NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली में 'आप' ही 'आप', बीजेपी दूर...बहुत दूर, कांग्रेस का अता-पता नहीं
आप की यह जीत इस लिहाज से भी दिलचस्प है क्योंकि करीब आठ माह पहले हुए लोकसभा चुनाव में आप को यहां करारी शिकस्त मिली थी और दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Feb 2020
aap wins
Image courtesy: Twitter

दिल्ली : दिल्ली में बिजली, पानी, शिक्षा और विकास को अपना चुनावी मुद्दा बनाने वाली आम आदमी पार्टी एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है। इस चुनाव में आप की मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा दूसरे नंबर पर है लेकिन आप से बहुत बहुत दूर है और कांग्रेस का तो कोई नामो-निशान ही नहीं है।

निर्वाचन आयोग के ताजा आकड़ों के मुताबिक आम आदमी पार्टी (आप) 70 में से 62 सीटों जीत रही है जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मात्र 8 सीटों पर है। अब तक घोषित कुल 51 नतीजों में आप को 46 और बीजेपी को 5 सीटें मिली हैं। 

आप की यह जीत इस लिहाज से भी दिलचस्प है क्योंकि करीब आठ माह पहले हुए लोकसभा चुनाव में आप को यहां करारी शिकस्त मिली थी और दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

चुनाव जीतने वालों में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, राघव चड्ढा, आतिशी, गोपाल राय, सत्येन्द्र जैन आदि शामिल हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव दिल्ली सहित देशभर में संशोधित नागरिकता कानून, राष्ट्रीय नागरिक पंजी और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के विरोध में जारी प्रदर्शनों के बीच हुआ था। 

भाजपा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने पार्टी पर ‘विभाजनकारी’ राजनीति करने और राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग क्षेत्र में 50 दिन से चले रहे महिलाओं के प्रदर्शन का मुद्दा उठाने को लेकर उस पर मतदाताओं के ध्रुवीकरण का आरोप लगाया था।

चुनाव में एक ओर भाजपा का प्रचार जहां राष्ट्रीय सुरक्षा, सीएए और अन्य मुद्दे पर केन्द्रित था, वहीं आप ने अपना प्रचार शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत ढांचे पर केन्द्रित रखा था।  

केजरीवाल की अगुवाई में पिछले चुनाव में आप ने दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी और एक प्रकार से भाजपा तथा कांग्रेस का सफाया कर दिया था। 

आप प्रवक्ता संजय सिंह ने संवाददताओं से कहा, ‘‘हम शुरुआत से ही कह रहे थे कि आगामी चुनाव हमारे किए काम के आधार पर लड़ा जाएगा।’’

पार्टी कार्यकर्ता फरीन खान ने पार्टी कार्यालय में कहा,‘‘हमें उम्मीद है कि हमें ऐसा स्पष्ट बहुमत मिलेगा जिससे यह संदेश जाएगा कि हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से अब काम नहीं चलेगा।’’

आप के प्रमुख चेहरे मनीष सिसोदिया ने पटपड़गंज सीट से जीत हासिल करने के बाद कहा कि भाजपा ने “नफरत की राजनीति” की, लेकिन लोगों ने खुद को बांटे जाने से इनकार कर दिया। 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ भाजपा ने नफरत की राजनीति की, लेकिन मैं पटपड़गंज के लोगों को धन्यवाद देता हूं। आज, दिल्ली के लोगों ने ऐसी सरकार को चुना जो उनके लिए काम करती है और उन्होंने अपने जनादेश के जरिए राष्ट्रवाद का सही अर्थ समझाया।”
इस बीच, पार्टी मुख्यालय को सफेद और नीले रंग के गुब्बारों से सजाया गया तथा कार्यालय के विभिन्न हिस्सों में केजरीवाल की तस्वीरें लगाई गई।

मत प्रतिशत बढ़ा : मनोज तिवारी

दिल्ली भाजपा के प्रमुख मनोज तिवारी ने मंगलवार को कहा कि पार्टी इस बात की समीक्षा करेगी कि वह अपनी उम्मीदों को हासिल करने में क्यों विफल रही। हालांकि उन्हें इस बात में नैतिक जीत नजर आई कि पार्टी का मत प्रतिशत 2015 की तुलना में बढ़ गया है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ दिल्ली ने सोच समझकर जनादेश दिया होगा। हमारा मत प्रतिशत 32 फीसद से बढ़कर 38 फीसद हो गया। दिल्ली ने हमें खारिज नहीं किया। हमारे मत प्रतिशत में वृद्धि हमारे लिए एक अच्छा संकेत है।’’

पार्टी में जान फूंकने का संकल्प : कांग्रेस 

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली है और पार्टी में जमीनी स्तर तक जान फूंकने का संकल्प किया है। 

कांग्रेस ने कहा कि चुनाव परिणाम भाजपा के लिए यह संदेश है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘‘सबसे जहरीले प्रचार’’ को नकारा गया है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जनता का जनादेश हमारे खिलाफ है, हम इसे स्वीकार करते हैं। हमने कांग्रेस को जमीनी स्तर पर और नए सिरे से मजबूत करने का संकल्प लिया है।’’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Delhi Assembly Election 2020
AAP
AAP wins
Arvind Kejriwal
BJP
Amit Shah
manoj tiwari
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग


बाकी खबरें

  • AUKUS May put NATO’s Future into Question
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    नाटो के भविष्य को संकट में डाल सकता है एयूकेयूएस 
    25 Sep 2021
    इस डील के परिणामस्वरूप दो ऐतिहासिक साझीदारों, अमेरिका एवं फ्रांस के संबंधों में गंभीर दरार आ गई है। इससे नाटो को भी आनुषांगिक रूप से घाटा हो सकता है।
  • Tamil Nadu
    नीलाबंरन ए
    तमिलनाडु के मछुआरे समुद्री मत्स्य उद्योग विधेयक के ख़िलाफ़ अपना विरोध तेज़ करेंगे
    25 Sep 2021
    मछुआरे समुदाय का आरोप है कि विधेयक और ब्ल्यू इकॉनमी मसौदा नीति कॉर्पोरेट संस्थाओं के हितों का पक्षपोषण करती है।
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    क्या शांति की ओर बढ़ रहा है अफ़ग़ानिस्तान?
    25 Sep 2021
    अफ़गान अर्थव्यवस्था को उबारने में चीन की तत्परता एक बिल्कुल नया कारक है। अब बाइडेन प्रशासन अफ़गानिस्तान और मध्य एशिया में और अधिक उलझावों में शामिल नहीं होना चाहता है, इन हालत में अफ़गानिस्तान के पड़ोसी…
  • Kannur University
    सुचिंतन दास
    नहीं पढ़ने का अधिकार
    25 Sep 2021
    नफ़रत और कट्टरता से भरी बातों को पढ़ने से इनकार कर के कन्नूर विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस सिलेबस की समीक्षा करने और इसके ज़रिये शासन की विस्तारात्मक नीति का  विरोध कर अहम राजनीतिक कार्य को अंजाम…
  • Harshil farmers
    वर्षा सिंह
    हर्षिल के सेब किसानों की समस्याओं का हल क्यों नहीं ढूंढ पायी उत्तराखंड सरकार
    25 Sep 2021
    हर्षिल के काश्तकारों ने इस महोत्सव का सीधे तौर पर बायकॉट कर दिया। महोत्सव शुरू होने के चार रोज़ पहले से ही हर्षिल में धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया था। महोत्सव के दिन हर्षिल में किसानों ने ढोल-दमाऊं जैसे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License