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दीपिका और जेएनयू : फ़िल्म का प्रमोशन या कैरियर का रिस्क!
जैसे ही कोई कलाकार किसी ज़रूरी और ज्वलंत मु्ददे पर अपनी राय रखता है तो उसके पक्ष-विपक्ष में बहस शुरू हो जाती है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन इसे लेकर उसके ऊपर निजी हमले तक किए जाने लगते हैं। ट्रोल किए जाने लगता है। ऐसा ही अब दीपिका के साथ हो रहा है।
सोनिया यादव
08 Jan 2020
Deepika padukone in JNU

सीएए-एनआरसी के बाद अब फिल्मी दुनिया के कलाकार जेएनयू हमले के विरोध में भी आगे आ रहे हैं। लेकिन जैसे ही कोई कलाकार ऐसे सामाजिक और ज्वलंत मु्ददे पर अपनी राय रखता है तो उसके पक्ष-विपक्ष में बहस शुरू हो जाती है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन इसे लेकर उसके ऊपर निजी हमले तक किए जाने लगते हैं। ट्रोल किए जाने लगता है। इसे बिल्कुल ठीक नहीं कहा जा सकता, लेकिन ऐसा ही कुछ हो रहा है मशहूर फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के साथ। जेएनयू के साथ खड़े होने पर रातों-रात 'बॉयकोट छपाक' ट्विटर पर ट्रेंड करने लगता है और लोग दीपिका को लेकर दो धड़ों में बट गए।

दरअसल दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 5 जनवरी की शाम हुई हिंसा ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर दिया है। इसे लेकर तमाम विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, छात्र और नागरिक समाज के लोग सड़कों पर मार्च निकाल रहे हैं। इसी कड़ी में 7 जनवरी को जेएनयू कैंपस में हुई सभा में दीपिका पादुकोण भी शामिल हुईं। हालांकि उनकी ये उपस्थिति बिल्कुल चुपचाप थी लेकिन इसने एक नई बहस छेड़ दी।

क्या है पूरी कहानी?

मंगलवार 7 जनवरी की शाम दीपिका क़रीब साढ़े सात बजे जेएनयू परिसर पहुँचीं। वे कुछ देर वहाँ एकत्रित छात्रों के बीच खड़ी हुईं और आखिर में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष से मुलाक़ात कर निकल गईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस की शुरुआत हो गई। लोग दीपिका के पक्ष-विपक्ष में तरह-तरह की बातें लिखने लगे। किसी ने इसे दीपिका का साहस बताया तो कोई इसे फिल्म प्रमोशन स्टंट कहने लगा। बहुत से लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि वे उनकी आने वाली फ़िल्म 'छपाक' नहीं देखेंगे। कुछ बीजेपी नेताओं ने छपाक के बहिष्कार की अपील तक कर दी। तो वहीं सुबह होते ही ट्विटर पर हैशटैग आई सपोर्ट दीपिका भी ट्रेंड करने लगा।

दीपिका पादुकोण के बॉयकोट और सपोर्ट के बीच एक सवाल अहम है कि अगर दीपिका वहां वाकई फिल्म प्रमोशन या पब्लिक रिलेशन के चलते गईं भी, तो इसमें गलत क्या है? क्या महज़ इस कारण से उनका या उनकी आने वाली फिल्म का बॉयकोट करना सही है? क्या हमें दीपिका के जेएनयू जाने के चलते उनके बारे में कुछ भी बोलने का अधिकार मिल जाता है? क्या हम उन्हें, उनकी विचारधारा को जज कर सकते हैं?

इन सभी सवालों का जवाब नहीं है! क्योंकि इस देश में सभी को अभिव्यक्ति की आज़ादी है। आप कहीं भी, कभी भी और किसी को भी साथ अपना समर्थन दे सकते हैं। आप किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रख सकते हैं और लोकतांत्रिक तरीके से किसी विरोध का हिस्सा भी हो सकते हैं।

इसी अधिकार से दीपिका की आलोचना का भी सबको हक़ है। लेकिन निजी हमले, ट्रोल किया जाना, उनके ख़िलाफ़ झूठे किस्से गढ़ना किसी भी तौर पर सही नहीं कहा जा सकता।

deepika JNU.jpg

दीपिका की राय

दीपिका मंगलवार को अपनी फ़िल्म छपाक के प्रचार के लिए दिल्ली में थीं। इस दौरान इस मुद्दे पर मीडिया ने उनसे कई सवाल पूछे। आज तक को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 'देश में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर उन्हें तकलीफ़ होती है'।

जब दीपिका से पूछा गया कि देश के विश्वविद्यालयों में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। कई फ़िल्मी हस्तियां ने भी इस पर खुल कर बात रखी है। इस मुद्दे पर आपका क्या नज़रिया है?'

दीपिका ने जवाब में कहा, "इस बारे में मुझे जो कहना था वो मैंने दो साल पहले कह दिया था। जब फ़िल्म पद्मावत रिलीज़ हो रही थी, उस वक़्त जो मैं महसूस कर रही थी, मैंने उसी वक़्त कह दिया था। अब जो मैं देख रही हूँ, मुझे बहुत दर्द होता है। ये दर्द इसलिए क्योंकि लोग जो देख रहे हैं, उसे सामान्य न मानने लग जाएं। ये 'न्यू नॉर्मल' न बन जाए कि कोई भी कुछ भी कह सकता है और उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। तो डर भी लगता है और दुख भी होता है। मुझे लगता है कि हमारे देश की जो बुनियाद है, वो ये तो ज़रूर नहीं है।"

बता दें कि जनवरी 2017 में फ़िल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली पर जयपुर में कुछ लोगों ने हमला किया था। फ़िल्म पद्मावत के सेट पर तोड़-भोड़ की और भंसाली और उनकी पूरी टीम के साथ हाथापाई भी हुई। इसकी ज़िम्मेदारी राजस्थान की करणी सेना ने ली थी। उस समय भी रणवीर सिंह, शाहिद कपूर और दीपिका पादुकोण को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

उसी दौरान गुजरात के एक कलाकार को पद्मावत से जुड़ी रंगोली बनाने के लिए पीटा गया था। दीपिका ने इस घटना की तस्वीरें शेयर करते हुए 18 अक्तूबर 2017 को केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को टैग कर एक ट्वीट किया, "आर्टिस्ट करण और उनके आर्ट-वर्क पर हुए हमले की ख़बर सुनकर दिल टूटा। यह भयावह है, घिनौना है। ये कौन लोग हैं? इन घटनाओं के लिए कौन ज़िम्मेदार है? और कब तक हम ऐसी घटनाओं को होने देंगे? ये लोग क़ानून को हाथ में लेते रहें और हमारी बोलने की आज़ादी पर हमला करते रहें. वो भी बार-बार. इसी रोकना होगा. अभी. और इसके ख़िलाफ़ एक्शन ज़रूरी है।"

दीपिका ने उस समय एक चैनल को दिए इंटरव्यू में ये भी कहा था कि अब वो समझ सकती हैं कि बॉलीवुड उनके समर्थन में क्यों नहीं बोल रहा है। जाहिर है दीपिका और उनकी टीम ने जेएनयू जाने से पहले ही इन तमाम बातों का अंदाजा लगा लिया होगा। इसके बावजूद दीपिका का वहां जाना एक बड़ा कदम है। दीपिका ने वहाँ जुटे छात्रों और अध्यापकों को संबोधित तो नहीं किया मगर सोशल मीडिया पर उनकी जो तस्वीरें वायरल हुई हैं, उन्होंने एक साफ़ संदेश दिया है।

गौरतलब है कि दीपिका की आगामी फिल्म छपाक एसिड अटैक सर्वाइवर की कहानी बयां करती है। इस फिल्म में दीपिका के लिए एक एक्टर के तौर पर ही चीज़ें दांव पर नहीं लगी हैं, बल्कि वो छपाक फ़िल्म की निर्माता भी हैं। इस फिल्म को मेघना गुलज़ार ने डायरेक्ट किया है। अब दीपिका के जेएनयू जाने को लेकर दो धड़े बन गए हैं। दीपिका का ये कदम और ‘छपाक’ की रिलीज, दोनों उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ साबित हो सकते हैं। लेकिन इस बात की तारीफ़ तो बनती है कि दीपिका ने तमाम आलोचनाओं की परवाह किए बगैर और अपनी फिल्म और कैरियर का रिस्क लेते हुए इस तरह पहली बार किसी गंभीर मसले पर खुलकर स्टैंड लिया है।

एक छात्र ने दीपिका की आलोचना पर टिप्पणी की, "अगर ये फिल्म के लिए प्रमोशन स्टंट है तो भी ये स्टंट अच्छा है। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर और भी कलाकारों को ऐसा स्टंट करना चाहिए।”

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