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भारत
राजनीति
गर्भवती महिला की मौत : जांच कमेटी ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी, कार्रवाई की सिफ़ारिश
रिपोर्ट में कई सरकारी एवं निजी अस्पतालों की लापरवाही को महिला की मौत का जिम्मेदार बताया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
भाषा
09 Jun 2020
गर्भवती महिला की मौत
Image courtesy: The Logical Indian

नोएडा: प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद अस्पताल-अस्पताल भटकने के बावजूद उपचार के अभाव में नौ महीने की गर्भवती महिला की पांच जून की रात को हुई मौत के मामले की जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को मंगलवार को सौंप दी। रिपोर्ट में कई सरकारी एवं निजी अस्पतालों की लापरवाही को महिला की मौत का जिम्मेदार बताया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफ़ारिश की गई है।

जिला सूचना अधिकारी राकेश चौहान ने बताया कि गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी गर्भवती महिला नीलम पत्नी विजेंद्र की चार दिन पहले उपचार के अभाव में जनपद गौतम बुद्ध नगर में मौत हो गई थी।

इसे पढ़ें : यूपी: आख़िर क्यों 13 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाती गर्भवती को किसी ने भर्ती नहीं किया?

उन्होंने बताया कि नीलम के परिजनों का आरोप था कि उन्होंने सेक्टर 24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल से लेकर ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल, जिला अस्पताल और कई निजी अस्पतालों में गर्भवती महिला को उपचार नहीं मिला और उसकी मौत हो गई।

सूचना अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने अपर जिलाधिकारी तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की थी।

कमेटी की जांच के आधार पर जिलाधिकारी ने ईएसआईसी अस्पताल सेक्टर 24 के निदेशक एवं उपचार व रेफर करने वाले चिकित्सक, एंबुलेंस के चालक को उत्तरदाई माना है। उत्तरदाई अधिकारी एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए प्रमुख सचिव श्रम उत्तर प्रदेश शासन एवं सचिव श्रम विभाग भारत सरकार नई दिल्ली तथा डीजी राजकीय कर्मचारी जीवन बीमा निगम लखनऊ को पत्र के माध्यम से अनुरोध किया गया है।

उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया है कि ईएसआईसी अस्पताल सेक्टर 24 में सारी सुविधाएं तथा वेंटिलेटर की उपलब्धता के बावजूद नीलम को कोविड-19 का संदिग्ध मानकर उपचार नहीं किया गया और उसे राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) ग्रेटर नोएडा रेफर दिया गया, उसे एंबुलेंस द्वारा जिला अस्पताल सेक्टर 30 नोएडा में ले जाकर बाहर छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि मरीज को अस्पताल के किसी डॉक्टर या कर्मचारी के हवाले नहीं किया गया।

सूचना अधिकारी ने बताया कि जांच में यह भी पाया गया कि उक्त मरीज को जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर करने से पहले समन्वय स्थापित नहीं किया गया। मरीज को रेफर करने के लिए ड्यूटी पर तैनात संविदा कर्मियों द्वारा निर्णय लिया गया, जबकि यह निर्णय सक्षम अधिकारी द्वारा लिया जाना चाहिए था।

उन्होंने बताया कि इस बात के लिए संबंधित कर्मचारी उत्तरदाई हैं। उनके द्वारा वरिष्ठ अधिकारी को बिना बताए स्वयं मरीज को वापस कर दिया गया, इस प्रकार की घटनाओं की सूचना निरंतर मिलती रहती है। जिस पर कार्रवाई के लिए जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को बार-बार निर्देशित किया जाता रहा है, परंतु उनके द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण घटनाओं की पुनरावृत्ति होती जा रही है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में चल रही कोविड-19 महामारी के समय ऐसी स्थिति उचित नहीं है। सूचना अधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स रोज वाला और अन्य कर्मचारी अनीता के विरुद्ध कार्रवाई करने एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर तैनात डॉक्टर वंदना शर्मा का स्थानांतरण करते हुए, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर किसी योग्य अधिकारी की तैनाती करने के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश शासन को पत्र के माध्यम से अनुरोध किया है।

सूचना अधिकारी ने बताया कि मरीज को लेकर उसका परिवार कई निजी अस्पतालों में भी गया, लेकिन उन्होने बिस्तर उपलब्ध नहीं है का बहाना बनाकर उसे वापस भेज दिया, ऐसे में समय पर उपचार नहीं होने से महिला की मौत हो गई।

उन्होने बताया कि कमेटी ने अपनी जांच में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सालय के प्रबंधन एवं उस समय तैनात अधिकारियों/ कर्मचारियों को दोषी बताया है। इस संबंध में कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी गौतम बुद्ध नगर को पत्र लिखा गया है।

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