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दिल्ली: निगम कर्मचारियों की हड़ताल जारी, 15 को मुख्यमंत्री कार्यालय तक मार्च की तैयारी
एकबार फिर बकाया वेतन की मांग को लेकर निगम के कर्मचारी 7 जनवरी से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में सफ़ाई कर्मचारी, शिक्षक, इंजीनियर, डॉक्टर से लेकर पैरा मेडिकल स्टॉफ तक सभी शामिल हैं। हड़ताली कर्मचारी 15 जनवरी को एमसीडी मुख्यालय से दिल्ली के मुख्यमंत्री के दफ़्तर तक मार्च करेंगे।
मुकुंद झा
12 Jan 2021
निगम कर्मचारियों की हड़ताल जारी

दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी कई महीनों से वेतन न मिलने की वजह से पिछले पांच दिनों से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में दक्षिणी दिल्ली को छोड़ बाकी दोनों उत्तरी और पूर्वी नगर निगम के कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। इस हड़ताल में सफ़ाई कर्मचारी, शिक्षक, इंजीनियर, डॉक्टर से लेकर पैरा मेडिकल स्टाफ तक भी शामिल हैं।

इस हड़ताल में लगातर कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है। कर्मचारी एमसीडी मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके साथ कर्मचारियों का अपने अपने जोन में भी प्रदर्शन जारी है।

इस बीच आज मंगलवार 12 जनवरी को हड़ताली कर्मचारियों ने नोटिस दिया है की वो 15 जनवरी को एमसीडी मुख्यालय से दिल्ली के मुख्यमंत्री के दफ़्तर तक मार्च करेंगे।

निगम कर्मचारी बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका आरोप है कि पिछले 4 महीने से वेतन नहीं मिला है। सबसे बदतर स्थिति उत्तरी नगर निगम की है

निगम के कर्मचारियों ने कहा कि पहली बार ऐसा नहीं हुआ है कि दो महीने से कम समय में यह दूसरी हड़ताल हैं। पिछले 6 साल से लगातार उनके साथ ऐसा ही हो रहा है। लगातर कई कई-कई महीने तक उनकी सैलरी रोक ली जाती है जब प्रदर्शन करते हैं तब उनकी सैलरी दी जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि निगम के कुछ कर्मचारी जवानी से बुढ़ापे तक पहुंच गए, लेकिन उन्हें पक्का नहीं किया गया। इन्होंने कहा कि इनके एरियर बाकी है। इन सब मांगों को लेकर ये सभी कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस हड़ताल का निगम के 40 कर्मचारी संगठन जिसमे पेंशनरों के साथ-साथ शिक्षकों, इंजीनियरों, नर्सों, और सफ़ाई कर्मचारियों के संगठन समर्थन कर रहे है।

सभी संगठनों ने मिलकर एक संयुक्त मंच बनाया है, जिसे कन्फेडरेशन ऑफ एमसीडी एम्प्लाइज़ यूनियन कहा जाता है। इसके नेतृत्व में ही 7 जनवरी, गुरुवार से साउथ एमसीडी को छोड़ दिल्ली भर में कर्मचारी हड़ताल पर हैं। आपको बता दें कि सबसे अधिक इस हड़ताल का असर उत्तरी नगर निगम में देखने को मिल रहा है जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम भी इस हड़ताल से प्रभावित है लेकिन वहां अभी पूर्ण हड़ताल की स्थिति नहीं बनी है।

राष्ट्रीय राजधानी में सभी नगर निगम में वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का शासन हैं। वर्तमान ही नहीं बल्कि डेढ़ दशक से उन्हीं का शासन है।

निगम कर्मचारियों के इस संयुक्त मंच के संयोजक एपी खान ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताया कि “पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के सभी छह अस्पतालों में, केवल आपातकालीन सेवाएं चालू हैं, जबकि ओपीडी काफी हद तक प्रभावित रही। लगभग 250 औषधालय भी बंद रहे।"

आगे उन्होंने बताया हमारी यह हड़ताल पिछले 7 जनवरी से चल रही है, दोनों निगम और दिल्ली सरकार हमारे को अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों मिलकर हमारा शोषण कर रहे हैं। हमें हमारा मेहनताना कई कई महीनो तक नहीं दिया जाता है और कुछ महीने बाद जब कर्मचारी बहुत हल्ला करते हैं तो फिर एक या दो महीने का वेतन दे देते हैं।'

कई कर्मचारी नेताओं ने इस हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक बताई।

इसी तरह की एक हड़ताल अभी दो महीना पहले नवंबर के महीने में भी हुई थी। जिसके बाद निगम के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि भुगतान उसी महीने के अंत कर दिया जाएगा।

खान ने कहा, "हमें तब बताया गया था कि 30 नवंबर तक बकाया और बकाया राशि को मंजूरी दे दी जाएगी। हालांकि, किसी भी कर्मचारी को अब तक एक भी भुगतान नहीं किया गया है।"

बीजेपी और आप इस स्थिति के लिए एक दूसरे पर फोड़ रही हैं ठीकरा

अगले वर्ष 2022 में निगम के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में इसपर राजनीति तो होनी ही है। वैसे भी दिल्ली सरकार और निगम हमेशा एक दूसरे के आमने सामने ही रहे हैं। अभी वेतन में देरी के लिए बीजेपी, आम आदमी पार्टी को ज़िम्मेदार बताते हुए पूरी दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है। वहीं आप निगम में बीजेपी के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। पूरी दिल्ली में सभाएं कर रही है। आप ने निगम में भ्रष्टाचार की एक सूची बनाई है और उसे जनता में वितरित कर रही है।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जय प्रकाश ने इस हड़ताल के बाद न्यूज़क्लिक से बात करते हुए माना कि इस समय के नगर निगम का ट्रैक रिकॉर्ड सबसे ख़राब है। खासतौर पर प्रशासनिक काम काज में हम अपने वादों को पूरा नहीं कर सके हैं। लेकिन इसके लिए उन्होंने दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराने में भी देर नहीं लगाई।

प्रकाश के अनुसार, “लगभग 13,000 करोड़” की राशि का भुगतान आप सरकार द्वारा निगमों को किया जाना बाकी है जिसके मिलने से वित्तीय बोझ कम होगा। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष के भुगतानों में 60% तक कटौती हुई। जिसने इस संकट को और गहराया है।

इस तथ्य पर बल देते हुए कि तीन निगमों के महापौरों ने भी हाल ही में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर 13 दिन के धरने के साथ इसी तरह के मुद्दे उठाए। उन्होंने इस बात को स्वीकारा कि "उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सफ़ाई कर्मचारियों और डॉक्टरों को केवल अक्टूबर तक भुगतान किया गया था; जबकि शिक्षकों को जुलाई तक का ही वेतन मिला है।”

हालांकि सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के दुर्गेश पाठक जो पार्टी के निगम प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं, ने इस मसले पर न्यूज़क्लिक से बात करते अपनी अलग राय दी। उन्होंने कहा, "15 साल से, भाजपा ने निगम को खत्म करने के लिए सब कुछ किया है। आज वो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है।"

उन्होंने कहा बीजेपी ने निगम में 2,500 करोड़ का घोटाला किया है और इसका ख़ामियाज़ा कर्मचरियों और नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।" पाठक ने कहा कि बीजेपी को कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि वो निगम की सत्ता पर रहे।"

उन्होंने कहा, "उन्हें अपना इस्तीफा सौंपना चाहिए और नए सिरे से चुनाव होने चाहिए।"

हमें स्थाई समाधान चाहिए : कर्मचारी

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि न तो दिल्ली में निगम कर्मचारियों को भुगतान में देरी का मामला नया है, और न ही कर्मचारियों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, यह सब कई सालों में एक सतत प्रक्रिया हो गई है। इस मुद्दे पर AAP और BJP के बीच नूरा कुश्ती भी अब कर्मचारियों को बहलाने में नाकाफ़ी है। कर्मचारियों का कहना है कि इस राजनीतिक झगड़े से उन्हें क्या? और इसके बजाय दोनों मिलकर एक स्थायी समाधान दें।

7 जनवरी को दिए गए ज्ञापन में कर्मचारियों की हताशा दिखाई दे रही है, जिसे दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को संबोधित किया गया था। यह कहते हुए कि "वित्तीय संकट का मूल कारण पूर्ववर्ती MCD के तीन भागों में विभाजन के मनमाने और बुरे निर्णय में निहित है," कर्मचारियों ने तीन निकायों के "एकीकरण" की मांग की।

निगम निकाय का विभाजन वर्ष 2012 में हुआ था, जिसकी पहल तत्कालीन शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली सरकार ने की थी।

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि हर बार की तरह इसबार भी निगम फंड की कमी का हवाला दे रहा है। जब भी कर्मचारी अपना वेतन मांगते हैं निगम के अधिकारी दिल्ली सरकार से फंड रिलीज़ नहीं होने की बात कहते हैं। जबकि दिल्ली सरकार साफतौर पर कह रही है कि निगम का उसने कोई भी फंड नहीं रोका है। सरकार और निगम को चाहिए की इस समस्या का कोई स्थायी समाधान ढूंढे। जिससे कर्मचारियों को दिक्क्त का सामना न करना पड़े।

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