर्ग आधरित भेदभावों के लिए अनुसूचित जाति आयोग को एक पत्र लिखा है।

आपको बता दें कि जून के अंतिम सप्ताह में केंद्र सरकार के कर्मचारी आवास परिसर के निवासियों की देखरेख में दीवार का निर्माण किया गया था। इसके बाद से ही झुग्गी में रहने वाले लोगो ने इसको लेकर विरोध कर रहे है। इसके बाद ही 27 जून को प्रियंका गाँधी कैंप के लोगों ने साउथ वेस्ट के जिला अधिकारी, वसंत विहार पुलिस स्टेशन और आरके पुरम के स्थानीय विधायक से लिखित शिकायत की थी। लेकिन स्थानीय निवसियों के मुतबिक अभीतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रियंका गाँधी कैंप के प्रधान बृजेश ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि हमने सभी जगह शिकायत की परन्तु किसी ने भी हमारी सुनवाई नहीं की। रोड बंद होने से अब हमें काम पर जाने के लिए काफी दूर घूमकर जाना पड़ता है। वो लोग हमें ऐसे देखतें हैं जैसे हमारे पास कोरोना माहमारी है और हम उनको दे देंगे।

बृजेश ने बताया कि पुलिस ने तो उनके शिकायत पत्र तक को नहीं देखा और कहा बाहर एक पेटी है उसमें पत्र डाल दो, आपको मैसज भेज देंगे। परन्तु आज 14 दिन बीत जाने पर भी कोई ज़वाब नहीं मिला है।

हमने भी वसंत विहार थाने में फोन से संपर्क कर इस शिकायत के बारे में जानने की कोशिश की। इस पर पुलिस वाले ने जवाब दिया कि ये पुलिस स्टेशन है यहां तो शिकायत ही आती है। हमने इस शिकायत को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कोई पुख्ता जवाब नहीं दिया और कहा रीडर ऑफिस के अधिकारी नहीं है। इसके बारे में वही जानकारी देंगे। पूरी बातचीत में एक बात साफ दिख रही थी कि पुलिस इस मामले को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। 

बसंती देवी जो कुसुमपुर पहाड़ी की निवासी हैं और सफाई कर्मचारी हैं, उन्होंने बताया कि जब यह गेट लगा तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। वो आम दिनों की तरह ही आपने काम पर जाने के लिए निकलीं लेकिन रास्ते में उन्होंने गेट देखा जो बंद था, परन्तु उन्हें काम पर जाने के लिए देरी हो रही थी इसलिए उन्होंने इसमें दिलचस्पी नहीं ली की ये गेट क्यों लगा हैं? वह जैसे तैसे गेट के नीचे से घुसकर निकल गईं जिसके बाद वहां मौजूद गार्ड ने उनके साथ बदतमीज़ी की और इसमें उसका साथ वहां मौजूद एक अन्य महिला ने भी दिया। उसके बाद गार्ड ने उनकी फोटो खींची और उन्हें दोबारा इस  रास्ते  से नहीं आने के लिए कहा।

एक तरफ देश में जहाँ सफाई कर्मचारियों को कोरोना योद्धा कहा जा रहा है, वहीं देश की राजधानी में उनका रास्ता यह कहकर रोक जा रहा है की वो संक्रमण फैला रहे हैं।

'रास्ता रोकने का काम कुछ लोगो द्वार जातिवादी आवासीय विभाजन लग रहा है' 

कुसुमपुर पहाड़ी की निवासी, मज़दूर संगठन एक्टू की नेता और जेएनयू में सफाई कर्मचारी यूनियन की नेता उर्मिला ने बताया कि पहले ये रास्ता शुरू से खुला हुआ था परन्तु पिछले कुछ समय में कुछ लोगों ने ग़ैरकानूनी तरीके से सरकारी रास्ते को रोका जोकि पूरी तरह से गलत है।

उन्होंने कहा कि रास्ता रोकने का अधिकार हमारा संविधान किसी को नहीं देता है। परन्तु इन्होंने हम गरीब मज़दूरों का रास्ता रोका है। हम लोग पहले ही कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं ऐसे में अगर हमारा रास्ता रोक दिया जायेगा तो हम काम पर कैसे जाएंगे। इसी भेदभावों को देखते हुए हमने अनुसूचित जाति आयोग में पत्र दिया है।

आयोग को लिखे गये इस पत्र में कहा गया है कि कुसुमपुर पहाड़ी में अधिकतर अनुसूचित  जाति   और पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं और यह रास्ता रोकने का काम कुछ लोगों द्वार जातिवादी आवासीय विभाजन लग रहा है। इसके साथ ही कहा गया है कि कोरोना वायरस का इस्तेमाल हमे परेशान करने और जातिवादी प्रताड़ना के लिए किया जा रहा है।

आगे यह भी लिखा गया है कि हाउसिंग काम्प्लेक्स के आवासियों को ये हक नहीं है कि वो हम बस्तीवालों पर जातिवादी आवासीय विभाजन थोप दें। यह सड़क हमारे वसंत विहार में रोड जाने की अत्यधिक जरूरी सड़क है। दीवार के तहत गेट के निर्माण और हाउसिंग कॉप्लेक्स के उसके गैरकानूनी नियंत्रण के बाद हमे रोजमर्रा के काम में कठिनाइयों का समाना करना पड़ रहा है।

अंत में इस पत्र में यह भी बताया गया है कि उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला इसलिए आयोग उनकी मांग पर जल्द से जल्द कार्रवाई करे तथा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को सुनिश्चित करे।

भाकपा-माले ने दीवार को अवैध बताया और इसे तुरंत हटाने की मांग की

भाकपा-माले ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उसके सदस्यों ने क्षेत्र का दौरा किया और खुद इस निर्माण को देखा। वो जब वहां पहुंचे तो गेट पहले से मौजूद था, जिसे अब केंद्र सरकार के कर्मचारी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के निवासियों द्वारा अवैध रूप से नियंत्रित किया जा रहा है। जब भाकपा-माले के सदस्यों ने पूछताछ की कि दीवार क्यों बनाई जा रही है, तो हमें बताया गया कि कुसुमपुर पहाड़ी में लोगों के पास कोरोना है और इसीलिए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स को अपना रास्ता बंद करने की आवश्यकता पड़ी है।

आगे उन्होंने कहा की एक सार्वजनिक सड़क पर एक आवासीय परिसर के निवासियों द्वारा दीवार का निर्माण और निगरानी पूरी तरह से अवैध है। इस पूरे प्रकरण में लोगों के एक वर्ग द्वारा जातिगत आवासीय अलगाव का आरोप लगाया गया है। जिन झुग्गियों में रहने वालों को सड़क से गुजरने से रोका जा रहा है, वे मुख्यतः एससी / एसटी / ओबीसी समुदाय के हैं। इस प्रकार कोरोना वायरस के बहाने झुग्गीवासियों को अपमानित और परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। CPI-ML मांग करता है कि दीवार को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए और गेट सभी के लिए खुला होना चाहिए। आवास परिसर और झुग्गी के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

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