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दिल्ली : कोरोना और ब्लैक फंगस के साथ डेंगू ने भी दी दस्तक़
दिल्ली में इस साल 29 मई तक डेंगू के 29 मामले सामने आये हैं। दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने एक रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल एक जनवरी से 29 मई तक आए डेंगू के मामले 2017 के बाद से सर्वाधिक हैं। उस वर्ष इस दौरान 40 मामले सामने आये थे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Jun 2021
दिल्ली : कोरोना और ब्लैक फंग्स के साथ डेंगू ने भी दी दस्तक़

नयी दिल्ली: देश की राजधानी अभी ठीक कोरोना से राहत ले ही रही थी कि ब्लैक फंगस ने उसे जकड़ लिया और अभी इससे उभरे भीनहीं थे कि डेंगू भी दिल्ली में पैर पसारने लगा है। जिसने दिल्लीवासियों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार डेंगू भी सालों के रिकॉर्ड को तोड़ रहा है। राजधानी में इस साल 29 मई तक डेंगू के 29 मामले सामने आये हैं। वैसे जुलाई से नवंबर के बीच इस बीमारी का प्रकोप रहता है। दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने एक रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल एक जनवरी से 29 मई तक आए डेंगू के मामले 2017 के बाद से सर्वाधिक हैं। उस वर्ष इस दौरान 40 मामले सामने आये थे।

डेंगू के मामले में वृद्धि की वजह पिछले कुछ दिनों से बीच-बीच में हो रही बारिश हो सकती है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, ताउते तूफान के प्रभाव से दिल्ली में 20 मई को 119.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, जिसने मई महीने के पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया। यह 1976 में 24 मई को हुई 60 मिलीमीटर वर्षा से करीब दोगुना है।

बाईस मई तक शहर में डेंगू के 25 मामले सामने आये, जो 2013 के बाद से एक जनवरी से 22 मई की अवधि में सबसे अधिक मामले हैं।

डेंगू मच्छरों का लार्वा साफ एवं स्थिर पानी में पनपता है जबकि मलेरिया मच्छरों का लार्वा गंदे पानी में भी पनपता है।

दक्षिण दिल्ली नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 29 मई तक डेंगू के 29 मामले सामने आये।

दूसरी तरफ नगर निगमों ने पूरी तैयारी होने का दावा किया है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि नगर निगम में जिन डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर (डीबीसी)कर्मचारियों जिनकी इस बीमारी को रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्हें महीनों तक वेतन भी नहीं देता है और बाकि सुविधाएं तो भूल ही जाइए। खौर इन सबके बावजूद नगर निगम के दावों की मानें तो उनकी तरफ से डेंगू से लड़ने की पूरी तैयारी की गई है। वहीं पहले से भी कई तरह की सावधानियां बरती गई हैं। आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक निगम अधिकारियों ने जानकारी दी है कि 1,84,522 घरों में स्प्रे किया जा चुका है, 6,266 जगहों पर लार्वा भी मिला है।

उस रिपोर्ट में आगे अधिकारियों के हवाले से ही कहा गया है कि अब तक 6,792 लोगों को लापरवाही बरतने के चलते लीगल नोटिस भेजे गए हैं। इसी तरह 453 अन्य लोगों पर लापरवाही के चलते कार्रवाई की गई है। इन सब के अलावा करीब 484 एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में निरीक्षण के बाद निगम को 118 एजुकेशनल संस्थानों में लार्वा मिला है। उन तमाम संस्थानों को सरकारी नोटिस और चालान जारी किया गया

डेंगू के लक्षण और उपचार

डेंगू अपने आप में प्राणों के लिए खतरा पैदा करने वाला रोग तो बहुत ही दुर्लभ रूप से ही होता है और सामान्य स्थितियों में इसकी वजह से ऐसी दहशत नहीं फैलनी चाहिए, जैसी इस समय फैली हुई है। लेकिन, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के पहलू से, दिल्ली की और वास्तव में देश भर की ही स्थितियों को सामान्य तो शायद ही कहा जा सकता है। लेकिन, हम इस पर जरा बाद में चर्चा करेंगे। जहां तक डेंगू का सवाल है, यह वायरस का संक्रमण है, जो एंडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में पनपता है और मलेरिया फैलाने वाले एनोफिलीज मच्छर के विपरीत, ऐंडीज मच्छर दिन में ही लोगों को काटता है। याद रहे कि मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज मच्छर रुके हुए गंदले पानी में पनपता है और शाम के समय काटता है। डेंगू के लक्षण हैं--बुखार, सिरदर्द और अक्सर तेज बदन दर्द। डेंगू के बहुत से मरीजों में अपेक्षाकृत हल्के लक्षण ही सामने आते हैं और वास्तव में इसके संक्रमण की चपेट में आने वालों में से 80 फीसद के मामले में या तो डेंगू के कोई लक्षण दिखाई ही नहीं देते हैं और दिखाई भी देते हैं तो मामूली बुखार तक मामला सीमित रहता है। यहां तक कि जिन लोगों में इसके बहुत प्रबल लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे तेज बुखार तथा तेज बदन दर्द (डेंगू को शुरू में ‘हाड़ तोड़ बुखार’ के नाम से जाना जाता था क्योंकि कुछ मामलों में इससे बहुत भारी बदन दर्द होता था), उनमें से भी अधिकांश 7 से 10 दिन में पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं। डेंगू पीडि़तों के बदन पर लाल निशान प्रकट हो सकता है, जो सामान्यत: बुखार शुरू होने के 3-4 दिन बाद प्रकट होता है। बुखार, रुक-रुक के आता है यानी 3 से 5 दिन बाद बुखार उतर जाता है और उसके बाद दो-तीन दिन के लिए फिर चढ़ जाता है।

डेंगू का कोई विशेष उपचार नहीं है क्योंकि ऐसी कोई खास दवा बनी ही नहीं है, जिसका डेंगू पैदा करने वाले वायरस पर सीधे असर हो। बुखार और दर्द जैसे लक्षणों का उपचार, पैरासिटामोल से किया जाता है। एस्पिरीन या अन्य दर्दनाशकर जैसे ब्रूफेन आदि डेंगू के रोगियों को नहीं दिए जाते हैं क्योंकि गंभीर रूप से संक्रमण के शिकार रोगियों में से कुछ के मामले में, इन दवाओं से रक्तस्राव की समस्या और बढ़ सकती है।

डेंगू के रोगियों के एक छोटे से हिस्से में गंभीर जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे रोगियों के मामले में ‘डेंगू का रक्तस्रावी बुखार’ हो सकता है। डेंगू के बुखार के इस रूप में शरीर की रक्तस्राव रोकने वाली प्राकृतिक प्रणालियां अपना काम करना बंद कर देती हैं। ऐसे मरीजों के मामले में गंभीर आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है और शरीर की रक्त प्रवाह प्रणाली ही बैठ सकती है। इससे चिकित्सकीय इमरजेंसी की स्थिति पैदा हो जाती है, जिसे ‘‘शॉक’’ कहते हैं। आंतरिक रक्तस्राव के शुरुआती लक्षणों के रूप में रोगी की ऊपरी त्वचा के अंदर और म्यूकस मेंब्रेन में, जैसे मुंह के अंदर, खून के छोटे-छोटे धब्बे दिख सकते हैं।

गंभीर रक्तस्राव के लक्षणों का पता, रोगी के रक्त के प्लेटलेट्स की गणना से लग सकता है। शरीर में आंतरिक रक्तस्राव को रोकने के लिए, प्लेटलेट्स की संख्या का खास स्तर तक रहना जरूरी होता है। एक सामान्य व्यक्ति के खून में 1 से 1.5 लाख प्रति घन मिलीमीटर तक प्लेटलेट होते हैं। कुछ डेंगू रोगियों के मामले में यह संख्या घटकर 50 हजार से भी नीचे चली जाती है। आमतौर पर यह संख्या घटकर 10,000 से नीचे चले जाने की सूरत में आंतरिक रक्तस्राव होने लगता है। ऐसे रोगियों को अस्पताल में भर्ती कर, प्लेटलेट चढ़ाए जाने की जरूरत होती है। वैसे तो टाइफाइड बुखार जैसे कुछ अन्य संक्रमणों के मामले में भी प्लेटलेट का स्तर घट सकता है, लेकिन डेंगू के बुखार के मामले में ही ऐसा ज्यादा होता है। फिर भी प्लेटलेट के स्तर को डेंगू के टैस्ट की तरह प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यह टैस्ट महंगा है और ज्यादा उन्नत प्रयोगशालाओं में ही इसकी सुविधा होती है। इसके अलावा, खासतौर पर जब डेंगू की बीमारी अपने आरंभिक चरण में हो, इस टैस्ट के जरिए निर्णायक रूप से इसका फैसला नहीं किया जा सकता है कि टैस्ट कराने वाले को डेंगू का संक्रमण नहीं हुआ है। डेंगू के वायरस की तीन-चार किस्में आम तौर पर देखने को मिलती हैं, जिनमें से टाइप-2 और टाइप-4 को ज्यादा नुकसानदेह माना जाता है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

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