NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
लगे रहो, मोटा भाई...
मैंने ईवीएम का बटन तो दबाया पर गृहमंत्री जी की इच्छा के बावजूद बटन उतनी जोर से नहीं दबा कि करंट शाहीन बाग तक पहुंचे। हो सकता है कि करंट लोक कल्याण मार्ग तक पहुंच गया हो। लोक कल्याण मार्ग मेरे घर से अधिक पास है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
09 Feb 2020
amit shah kejriwal
फोटो साभार : financial express

दिल्ली में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया चल रही है। सभी दल अपनी पूरी कोशिश कर चुके हैं, कल वोटिंग भी हो गई है, अभी परिणाम आना बाकी है। गिनती ग्यारह तारीख को होगी। असली मुकाबला केंद्र की सत्ताधारी पार्टी और राज्य की सत्ताधारी पार्टी में बताया जा रहा है। दोनों में कौन सा दल आगे रहेगा, कौन पहले नम्बर पर रहेगा और कौन दूसरे, अभी सिर्फ अनुमान का विषय है। ग्यारह तारीख को रिजल्ट आएगा, तब तक अनुमानों का बाजार गर्म रहेगा। हां, कांग्रेस तीसरे स्थान पर रहेगी, इस पर लगभग सभी सहमत हैं। कांग्रेसी भी।

 logo tirchhi nazar_17.PNG

वोटिंग से पहले चुनाव प्रचार होता है। यह चुनाव प्रचार भी बहुत अद्भुत चीज है। हर कोई अपनी तरह से चुनाव प्रचार करना चाहता है। कोई चाहता है कि पंचायत चुनाव भी देश की सुरक्षा के मुद्दे पर लड़े

जायें तो कोई मानता है कि स्थानीय चुनाव स्थानीय मुद्दों, बिजली-पानी, स्वास्थ्य-शिक्षा, विकास आदि पर लड़े जाने चाहिए। हर दल अपनी अपनी इच्छा से अपना चुनाव प्रचार करता है और जनता है, जिसकी चाहे सुन ले, जिसकी चाहे मान ले। चुनाव में, वोट डालने के दिन तक तो जनता ही राजा है। पांच साल में एक दिन के लिए ही सही, जनता ही जनार्दन है।

जब चुनाव प्रचार होता है तो राजनैतिक दलों के केंद्रीय नेता भी चुनाव प्रचार करने आते हैं। वे स्टार प्रचारक कहलाते हैं। जिस दल का केंद्र में शासन होता है, उस दल के केंद्रीय नेता केंद्रीय मंत्री भी होते हैं। अब मंत्री हैं तो उनकी बात सुनी भी जायेगी और गुनी भी जायेगी। जब कोई केंद्रीय मंत्री चुनावी रैली में गोली मारने के नारे लगवाता है, तो एक सत्रह-अट्ठारह साल का लड़का मंत्री जी की बात मानकर पिस्तौल लेकर गोली मारने निकल पड़ता है। वह भी गांधी जी की शहादत के दिन। अगले दिन एक और जामिया के गेट पर। फिर उसके अगले दिन एक और शाहीन बाग में। अब मंत्री जी को भी पता नहीं होगा कि उनकी बात इतने लोग इतनी जल्दी मानने लगेंगे।

इस चुनावी गरमा गरमी में मुझे यह भी पता चला कि देश की राजधानी का मुख्यमंत्री एक आतंकवादी है और उसका पाकिस्तानी कनेक्शन है। यह दिल्ली के ही एक सांसद ने बताया और उसका एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने अनुमोदन भी कर दिया। वह मुख्यमंत्री आज ही मुख्यमंत्री नहीं बना है, पिछले पांच साल से मुख्यमंत्री है। उससे पहले भी वह 49 दिन मुख्यमंत्री रहा। मैं तो सोचता था कि मेरे देश के प्रधानमंत्री जी बहुत ही मजबूत प्रधानमंत्री हैं। देश में पहले बने किसी भी प्रधानमंत्री से अधिक मजबूत। मुझे तो यही बताया जा रहा था।

मुझे तो यही विश्वास दिलाया जा रहा था कि आतंकवादी तो उनसे थरथर कांपते हैं। उनके होते देश आतंकवादियों से महफूज है। पर यह क्या, उनकी नाक के नीचे ही, पिछले पांच साल से एक आतंकवादी देश की राजधानी दिल्ली का मुख्यमंत्री बना रहा और उन्होंने कुछ नहीं किया। इन्हीं पांच साल में मोदी जी ने आतंकवाद का खात्मा करने के लिए नोटबंदी भी कर दी। नोटबंदी के अनेक कारणों में से यह भी एक कारण बताया था न मोदी जी ने नोटबंदी करने का।

उन्हीं सांसद ने, जिन्होंने दिल्ली के  मुख्यमंत्री को आतंकवादी बताया था, हमें डराया भी। डराया कि शाहीन बाग में धरना कर रहे लोग हमारे घरों में घुस आयेंगे, हमें मारेंगे और हमारे यहां की महिलाओं से बलात्कार करेंगे। पर शाहीन बाग में तो नानियों दादियों की उम्र की महिलाएं बैठी हैं धरने पर, वह भी शांतिपूर्ण तरीक़े से। ये बूढ़ी महिलाएं कैसे हमें मारेंगी और कैसे औरतों से बलात्कार करेंगी? उन्हें तो खुद ही बलात्कार होने का डर होगा। पर एक सांसद डराये तो हमें डर जाना चाहिए। उन्होंने डराया और हम डर भी गये। 

उधर गृहमंत्री भी हमें समझाने लगे। वे भी शाहीन बाग से डराने लगे। वे बताने लगे कि हम शाहीन बाग को सबक सिखायें। उन्होंने समझाया कि हम ईवीएम का बटन इतना जोर से दबायें कि करंट शाहीन बाग तक जा पहुंचे। मुझे समझ नहीं आया कि मैं उस नौ वोल्ट करंट वाली ईवीएम मशीन का बटन आखिर कितनी जोर से दबाऊं कि करंट पच्चीस तीस किलोमीटर दूर बैठी महिलाओं को लगे। मैंने ईवीएम का बटन तो दबाया पर गृहमंत्री जी की इच्छा के बावजूद बटन उतनी जोर से नहीं दबा कि करंट शाहीन बाग तक पहुंचे। हां, जोर से दबाने के चक्कर में इतनी जोर से अवश्य ही दब गया हो सकता है कि करंट लोक कल्याण मार्ग तक पहुंच गया हो। लोक कल्याण मार्ग मेरे घर से अधिक पास है।

इधर विकास पुरुष प्रधानमंत्री जी भी चुनाव प्रचार के लिए आ पहुंचे। अब वे विकास की बात नहीं करते हैं क्योंकि जितना और जिनका विकास उन्होंने कराना था, करा चुके हैं। उन्होंने भी शाहीन बाग से डराया। उन्होंने बताया कि शाहीन बाग 'संयोग नहीं प्रयोग' है। मैं समझ गया, प्रधानमंत्री जी, कम से कम इस बार तो सच ही बोल रहे थे। शाहीन बाग उनके लिए एक प्रयोग है। शाहीन बाग सिर्फ एक चुनाव जीतने का ही नहीं, 'डिवाइड एंड रूल' का भी प्रयोग है, हिन्दू-मुसलमान का भी प्रयोग है।

पर कमी औरों ने भी नहीं छोड़ी। देश के सबसे बड़े विरोधी दल के नेता बोले कि छह आठ महीने बाद  नरेंद्र मोदी को बेरोजगारी की वजह से देश के युवा डंडे से मारेंगे। अब राहुल गांधी को कुछ तो शर्म करनी चाहिए। माना कि बेरोजगारी है, पैंतालीस छयालीस साल के उच्चतम स्तर पर है। पर यह तो कोई बात नहीं हुई न कि आप प्रधानमंत्री जी के ऊपर डंडे मारने के लिए युवाओं को उकसाने लगें। अगर हां, आप प्रधानमंत्री जी को आगाह कर रहे थे तो बात अलग है।

लिखते लिखते: वोटिंग के बाद एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे हैं। एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार भाजपा को बहुत बड़ा ‘लाभ’ हो रहा है और आम आदमी पार्टी को ‘नुकसान’। भाजपा की सीटें पिछली बार की तीन सीटों से तो अवश्य ही बढ़ रही हैं। लगे रहो, मोटा भाई। कभी न कभी तो आप सारे मतदाताओं में हिन्दू-मुसलमान, भारत-पाकिस्तान करवा कर ही मानोगे। आपको इसके सिवाय और कुछ आता भी नहीं है। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Delhi Assembly Election 2020
Shaheen Bagh
EVM
Amit Shah
BJP
manoj tiwari
Narendra modi
AAP
Arvind Kejriwal
Congress
Rahul Gandhi

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License